25 सितंबर 2026
फ़िल्मी दुनिया

Dev Anand Birth Anniversary: 30 रुपए लेकर मुंबई पहुंचे थे देव आनंद, अपने अंदाज और ‘गाइड’ से बने हिंदी सिनेमा के एवरग्रीन स्टार

26 सितंबर 1923 को जन्मे देव आनंद ने छह दशक से अधिक लंबे फिल्मी सफर में अभिनेता, निर्माता, निर्देशक और लेखक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। ‘जिद्दी’, ‘बाजी’, ‘गाइड’, ‘ज्वेल थीफ’ और ‘हरे राम हरे कृष्णा’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार सितारों में शामिल किया।

Dev Anand Birth Anniversary: 30 रुपए लेकर मुंबई पहुंचे थे देव आनंद, अपने अंदाज और ‘गाइड’ से बने हिंदी सिनेमा के एवरग्रीन स्टार

मुंबई। हिंदी सिनेमा में कुछ सितारे अपनी फिल्मों के साथ-साथ अपने अंदाज की वजह से भी हमेशा याद किए जाते हैं। देव आनंद उन्हीं कलाकारों में शामिल हैं। तेज चाल, अलग अंदाज में संवाद बोलना, सिर को हल्का झुकाकर मुस्कुराना और स्टाइलिश कपड़े—इन सबने उनकी ऐसी पहचान बनाई, जिसकी नकल कई पीढ़ियों ने की।

26 सितंबर 1923 को जन्मे देव आनंद की 2026 में 103वीं जयंती है। उनका जन्म नाम धरमदेव पिशोरीमल आनंद था। उन्होंने लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई की और 1943 में महज करीब 30 रुपए लेकर मुंबई पहुंचे थे। फिल्मों में जगह बनाने से पहले उन्हें लगभग दो साल संघर्ष करना पड़ा।

‘हम एक हैं’ से शुरुआत, ‘जिद्दी’ ने दिलाई पहचान

देव आनंद को 1946 में प्रभात फिल्म्स की ‘हम एक हैं’ में मुख्य भूमिका मिली। इसके बाद 1948 की ‘जिद्दी’ उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुई और उन्हें लोकप्रियता मिलने लगी।

इसके बाद ‘बाजी’, ‘जाल’, ‘टैक्सी ड्राइवर’, ‘सीआईडी’, ‘काला पानी’, ‘काला बाजार’ और ‘हम दोनों’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा के प्रमुख सितारों की कतार में खड़ा कर दिया।

भाई चेतन आनंद के साथ बनाई नवकेतन फिल्म्स

देव आनंद ने 1949 में अपने बड़े भाई और फिल्मकार चेतन आनंद के साथ नवकेतन फिल्म्स की स्थापना की। यही बैनर आगे चलकर हिंदी सिनेमा की कई चर्चित फिल्मों का केंद्र बना।

उनके छोटे भाई विजय आनंद के निर्देशन में बनी ‘गाइड’, ‘ज्वेल थीफ’, ‘काला बाजार’ और ‘जॉनी मेरा नाम’ जैसी फिल्मों को आज भी हिंदी सिनेमा की चर्चित फिल्मों में गिना जाता है।

‘गाइड’ ने करियर को दी नई ऊंचाई

1965 में रिलीज हुई ‘गाइड’ देव आनंद के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में मानी जाती है। आर.के. नारायण के उपन्यास पर आधारित इस फिल्म में देव आनंद ने राजू गाइड की भूमिका निभाई थी। फिल्म में उनके साथ वहीदा रहमान थीं।

इसके बाद 1967 में आई ‘ज्वेल थीफ’ ने उनके स्टाइलिश और रहस्यपूर्ण स्क्रीन व्यक्तित्व को और मजबूत किया। विजय आनंद के साथ उनकी फिल्मी साझेदारी लंबे समय तक याद की गई।

एक्टर ही नहीं, निर्माता-निर्देशक और लेखक भी

देव आनंद ने खुद को केवल अभिनय तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने निर्माण, निर्देशन और लेखन में भी लगातार काम किया। ‘प्रेम पुजारी’ से उन्होंने निर्देशन में कदम रखा, जबकि ‘हरे राम हरे कृष्णा’ जैसी फिल्मों में उन्होंने उस दौर के सामाजिक बदलावों और युवाओं से जुड़े विषयों को पर्दे पर उतारा।

2011 तक वह फिल्मों में सक्रिय रहे। उनकी अंतिम फिल्म ‘चार्जशीट’ थी। अपने 88वें जन्मदिन के आसपास भी वह नई फिल्मों और पटकथाओं पर काम कर रहे थे।

88 की उम्र में भी ऑफिस के बाहर इंतजार करते थे फैंस

देव आनंद की लोकप्रियता का अंदाजा उनके आखिरी जन्मदिन से लगाया जा सकता है। 26 सितंबर 2011 को 88वें जन्मदिन के मौके पर उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके प्रशंसक उनसे मिलने के लिए ऑफिस के बाहर इंतजार कर रहे थे और वह उनके प्यार की वजह से उनसे मिलना अपना दायित्व मानते थे।

यह उनका उत्साह ही था कि उम्र के अंतिम पड़ाव तक वह फिल्मों को लेकर उतने ही सक्रिय दिखाई देते थे जितने अपने शुरुआती वर्षों में।

‘काला पानी’ और ‘गाइड’ के लिए मिला फिल्मफेयर

देव आनंद को ‘काला पानी’ के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला था। ‘गाइड’ में उनके अभिनय को भी फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर सम्मान मिला।

एक तथ्य-सुधार यह भी है कि उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड 1992 में दिया गया था, न कि 1991 में।

भारत सरकार ने उन्हें 2001 में पद्म भूषण और भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए 2002 का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया।

3 दिसंबर 2011 को लंदन में निधन

देव आनंद का निधन 3 दिसंबर 2011 को लंदन में 88 वर्ष की उम्र में हुआ। करीब छह दशक से अधिक लंबे करियर के दौरान उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों में काम किया और हिंदी सिनेमा की कई पीढ़ियों पर अपनी छाप छोड़ी।

देव आनंद आज भले हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्मों, उनकी मुस्कान और उनके खास अंदाज ने उन्हें भारतीय सिनेमा का हमेशा याद किया जाने वाला ‘एवरग्रीन स्टार’ बना दिया।

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