बालाघाट। जिले के बैगा बहुल इलाकों में बच्चों की मौत को लेकर जारी चिंता के बीच उकवा क्षेत्र के सुंदरवाही गांव की 11 वर्षीय सुषमा मर्सकोले की जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। बच्ची पिछले छह दिनों से अस्पताल में भर्ती थी। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को बालाघाट के प्रभावित आदिवासी क्षेत्र का दौरा करने वाले हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघ्न दाहिया के मुताबिक सुषमा में मलेरिया की पुष्टि होने के बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। बच्ची को मलेरिया के साथ अन्य स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं भी थीं। उपचार के दौरान मलेरिया नियंत्रित होने के बावजूद उसकी स्थिति गंभीर बनी रही और वह अचेत अवस्था में थी। बुधवार देर रात करीब दो बजे उसकी मौत हो गई।
रात करीब दो बजे हुई मौत
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक इलाज के दौरान बच्ची की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। वह अचेत अवस्था में थी और चिकित्सकीय निगरानी में उसका उपचार जारी था। बुधवार देर रात करीब दो बजे उसने दम तोड़ दिया।
इसके बाद परिजन एंबुलेंस से बच्ची का शव लेकर सुंदरवाही गांव पहुंचे। गुरुवार को उसका अंतिम संस्कार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
30 से अधिक बच्चों की मौत की अलग-अलग रिपोर्ट
बालाघाट के बैहर और बिरसा क्षेत्र के दूरस्थ आदिवासी गांवों में पिछले कुछ महीनों में बच्चों की मौत का मामला लगातार चर्चा में है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में 30 से अधिक बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। हालांकि कुल मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों और राजनीतिक पक्षों की ओर से अलग-अलग आंकड़े दिए गए हैं।
ऐसे में किसी एक संख्या को अंतिम आधिकारिक आंकड़ा मानने के बजाय स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन द्वारा की जा रही केसवार समीक्षा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सिर्फ एक बीमारी नहीं, कई स्वास्थ्य कारण आए सामने
प्रभावित इलाकों में हुई जांच में स्थिति को केवल मलेरिया या किसी एक बीमारी से जोड़ने के बजाय कई चिकित्सकीय परिस्थितियों की पहचान की गई है। इनमें खसरा, मलेरिया, खसरा-मलेरिया सह-संक्रमण, कुपोषण, एनीमिया, डिहाइड्रेशन और सांस संबंधी समस्याएं शामिल हैं।
राष्ट्रीय स्तर की जांच में भी उपलब्ध मामलों को किसी एक रोगजनक के कारण हुई मौतों के रूप में वर्गीकृत करने से सावधानी बरतने की बात सामने आई है। इसलिए प्रत्येक बच्चे की मृत्यु का चिकित्सकीय कारण उसकी जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर अलग-अलग देखा जाना जरूरी है।
NJORT की रिपोर्ट में क्या सामने आया?
राष्ट्रीय संयुक्त आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम की जांच में प्रभावित क्षेत्र के 196 मामलों का विश्लेषण किया गया था, जिनमें 156 मरीज 10 साल से कम उम्र के बच्चे थे। जांचे गए 64 नमूनों में 25 में खसरे की पुष्टि हुई, जबकि मलेरिया के लिए जांचे गए 32 मरीजों में 27 पॉजिटिव पाए गए। 12 मरीजों में खसरा और मलेरिया दोनों संक्रमण मिले।
रिपोर्ट में बीमारी की निगरानी, प्रयोगशाला सुविधाओं, डेटा प्रबंधन, टीकाकरण और स्वास्थ्य मानव संसाधन से जुड़ी कमियों का भी उल्लेख किया गया। इसके साथ गंभीर कुपोषण वाले बच्चों की पहचान और प्रभावित गांवों में सक्रिय निगरानी मजबूत करने की सिफारिश की गई।
केंद्र और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जांच में कई अलग-अलग चिकित्सकीय परिस्थितियां सामने आई हैं। इसलिए बालाघाट में हुई सभी बच्चों की मौतों को केवल मलेरिया, खसरा या कुपोषण से जोड़कर देखना उपलब्ध साक्ष्यों का पूरा चित्र नहीं होगा।
आज जगला गांव पहुंचेंगे राहुल गांधी
बालाघाट में बच्चों की मौत का मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 1 अक्टूबर को बैहर तहसील के जगला गांव पहुंचेंगे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात करेंगे।
राहुल गांधी पहले महाराष्ट्र के गोंदिया पहुंचेंगे और वहां से सड़क मार्ग से बालाघाट आएंगे। उनका जगला गांव पहुंचने का समय करीब दोपहर 2:15 बजे निर्धारित है। यहां करीब 45 मिनट तक प्रभावित परिवारों से मुलाकात का कार्यक्रम है और इसके बाद लगभग तीन बजे मीडिया से बातचीत निर्धारित है।
कांग्रेस उठा रही स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल
कांग्रेस नेताओं ने प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, कुपोषण और समय पर उपचार को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। ये विपक्ष की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
दूसरी ओर राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने के लिए कदम उठाने की जानकारी दी है। सरकार के अनुसार बालाघाट जिले में नए चिकित्सा अधिकारियों की पदस्थापना, स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त राशि तथा नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उप-स्वास्थ्य केंद्र और मोबाइल मेडिकल यूनिट की व्यवस्था की जा रही है।
स्वास्थ्य संकट की कई परतें
राष्ट्रीय जांच में सामने आए निष्कर्ष बताते हैं कि प्रभावित क्षेत्र में चुनौती केवल किसी एक संक्रमण तक सीमित नहीं है। बीमारी की समय पर पहचान, दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, टीकाकरण, पोषण, प्रयोगशाला जांच और मरीजों के फॉलोअप जैसे कई पहलू महत्वपूर्ण हैं।
बालाघाट के बैगा बहुल क्षेत्रों में बच्चों की मौतों के वास्तविक कारणों को समझने के लिए प्रत्येक मामले की चिकित्सकीय समीक्षा के साथ व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी जरूरी मानी जा रही है।
11 वर्षीय सुषमा मर्सकोले की मौत के साथ बालाघाट के दूरस्थ आदिवासी इलाकों में बच्चों के स्वास्थ्य का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में है। इसी बीच आज राहुल गांधी प्रभावित परिवारों से मिलने जगला गांव पहुंचने वाले हैं।



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