25 सितंबर 2026
लाइफ स्टाइल

24 घंटे खाना न खाएं तो शरीर में क्या होता है? वजन घटने से लेकर कमजोरी तक, जानिए फायदे और नुकसान

24 घंटे के उपवास में शरीर पहले ग्लूकोज और ग्लाइकोजन का इस्तेमाल करता है, फिर ऊर्जा के लिए वसा और कीटोन पर निर्भरता बढ़ने लगती है। हालांकि वजन घटाने के लिए यह सामान्य कैलोरी नियंत्रण से बेहतर साबित नहीं हुआ है और हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित भी नहीं है।

24 घंटे खाना न खाएं तो शरीर में क्या होता है? वजन घटने से लेकर कमजोरी तक, जानिए फायदे और नुकसान

दिनभर यानी करीब 24 घंटे तक कुछ न खाना इंटरमिटेंट फास्टिंग के तरीकों में से एक है। कई लोग धार्मिक कारणों से उपवास करते हैं, जबकि कुछ वजन कम करने के उद्देश्य से 24 घंटे का फास्ट अपनाते हैं।

इस दौरान आमतौर पर पानी और अन्य बिना कैलोरी वाले पेय लिए जाते हैं। हालांकि 24 घंटे का उपवास हर व्यक्ति के लिए सही या जरूरी नहीं है। खासकर कुछ स्वास्थ्य स्थितियों और दवाओं के साथ लंबे समय तक भूखे रहना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

आखिर एक दिन खाना न खाने पर शरीर के अंदर क्या होता है? आइए समझते हैं।

शुरुआत में ग्लूकोज से मिलती है शरीर को ऊर्जा

हम जो भोजन करते हैं, उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट पाचन के बाद ग्लूकोज में बदलते हैं। शरीर इस ग्लूकोज का इस्तेमाल ऊर्जा के लिए करता है।

जरूरत से अधिक ग्लूकोज का एक हिस्सा लिवर और मांसपेशियों में ग्लाइकोजन के रूप में जमा रहता है।

खाना न मिलने पर शरीर पहले उपलब्ध ग्लूकोज और फिर जमा ग्लाइकोजन का इस्तेमाल ऊर्जा के लिए करने लगता है।

फिर बढ़ता है फैट और कीटोन का इस्तेमाल

उपवास बढ़ने पर लिवर में मौजूद ग्लाइकोजन का भंडार कम होने लगता है। इसके बाद शरीर ऊर्जा के लिए वसा का इस्तेमाल बढ़ाता है और फैटी एसिड से कीटोन बॉडीज बनने लगती हैं।

JAMA के अनुसार करीब 8 से 12 घंटे या उससे अधिक समय के उपवास के बाद कीटोन उत्पादन बढ़ सकता है, हालांकि यह प्रक्रिया व्यक्ति की डाइट, शारीरिक गतिविधि और मेटाबॉलिज्म पर निर्भर करती है।

शरीर कुछ ग्लूकोज ग्लूकोनियोजेनेसिस नामक प्रक्रिया से भी बनाता रहता है। इसमें लैक्टेट, ग्लिसरॉल और कुछ अमीनो एसिड जैसे पदार्थ इस्तेमाल होते हैं।

क्या 24 घंटे उपवास करने से वजन कम होता है?

उपवास के दौरान कैलोरी का सेवन कम होने से वजन घटाने में मदद मिल सकती है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि 24 घंटे भूखा रहना सामान्य कैलोरी नियंत्रण से बेहतर है।

100 वयस्कों पर किए गए एक साल के randomized trial में alternate-day fasting और रोजाना कैलोरी कम करने वाले समूह के वजन घटने में महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया। फास्टिंग वाले समूह में इसे बीच में छोड़ने वालों की संख्या भी अधिक थी।

इसलिए वजन कम होने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका लंबे समय तक बनाए जा सकने वाले कुल कैलोरी संतुलन और स्वस्थ खानपान की रहती है।

ब्लड शुगर पर भी पड़ सकता है असर

कुछ प्रकार की इंटरमिटेंट फास्टिंग पर हुए अध्ययनों में वजन और ब्लड शुगर नियंत्रण में सुधार पाया गया है।

NIH द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में मोटापे और टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में सीमित समय के भीतर भोजन करने से छह महीनों में वजन कम हुआ और औसत ब्लड ग्लूकोज में भी सुधार देखा गया। हालांकि यह अध्ययन सीधे 24 घंटे भूखे रहने पर आधारित नहीं था।

इसलिए अलग-अलग प्रकार की फास्टिंग के परिणामों को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए।

24 घंटे के उपवास से क्या नुकसान हो सकते हैं?

कुछ लोगों को लंबे समय तक भोजन न करने पर भूख, कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर, चिड़चिड़ापन, मतली या ध्यान लगाने में परेशानी महसूस हो सकती है।

अगर उपवास में पानी भी नहीं लिया जा रहा है तो डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी का खतरा बढ़ सकता है।

लंबा उपवास करने के बाद अचानक बहुत ज्यादा भोजन करना भी पेट में भारीपन और अतिरिक्त कैलोरी सेवन का कारण बन सकता है।

डायबिटीज वालों के लिए हो सकता है ज्यादा जोखिम

डायबिटीज में उपवास विशेष सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। खासकर इंसुलिन या ब्लड शुगर कम करने वाली कुछ दवाएं लेने वाले लोगों में भोजन न करने से हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर बहुत कम होने का खतरा बढ़ सकता है।

दवा की मात्रा अपने आप घटाना या बंद करना भी सुरक्षित नहीं है। डायबिटीज वाले व्यक्ति को लंबे उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

किन लोगों को 24 घंटे का फास्ट नहीं करना चाहिए?

18 साल से कम उम्र के बच्चों और किशोरों, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं, टाइप-1 डायबिटीज में इंसुलिन लेने वालों और ईटिंग डिसऑर्डर का इतिहास रखने वाले लोगों को इंटरमिटेंट फास्टिंग से बचने की सलाह दी जाती है।

अन्य पुरानी बीमारियों या नियमित दवाओं वाले लोगों को भी 24 घंटे का फास्ट शुरू करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लेना बेहतर है।

तो क्या 24 घंटे का उपवास फायदेमंद है?

स्वस्थ वयस्कों में कभी-कभार 24 घंटे का उपवास सहन किया जा सकता है, लेकिन वजन घटाने के लिए यह कोई जादुई तरीका नहीं है।

शोध बताते हैं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग कुछ लोगों के लिए वजन नियंत्रित करने का उपयोगी तरीका हो सकती है, लेकिन सामान्य कैलोरी नियंत्रण की तुलना में इसका वजन घटाने वाला लाभ लगातार बेहतर साबित नहीं हुआ है।

इसलिए फास्टिंग का तरीका वही चुनना बेहतर है जिसे लंबे समय तक सुरक्षित तरीके से अपनाया जा सके और जिसमें शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिलते रहें।

e
लेखक

editor

पाठक प्रतिक्रियाएं

अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं है।

आपकी प्रतिक्रिया समीक्षा के बाद प्रकाशित हो सकती है।