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किराए के मकान से चल रहा था करोड़ों का ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क, 5 गिरफ्तार; दुबई-कंबोडिया-श्रीलंका कनेक्शन की जांच

ग्वालियर के गिरवाई क्षेत्र स्थित सांवरिया धाम में साइबर क्राइम विंग और क्राइम ब्रांच ने ऑनलाइन गेमिंग-सट्टेबाजी तथा संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन से जुड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक चार युवकों को मौके से पकड़ा गया, जबकि पूछताछ के बाद सामने आए उदय चौहान को भी गिरफ्तार किया गया है। इस तरह गिरफ्तार आरोपियों की संख्या पांच है, जबकि संजय रावत की तलाश की जा रही है। पुलिस ने 19 मोबाइल, 38 सिम, 17 ATM कार्ड सहित बड़ी मात्रा में डिजिटल और बैंकिंग सामग्री जब्त की है। प्रारंभिक जांच में हर महीने करीब ₹5-6 करोड़ के ट्रांजेक्शन और दुबई, कंबोडिया व श्रीलंका से कथित कनेक्शन के संकेत मिले हैं। पुलिस अब म्यूल बैंक खातों और USDT के जरिए रकम विदेश भेजे जाने के दावे की जांच कर रही है।

किराए के मकान से चल रहा था करोड़ों का ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क, 5 गिरफ्तार; दुबई-कंबोडिया-श्रीलंका कनेक्शन की जांच

ग्वालियर। शहर के एक किराए के मकान में बैठकर कथित तौर पर संचालित हो रहे ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन के बड़े नेटवर्क का ग्वालियर पुलिस ने खुलासा किया है। क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम विंग की संयुक्त कार्रवाई में अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के तार दुबई, कंबोडिया और श्रीलंका से जुड़े होने के संकेत मिलने की बात कही गई है।

पुलिस के मुताबिक नेटवर्क में हर महीने करीब 5 से 6 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन किए जा रहे थे। इस हिसाब से सालभर में लेनदेन का आंकड़ा करीब 60 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि यह रकम सीधे तौर पर ठगी की राशि नहीं, बल्कि पुलिस जांच में सामने आया कथित ट्रांजेक्शन वॉल्यूम है।

हर महीने ₹5-6 करोड़ के ट्रांजेक्शन का दावा
पुलिस की प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई है। नेटवर्क में म्यूल बैंक खातों, बड़ी संख्या में सिम कार्ड और डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।

गिरवाई के किराए के मकान पर पुलिस की दबिश

पुलिस को सूचना मिली थी कि गिरवाई-माधौगंज क्षेत्र के सांवरिया धाम फेस-1 स्थित एक मकान की ऊपरी मंजिल से ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइट पर डिपॉजिट-विथड्रॉल और बैंक खातों में रकम के लेनदेन का काम किया जा रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद साइबर क्राइम विंग और क्राइम ब्रांच की टीम ने मकान पर दबिश दी।

पुलिस के अनुसार मौके पर चार युवक लैपटॉप और मोबाइल फोन के जरिए काम करते मिले। इनकी पहचान राजा रायकवार निवासी झांसी, नीलेश रावत निवासी दतिया तथा पंकज पाल और रानू रावत निवासी शिवपुरी के रूप में की गई।

पूछताछ और आगे की जांच में उदय चौहान का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार किया। इस तरह मामले में अब तक कुल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी है।

19 मोबाइल, 38 सिम और 17 ATM कार्ड जब्त

मकान की तलाशी के दौरान पुलिस को बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज और सिम कार्ड मिले। पुलिस ने इन सामग्रियों को जब्त कर तकनीकी जांच शुरू कर दी है।

पुलिस ने क्या-क्या जब्त किया
1 लैपटॉप
2 टैबलेट
19 मोबाइल फोन
17 ATM कार्ड
4 बैंक पासबुक
9 चेकबुक
38 सिम कार्ड
लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और हिसाब-किताब

पुलिस अब मोबाइल फोन, लैपटॉप और टैबलेट की डिजिटल फॉरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नेटवर्क से कितने बैंक खाते जुड़े थे और इनमें कितनी रकम का वास्तविक लेनदेन हुआ।

Fairplay-1 के जरिए डिपॉजिट और विथड्रॉल का काम

पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने Fairplay-1 डॉट कॉम नाम की वेबसाइट पर ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े डिपॉजिट और विथड्रॉल का काम करने की बात कही है। अलग-अलग बैंक खातों में रकम आने के बाद मोबाइल फोन से भुगतान की पुष्टि की जाती थी और उसके आधार पर वेबसाइट पर संबंधित ट्रांजेक्शन स्वीकार किया जाता था।

पुलिस का कहना है कि बैंक खातों की जानकारी कथित तौर पर व्हाट्सऐप के जरिए उपलब्ध कराई जाती थी। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन खातों का वास्तविक मालिक कौन था और खाते नेटवर्क तक किसके जरिए पहुंचे।

