7 और 8 नवंबर को प्रस्तावित आंदोलन, छह बिजली कंपनियों के आउटसोर्स कर्मचारियों की 34 सूत्रीय मांगों पर प्रबंधन से बातचीत
सच की दुनिया, जबलपुर/भोपाल। मध्य प्रदेश में दीपावली के त्योहार से पहले बिजली व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रदेश की छह बिजली कंपनियों में कार्यरत करीब 45 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 7 और 8 नवंबर 2026 को दो दिवसीय कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है।
यदि कर्मचारियों का प्रस्तावित आंदोलन होता है और पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनती, तो जबलपुर, भोपाल, इंदौर सहित प्रदेश के अन्य जिलों में बिजली से जुड़ी सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, फिलहाल पूरे प्रदेश में बिजली बंद होने या ब्लैकआउट की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
कर्मचारी संगठनों और बिजली कंपनी प्रबंधन के बीच मांगों को लेकर बातचीत भी चल रही है।
प्रदेश: मध्य प्रदेश
प्रभावित कंपनियां: छह
आउटसोर्स कर्मचारी: लगभग 45 हजार
आंदोलन की प्रस्तावित तारीख: 7 और 8 नवंबर
कर्मचारियों की मांगें: 34 सूत्रीय
बैठक का स्थान: निष्ठा परिसर, गोविंदपुरा, भोपाल
मुख्य मांग: ठेका प्रथा समाप्त करना
दुर्घटना मुआवजे की मांग: ₹10 लाख
तकनीकी कर्मचारियों का बीमा: ₹20 लाख
स्थिति: काम बंद की चेतावनी, बातचीत जारी
दीपावली के दौरान दो दिन काम बंद करने की चेतावनी
मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियों में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत हजारों कर्मचारी विभिन्न तकनीकी एवं सहायक सेवाओं में काम कर रहे हैं।
इनमें लाइन हेल्पर, सबस्टेशन ऑपरेटर, प्लांट सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर, मीटर रीडर, सुरक्षा कर्मचारी और वाहन चालक सहित अन्य श्रेणियों के कर्मचारी शामिल हैं।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से उनकी सेवा शर्तों, वेतन और अन्य सुविधाओं से संबंधित मांगें लंबित हैं।
इन्हीं मुद्दों को लेकर 7 और 8 नवंबर को सामूहिक कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है।
भोपाल में प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों की बैठक
भोपाल के गोविंदपुरा स्थित मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के निष्ठा परिसर में प्रबंधन और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन) राकेश शर्मा, आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव, महासचिव दिनेश सिसोदिया और जनता यूनियन के उपाध्यक्ष ओपी सक्सेना शामिल हुए।
बैठक में कर्मचारियों की 34 सूत्रीय मांगों पर चर्चा की गई। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएं प्रबंधन के सामने रखीं।
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, आंदोलन की चेतावनी के बाद प्रबंधन स्तर पर समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं।
20 वर्षों से त्योहारों पर ड्यूटी, अतिरिक्त भुगतान नहीं मिलने का आरोप
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि आउटसोर्स कर्मचारी पिछले करीब 20 वर्षों से दीपावली सहित विभिन्न राष्ट्रीय और धार्मिक त्योहारों पर भी बिजली सेवाओं में योगदान दे रहे हैं।
इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नियमानुसार अतिरिक्त कार्य का पारिश्रमिक नहीं मिलता।
संगठन के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत कर्मचारियों को त्योहारों पर अतिरिक्त ड्यूटी के बदले निर्धारित भुगतान नहीं मिलने की शिकायत है।
हालांकि, इन आरोपों और भुगतान से जुड़े वास्तविक आंकड़ों की पुष्टि संबंधित कंपनियों के रिकॉर्ड से ही होगी।
पंजाब मॉडल की तर्ज पर ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में आउटसोर्स व्यवस्था में सुधार और ठेका प्रथा को समाप्त करना शामिल है।
संगठन का कहना है कि पंजाब की तर्ज पर नई आउटसोर्स सुधार अथवा संविदा नीति बनाई जानी चाहिए।
इसके साथ ही कर्मचारियों के वेतन का भुगतान ठेकेदारों के माध्यम से करने के बजाय संबंधित बिजली कंपनियों द्वारा सीधे बैंक खातों में करने की मांग उठाई गई है।
कर्मचारी योग्यता और वरिष्ठता के अनुसार रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति की व्यवस्था भी चाहते हैं।
