राजगढ़। एक तरफ करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से ब्यावरा रेलवे स्टेशन को आधुनिक और खूबसूरत बनाने का काम चल रहा है, दूसरी तरफ यात्रियों और रेलवे की सुरक्षा संभालने वाली RPF और GRP बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझती नजर आ रही हैं। हालात को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्टेशन पर आरोपियों को सुरक्षित रखने के लिए कथित तौर पर एक अदद लॉकअप तक उपलब्ध नहीं है।
स्थिति ऐसी बताई जा रही है कि किसी आरोपी को पकड़ने के बाद उसे कार्यालय के भीतर ही कुर्सी पर बैठाकर निगरानी में रखना पड़ता है। सुरक्षित लॉकअप नहीं होने के कारण जवानों को रातभर पहरा देने की जरूरत पड़ती है। यदि एक साथ कई आरोपी पकड़े जाएं तो उन्हें सुरक्षित रूप से कहां रखा जाए, इसे लेकर भी व्यावहारिक परेशानी सामने आती है।
10x15 फीट के कमरे में सिमटा RPF का पूरा कामकाज
ब्यावरा रेलवे स्टेशन पर RPF की व्यवस्था बेहद सीमित जगह में संचालित होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि करीब 10 बाय 15 फीट के एक कमरे में ही प्रभारी के बैठने, कर्मचारियों के काम करने और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
इतनी कम जगह में सामान्य दफ्तरी कामकाज ही मुश्किल है। ऐसे में किसी आरोपी को पकड़कर लाने के बाद स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। अलग लॉकअप नहीं होने के कारण आरोपी को उसी कार्यालय में निगरानी में रखना पड़ता है।
लॉकअप नहीं होने की स्थिति में एक आरोपी की निगरानी भी अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की जरूरत पैदा करती है। सवाल यह है कि यदि किसी कार्रवाई में एक साथ तीन-चार आरोपी पकड़ लिए जाएं तो उन्हें सुरक्षित रखने की व्यवस्था क्या होगी?
रातभर जवानों को करनी पड़ती है निगरानी
RPF से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक लॉकअप नहीं होने के कारण पकड़े गए व्यक्ति को कार्यालय में ही बैठाकर निगरानी में रखना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर यह भी बताया गया है कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जवानों को पूरी रात उसकी निगरानी करनी पड़ती है।
इस व्यवस्था का असर उपलब्ध स्टाफ पर भी पड़ता है। जिन जवानों को प्लेटफॉर्म, ट्रेन और स्टेशन परिसर की सुरक्षा में लगाया जा सकता है, उन्हें आरोपी की निगरानी में तैनात करना पड़ सकता है।
GRP की हालत और खराब, तलघर में पहुंचा कार्यालय
स्टेशन पर GRP की स्थिति भी बेहतर नहीं बताई जा रही। स्टेशन के पुनर्विकास कार्य के चलते GRP को पुरानी इमारत के तलघर में बने दो संकरे कमरों में शिफ्ट किया गया है।
कम रोशनी और सीमित जगह वाले इन कमरों तक सामान्य यात्री का पहुंचना भी आसान नहीं बताया जा रहा है। किसी यात्री को चोरी, सामान गुम होने या अन्य रेल अपराध की शिकायत दर्ज करानी हो तो GRP कार्यालय ढूंढना ही उसके लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
यहां भी अलग लॉकअप उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में हिरासत में लिए गए व्यक्ति को सुरक्षित रखने को लेकर GRP के सामने भी लगभग वही समस्या है, जिसका सामना RPF कर रही है।
तीन साल से नई जगह की चर्चा, इंतजार अब भी जारी
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार GRP के लिए बेहतर स्थान और नए कार्यालय की व्यवस्था को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई बार चर्चा हुई। जगह चिह्नित करने की प्रक्रिया की बात भी सामने आई, लेकिन स्थायी व्यवस्था अब तक जमीन पर नहीं उतर सकी है।
स्टेशन का पुनर्विकास तेजी से आगे बढ़ने के बीच अब सवाल यह है कि क्या RPF और GRP के लिए पर्याप्त कार्यालय, सुरक्षित लॉकअप और यात्रियों की आसान पहुंच वाली व्यवस्था भी इसी विकास योजना का हिस्सा बनेगी?
