मैहर। घर के आसपास खेल रहे चार साल के बच्चे के लिए एक खुला सेप्टिक टैंक जानलेवा साबित हुआ। मैहर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के परसोखा गांव में गुरुवार शाम चार वर्षीय मासूम की पानी से भरे सेप्टिक टैंक में गिरने से मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा है, वहीं खुले टैंक की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक घटना गुरुवार शाम करीब 5 बजे की है। बच्चा अपने घर के आसपास खेल रहा था। इसी दौरान वह नजदीक बने सेप्टिक टैंक के पास पहुंच गया। टैंक खुला होने के कारण वह उसमें गिर गया। टैंक में पानी भरा हुआ था और बच्चा बाहर नहीं निकल सका।
खेलते-खेलते सेप्टिक टैंक के पास पहुंच गया बच्चा
बताया जा रहा है कि हादसे के समय बच्चा घर के आसपास ही खेल रहा था। खेलते हुए वह कब सेप्टिक टैंक के करीब पहुंच गया, इसका तत्काल किसी को पता नहीं चला। खुले टैंक में गिरने के बाद वह पानी में डूब गया।
जब परिजनों को बच्चे के टैंक में गिरने की जानकारी मिली तो परिवार के लोग तत्काल मौके पर पहुंचे। बच्चे को टैंक से बाहर निकाला गया और बिना समय गंवाए इलाज के लिए सिविल अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल पहुंचाया, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्चे की जांच की, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। प्रारंभिक जानकारी में मौत की वजह पानी में डूबना बताई जा रही है। मौत का चिकित्सकीय कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट से और स्पष्ट होगा।
चार साल के बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। अचानक हुए हादसे से परिजन सदमे में हैं और गांव में भी शोक का माहौल है।
घटना की सूचना मिलने के बाद कोतवाली पुलिस अस्पताल पहुंची और मामले की जानकारी ली। पुलिस ने मर्ग कायम कर हादसे की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।
शव मर्चुरी में रखवाया, पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा
पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई के बाद शव को मर्चुरी में रखवाया है। शुक्रवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपे जाने की बात कही गई है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और जिस सेप्टिक टैंक में बच्चा गिरा, उसके आसपास सुरक्षा के क्या इंतजाम थे।
खुला क्यों छोड़ा गया था सेप्टिक टैंक?
इस घटना ने एक गंभीर सुरक्षा सवाल भी खड़ा कर दिया है। जिस सेप्टिक टैंक में गिरने से बच्चे की मौत हुई, वह खुला कैसे और क्यों था तथा उसके आसपास बच्चों या अन्य लोगों को गिरने से रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था थी या नहीं—इन पहलुओं की जांच जरूरी हो गई है।
सेप्टिक टैंक, पानी की टंकी, निर्माणाधीन गड्ढे या कुएं जैसी जगहों को खुला छोड़ना खासकर छोटे बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे स्थानों को मजबूत ढक्कन या सुरक्षित बैरिकेडिंग से बंद रखना आवश्यक है।
चार साल के बच्चे की मौत के बाद अब यह जांच का विषय है कि खुले सेप्टिक टैंक के लिए जिम्मेदार कौन था, सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे और क्या इस हादसे को सावधानी बरतकर रोका जा सकता था। किसी की जिम्मेदारी तय होना पुलिस एवं संबंधित प्रशासनिक जांच पर निर्भर करेगा।
छोटे बच्चों वाले घरों में अतिरिक्त सावधानी जरूरी
यह घटना एक बार फिर घरों और आबादी वाले इलाकों में खुले टैंक तथा गड्ढों की सुरक्षा की जरूरत की ओर ध्यान खींचती है। छोटे बच्चे खतरे का आकलन नहीं कर पाते, इसलिए पानी की टंकी, सेप्टिक टैंक, कुएं और निर्माणाधीन गड्ढों को मजबूत तरीके से ढकना तथा उनकी पहुंच को सुरक्षित करना बेहद जरूरी है।
फिलहाल कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद घटना से जुड़े अन्य तथ्य स्पष्ट होने की उम्मीद है।



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