वेतन, बोनस और भत्तों सहित कई सुविधाओं की मांग
कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतनमान में सुधार के साथ जोखिम भत्ता, रात्रिकालीन भत्ता, चिकित्सा अवकाश और समय पर वेतन भुगतान की मांग की है।
1. ठेका प्रथा समाप्त की जाए।
2. पंजाब मॉडल की तर्ज पर नीति बने।
3. नियमित नियुक्ति की व्यवस्था हो।
4. न्यूनतम वेतन में सुधार हो।
5. जोखिम और रात्रिकालीन भत्ता मिले।
6. चिकित्सा अवकाश उपलब्ध कराया जाए।
7. बोनस में समानता हो।
8. समय पर वेतन और वेतन पर्ची मिले।
9. सेवा पुस्तिका का संधारण हो।
10. बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था लागू हो।
कर्मचारियों का कहना है कि बिजली सेवा में तकनीकी जोखिम उठाने के बावजूद कई आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
करंट से मौत पर 10 लाख मुआवजा और 20 लाख बीमा की मांग
आंदोलन में कर्मचारियों की सुरक्षा और दुर्घटना बीमा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है।
संगठन ने बिजली संबंधी दुर्घटना में कर्मचारी की मौत होने पर सहायता राशि चार लाख रुपये से बढ़ाकर दस लाख रुपये करने की मांग की है।
इसके अलावा तकनीकी कर्मचारियों के लिए 20 लाख रुपये का बीमा कवर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि जोखिम वाले कार्यों में लगे कर्मचारियों और उनके परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।
बायोमेट्रिक हाजिरी और पारदर्शी वेतन व्यवस्था की मांग
कर्मचारी संगठनों ने बिजली कंपनियों में उपस्थिति दर्ज करने के लिए बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करने की मांग भी की है।
उनका कहना है कि कर्मचारियों की हाजिरी, सेवा अवधि, वेतन और अन्य सुविधाओं के रिकॉर्ड पारदर्शी तरीके से रखे जाने चाहिए।
इसके अलावा नियमित वेतन पर्ची और सेवा संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।
जबलपुर सहित प्रदेश में बिजली सेवाएं प्रभावित होने की आशंका
दीपावली के दौरान बिजली की निर्बाध आपूर्ति और तकनीकी शिकायतों का समय पर निराकरण महत्वपूर्ण होता है।
आउटसोर्स कर्मचारी बिजली वितरण, लाइन रखरखाव, सबस्टेशन संचालन और अन्य सहायक सेवाओं में कार्यरत हैं।
यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी एक साथ कार्य बहिष्कार करते हैं, तो कुछ क्षेत्रों में बिजली संबंधी शिकायतों के निराकरण और मरम्मत कार्यों में देरी हो सकती है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरे मध्य प्रदेश में बिजली आपूर्ति बंद हो जाएगी।
बिजली कंपनियों की वैकल्पिक व्यवस्था, उपलब्ध नियमित कर्मचारियों और आंदोलन में वास्तविक भागीदारी के आधार पर स्थिति प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल प्रदेशव्यापी ब्लैकआउट की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। कर्मचारियों ने काम बंद की चेतावनी दी है, जबकि प्रबंधन के साथ बातचीत भी जारी है। बिजली आपूर्ति प्रभावित होगी या नहीं, यह आंदोलन की वास्तविक स्थिति और बिजली कंपनियों की तैयारियों पर निर्भर करेगा।
प्रबंधन से बातचीत जारी, समाधान पर टिकी निगाहें
चार नवंबर को भोपाल में कर्मचारी संगठनों और प्रबंधन के बीच हुई बैठक के बाद मांगों को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की जानकारी सामने आई है।
पांच नवंबर की एक प्रकाशित रिपोर्ट में भोपाल स्तर पर प्रमुख मांगों को लेकर सकारात्मक चर्चा और जबलपुर में अगली बैठक प्रस्तावित होने का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, छह नवंबर तक उपलब्ध जानकारी में प्रदेशभर में आंदोलन वापस लेने की अंतिम आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है।
ऐसे में आने वाले दो दिनों के दौरान कर्मचारी संगठनों और बिजली कंपनी प्रबंधन के फैसले महत्वपूर्ण होंगे।
मध्य प्रदेश के करीब 45 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों ने 7 और 8 नवंबर को काम बंद करने की चेतावनी दी है।
कर्मचारियों की 34 सूत्रीय मांगों पर बातचीत जारी है। फिलहाल बिजली आपूर्ति बंद होने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं है। आंदोलन और प्रबंधन के बीच अंतिम निर्णय के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।



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