म्यूल बैंक अकाउंट पर पुलिस की नजर
पुलिस को संदेह है कि रकम के लेनदेन के लिए ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था, जिन्हें कमीशन या अन्य माध्यम से नेटवर्क को उपलब्ध कराया गया था। साइबर अपराध की भाषा में ऐसे खातों को आम तौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है।

दुबई, कंबोडिया और श्रीलंका तक कनेक्शन की जांच

पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में नेटवर्क के दुबई, कंबोडिया और श्रीलंका से जुड़े होने के संकेत मिलने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन देशों में बैठे किन लोगों से संपर्क था, वेबसाइट का वास्तविक संचालन कहां से हो रहा था और करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन का अंतिम लाभार्थी कौन था।

फिलहाल विदेशी कनेक्शन पुलिस की जांच का हिस्सा है। इसकी पूरी प्रकृति और विदेश में बैठे कथित संचालकों की भूमिका डिजिटल तथा बैंकिंग साक्ष्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

USDT के जरिए विदेश भेजी जाती थी रकम?

जांच में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। पुलिस के मुताबिक कथित तौर पर म्यूल बैंक खातों में आने वाली रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के बाद USDT जैसी क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से विदेश भेजे जाने की जानकारी मिली है।

पुलिस अब बैंकिंग ट्रांजेक्शन के साथ डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टो ट्रांजेक्शन की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। यह जांच का विषय है कि कितनी रकम वास्तव में क्रिप्टो में बदली गई और उसका अंतिम गंतव्य कहां था।

USBT नहीं, USDT
प्रारंभिक कॉपी में “USBT” लिखा गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार पुलिस जांच में जिस डिजिटल एसेट का उल्लेख है, वह USDT है। USDT एक क्रिप्टो स्टेबलकॉइन है और पुलिस इसी माध्यम से कथित रकम ट्रांसफर किए जाने की कड़ी की जांच कर रही है।

₹20 हजार महीने पर काम करने का दावा

पुलिस पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार मौके से पकड़े गए कुछ युवकों को कथित तौर पर करीब 20 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते थे। उनका काम मोबाइल और लैपटॉप पर आने वाले डिपॉजिट तथा विथड्रॉल से संबंधित गतिविधियों को संभालना बताया गया है।

पुलिस के मुताबिक उदय चौहान और संजय रावत की भूमिका बैंक खाते, मोबाइल, सिम और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने में होने की जांच की जा रही है। उदय चौहान को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि संजय रावत की तलाश जारी बताई गई है।

₹60 करोड़ का आंकड़ा ठगी की रकम नहीं

पुलिस जांच में हर महीने करीब 5 से 6 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। इसी आधार पर सालाना लेनदेन का अनुमान करीब 60 करोड़ रुपये लगाया जा रहा है।

यहां यह अंतर महत्वपूर्ण है कि 60 करोड़ रुपये का आंकड़ा फिलहाल कथित वार्षिक ट्रांजेक्शन का अनुमान है, इसे सीधे 60 करोड़ रुपये की साइबर ठगी या आरोपियों की कमाई नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक रकम और उसके स्रोत का निर्धारण बैंकिंग तथा डिजिटल जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।

मामला एक नजर में
स्थान — सांवरिया धाम फेस-1, गिरवाई, ग्वालियर
गिरफ्तार आरोपी — 5
जब्त मोबाइल — 19
जब्त सिम कार्ड — 38
ATM कार्ड — 17
लैपटॉप — 1
टैबलेट — 2
पासबुक — 4
चेकबुक — 9
कथित मासिक ट्रांजेक्शन — ₹5 से ₹6 करोड़
सालाना अनुमानित ट्रांजेक्शन — करीब ₹60 करोड़
विदेशी कनेक्शन — दुबई, कंबोडिया और श्रीलंका की जांच
फरार/तलाश — संजय रावत

बैंक खातों से लेकर विदेशी नेटवर्क तक खंगाल रही पुलिस

मामले की जांच अब गिरफ्तार आरोपियों से आगे बढ़कर बैंक खातों, सिम कार्ड उपलब्ध कराने वालों, डिजिटल वॉलेट, कथित विदेशी संपर्क और वेबसाइट से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंच गई है। पुलिस यह भी जांच रही है कि बरामद या चिन्हित बैंक खातों का इस्तेमाल अन्य साइबर फ्रॉड की रकम के लेनदेन में तो नहीं हुआ।

पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, पब्लिक गैम्बलिंग एक्ट और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी दी है। डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच जारी है।

विदेशी कनेक्शन, साइबर फ्रॉड और करोड़ों रुपये के लेनदेन से जुड़े तथ्य फिलहाल पुलिस की प्रारंभिक जांच और आरोप हैं। गिरफ्तार व्यक्तियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

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लेखक

Arti Lodhi

Editor In Chief

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