आधुनिक प्रतीक्षालय, नया प्रवेश द्वार, बेहतर प्लेटफॉर्म और आकर्षक स्टेशन भवन यात्रियों की सुविधाओं के लिए जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ प्रभावी निगरानी, पुलिस सहायता और पर्याप्त सुरक्षा ढांचा भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
CCTV कैमरों की स्थिति पर भी उठे सवाल
ब्यावरा रेलवे स्टेशन की निगरानी व्यवस्था को लेकर CCTV कैमरों की स्थिति पर भी सवाल सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया गया है कि स्टेशन पर लगे कई कैमरे लंबे समय से काम नहीं कर रहे, जबकि कुछ कैमरों की दिशा ऐसी है कि उनसे उपयोगी निगरानी प्रभावित हो सकती है।
रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थान पर CCTV नेटवर्क अपराध की रोकथाम और जांच दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। यात्री का सामान चोरी होने, संदिग्ध गतिविधि, विवाद अथवा किसी अन्य घटना के बाद CCTV फुटेज जांच की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है।
ऐसे में कैमरों के संचालन, रिकॉर्डिंग और उनकी दिशा का नियमित परीक्षण जरूरी है। कैमरों की वास्तविक कार्यशील स्थिति रेलवे की तकनीकी जांच से ही स्पष्ट हो सकेगी।
ब्यावरा GRP पहले भी संभाल चुकी है बड़े मामलों की जांच
ब्यावरा GRP के सामने केवल छोटे-मोटे मामलों की जिम्मेदारी नहीं होती। रेलवे क्षेत्र में होने वाली चोरी और अन्य अपराधों की जांच भी इसी व्यवस्था को संभालनी पड़ती है। ऐसे मामलों में संदिग्धों से पूछताछ, डिजिटल और CCTV साक्ष्यों की जांच तथा अलग-अलग स्टेशनों के बीच समन्वय की जरूरत पड़ती है।
इसी कारण पर्याप्त कार्यालय, रिकॉर्ड रखने की सुरक्षित जगह और नियमानुसार हिरासत व्यवस्था जैसी सुविधाओं की जरूरत और महत्वपूर्ण हो जाती है।
करीब ₹20 करोड़ से बदल रही स्टेशन की तस्वीर
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत ब्यावरा रेलवे स्टेशन का बड़े स्तर पर पुनर्विकास किया जा रहा है। स्टेशन भवन, यात्री सुविधाओं और दूसरे बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है।
इससे स्टेशन की तस्वीर बदलने की उम्मीद है, लेकिन इसी के साथ अब सुरक्षा व्यवस्था को भी पुनर्विकास के केंद्र में रखने की मांग स्वाभाविक रूप से उठ रही है। यात्रियों के लिए सुंदर स्टेशन के साथ सुरक्षित स्टेशन भी उतना ही जरूरी है।
योजना — अमृत भारत स्टेशन योजना
पुनर्विकास लागत — करीब ₹20 करोड़
जिला — राजगढ़, मध्यप्रदेश
RPF — सीमित जगह में कार्यालय संचालन
RPF लॉकअप — उपलब्ध नहीं होने की बात
GRP — निर्माण के चलते तलघर के कमरों में संचालन
GRP लॉकअप — उपलब्ध नहीं होने की बात
CCTV — कई कैमरों की कार्यशीलता और दिशा पर सवाल
नई व्यवस्था — जगह चिह्नित किए जाने की बात, स्थायी समाधान का इंतजार
RPF प्रभारी बोले—वरिष्ठ अधिकारियों को दी है जानकारी
ब्यावरा RPF प्रभारी धर्म सिंह के मुताबिक लॉकअप नहीं होने के कारण पकड़े गए आरोपी को कार्यालय में ही निगरानी में रखना पड़ता है। उन्होंने बताया कि नए कार्यालय के लिए जगह देखी गई है।
CCTV कैमरों की स्थिति को लेकर भी वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दिए जाने की बात कही गई है। ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि स्टेशन के पुनर्विकास के साथ सुरक्षा एजेंसियों की इन बुनियादी जरूरतों का समाधान कब तक होता है।
ब्यावरा रेलवे स्टेशन की नई इमारत और सुविधाएं यात्रियों को आधुनिक स्टेशन का अनुभव दे सकती हैं, लेकिन सुरक्षा तंत्र के लिए पर्याप्त जगह, कार्यशील CCTV और नियमानुसार हिरासत की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी उसी आधुनिकीकरण की महत्वपूर्ण कड़ी है।



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