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जबलपुर में वाणिज्यिक कर अधिकारी मनीष कुमार जैन के घर लोकायुक्त का छापा, ₹1.03 करोड़ आय के मुकाबले ₹3.78 करोड़ खर्च; भोपाल-सागर तक संपत्तियों की जांच

जबलपुर में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 की सुबह लोकायुक्त पुलिस ने वाणिज्यिक कर अधिकारी मनीष कुमार जैन के आवास पर आय से अधिक संपत्ति की शिकायत को लेकर छापेमारी की। प्रारंभिक जांच में लगभग 1.03 करोड़ रुपये की आय के मुकाबले 3.78 करोड़ रुपये का खर्च सामने आने का दावा किया गया है। अधिकारी और उनके परिजनों के नाम पर जबलपुर, भोपाल और सागर में जमीन, मकान, प्लॉट, वाहन तथा बीमा पॉलिसियों का विवरण जांच के दायरे में है। लोकायुक्त की तीन टीमें दस्तावेजों और निवेश के स्रोतों की जांच कर रही हैं। संपत्ति और आय का अंतिम आकलन होना बाकी है।

जबलपुर में वाणिज्यिक कर अधिकारी मनीष कुमार जैन के घर लोकायुक्त का छापा, ₹1.03 करोड़ आय के मुकाबले ₹3.78 करोड़ खर्च; भोपाल-सागर तक संपत्तियों की जांच
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जबलपुर में वाणिज्यिक कर अधिकारी मनीष कुमार जैन के घर लोकायुक्त का छापा, करोड़ों की संपत्तियों की जांच

1.03 करोड़ की प्रारंभिक आय के मुकाबले 3.78 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान, जबलपुर से भोपाल और सागर तक संपत्तियों का ब्योरा

सच की दुनिया, जबलपुर। मध्य प्रदेश में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायतों की जांच के सिलसिले में लोकायुक्त पुलिस ने वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारी मनीष कुमार जैन के जबलपुर स्थित आवास पर छापेमारी की है।

मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 6 बजे लोकायुक्त की टीम उनके घर पहुंची और संपत्ति तथा आर्थिक लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मनीष कुमार जैन वर्तमान में दमोह में वाणिज्यिक कर अधिकारी के रूप में पदस्थ बताए गए हैं।

लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में उनकी ज्ञात आय और खर्च के बीच बड़ा अंतर सामने आने का दावा किया गया है। जांच के दायरे में जबलपुर, भोपाल और सागर जिले में स्थित विभिन्न अचल संपत्तियां, वाहन तथा बीमा पॉलिसियां शामिल हैं।

लोकायुक्त जांच के प्रमुख आंकड़े

अधिकारी: मनीष कुमार जैन
विभाग: वाणिज्यिक कर विभाग
पदस्थापना: दमोह
कार्रवाई: लोकायुक्त पुलिस, जबलपुर
प्रारंभिक आय: लगभग ₹1.03 करोड़
प्रारंभिक व्यय: लगभग ₹3.78 करोड़
आय से अधिक खर्च: लगभग ₹2.74 से ₹2.75 करोड़
बताया गया अनुपात: 264.64 प्रतिशत
संपत्ति जांच: जबलपुर, भोपाल और सागर

सुबह 6 बजे घर पहुंची लोकायुक्त टीम, शिकायत के बाद कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, वाणिज्यिक कर अधिकारी मनीष कुमार जैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अंजूलता पटले को प्राप्त हुई थी।

शिकायत मिलने के बाद संबंधित जानकारी और आर्थिक दस्तावेजों का प्रारंभिक सत्यापन कराया गया।

इस जांच में अधिकारी की ज्ञात आय और उनके नाम से जुड़े खर्च तथा निवेश के बीच अंतर सामने आने की जानकारी दी गई है।

इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर मंगलवार सुबह जबलपुर स्थित आवास पर तलाशी की कार्रवाई शुरू की गई।

कार्रवाई के दौरान संपत्ति संबंधी अभिलेखों और आर्थिक लेन-देन की जानकारी की जांच की जा रही है।

कमाई करीब 1 करोड़, खर्च लगभग 3.78 करोड़ कैसे?

लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच का प्रमुख पहलू अधिकारी की आय और खर्च का आकलन है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच में मनीष कुमार जैन की ज्ञात आय लगभग 1 करोड़ 3 लाख रुपये आंकी गई है।

वहीं, संपत्ति खरीद, निवेश और अन्य मदों में उनका कुल व्यय लगभग 3 करोड़ 78 लाख रुपये बताया गया है।

इस प्रकार प्रारंभिक गणना में आय की तुलना में करीब पौने तीन करोड़ रुपये अधिक खर्च का अंतर सामने आया है।

लोकायुक्त की ओर से इस अनुपात को 264.64 प्रतिशत बताया गया है। हालांकि, अंतिम प्रतिशत और राशि का निर्धारण मूल वित्तीय दस्तावेजों की विस्तृत जांच से होगा।

करोड़ों के आय-व्यय अंतर की जांच

ज्ञात आय: ₹1.03 करोड़
अनुमानित खर्च: ₹3.78 करोड़
अंतर: लगभग ₹2.75 करोड़

ये प्रारंभिक और पूर्णांकित आंकड़े हैं। इस अंतर को अपने आप में सिद्ध अवैध संपत्ति नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति आय के वैध स्रोतों और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद स्पष्ट होगी।

जबलपुर में जमीन और पत्नी के नाम पर दो प्लॉट की जानकारी

प्रारंभिक जांच में अधिकारी और उनके परिवार के नाम पर जबलपुर में अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आई है।

मनीष कुमार जैन के नाम पर 278.74 वर्ग मीटर जमीन होने का विवरण मिला है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 1 करोड़ 43 लाख रुपये बताई गई है।

इसके अतिरिक्त उनकी पत्नी निधि जैन के नाम जबलपुर में दो प्लॉट होने की जानकारी दी गई है।

इन दोनों प्लॉटों की अनुमानित कीमत लगभग 19.12 लाख रुपये बताई गई है।

जांच एजेंसी संपत्तियों की खरीद की तारीख, भुगतान और धन के स्रोत की जांच कर रही है।

भोपाल में बंगला, फ्लैट और प्लॉट भी जांच के दायरे में

लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में भोपाल स्थित कुछ अचल संपत्तियों का ब्योरा भी सामने आया है।

जानकारी के मुताबिक, मनीष कुमार जैन की पत्नी निधि जैन के नाम भोपाल में 180 वर्ग मीटर भूमि पर बना बंगला बताया गया है।

इस संपत्ति की अनुमानित कीमत लगभग 22.87 लाख रुपये आंकी गई है।

इसके अलावा लगभग 83.18 वर्ग मीटर का फ्लैट भी जांच के दायरे में है, जिसकी अनुमानित कीमत 13.34 लाख रुपये बताई गई है।

पत्नी के नाम पर 402.41 वर्ग मीटर का एक अन्य प्लॉट होने की जानकारी भी सामने आई है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 13.68 लाख रुपये बताई गई है।

सागर के बंडा में माता-पिता के नाम भी संपत्तियों का ब्योरा

जांच का दायरा अधिकारी की व्यक्तिगत संपत्तियों के अलावा परिजनों के नाम दर्ज अचल संपत्तियों तक भी पहुंचा है।

मनीष कुमार जैन की मां शशि जैन के नाम सागर जिले के बंडा में एक प्लॉट और उस पर बने मकान का विवरण सामने आया है।

इस संपत्ति की अनुमानित कीमत करीब 23.49 लाख रुपये बताई गई है।

उनके पिता कोमल चंद जैन के नाम बंडा में एक मकान होने की जानकारी है, जिसकी अनुमानित कीमत 43.19 लाख रुपये बताई गई है।

इसके अतिरिक्त उनके नाम एक अन्य प्लॉट पर बना मकान भी दर्ज होने की जानकारी दी गई है, जिसका अनुमानित मूल्य 2.86 लाख रुपये है।

हालांकि, परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्ति होना अपने आप में अपराध नहीं है। जांच एजेंसी को यह पता लगाना होगा कि इन संपत्तियों की खरीद किन वैध आय स्रोतों और भुगतान के माध्यमों से हुई।

प्रारंभिक जांच में सामने आया संपत्तियों का विवरण
संपत्ति अनुमानित मूल्य
जबलपुर में मनीष जैन की जमीन ₹143 लाख
जबलपुर में पत्नी के दो प्लॉट ₹19.12 लाख
भोपाल में बंगला ₹22.87 लाख
भोपाल में फ्लैट ₹13.34 लाख
पत्नी के नाम अन्य प्लॉट ₹13.68 लाख
बंडा में मां के नाम संपत्ति ₹23.49 लाख
बंडा में पिता के नाम मकान ₹43.19 लाख
पिता के नाम अन्य मकान ₹2.86 लाख

कार, दोपहिया वाहन और बीमा पॉलिसियों की भी जांच

जांच के दौरान अधिकारी की पत्नी निधि जैन के नाम पर मारुति स्विफ्ट कार और सुजुकी एक्सेस दोपहिया वाहन होने की जानकारी सामने आई है।

दोनों वाहनों का कुल अनुमानित मूल्य लगभग 5.10 लाख रुपये बताया गया है।

इसके अलावा अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर कई बीमा पॉलिसियों का विवरण भी मिला है।

इन पॉलिसियों के प्रीमियम और निवेश पर लगभग 33.94 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।

लोकायुक्त की टीम बीमा पॉलिसियों के भुगतान, बैंक खातों और संबंधित वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही है।

वाहन और बीमा निवेश

मारुति स्विफ्ट और सुजुकी एक्सेस: ₹5.10 लाख अनुमानित मूल्य
बीमा पॉलिसियों पर खर्च: ₹33.94 लाख अनुमानित

जांच में यह भी देखा जाएगा कि निवेश और भुगतान किन स्रोतों से किए गए और क्या उनका विवरण घोषित आय से मेल खाता है।

तीन टीमों ने संभाली कार्रवाई, अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारी

लोकायुक्त पुलिस ने तलाशी और दस्तावेजी जांच के लिए तीन टीमों का गठन किया है।

प्राप्त विवरण के अनुसार, पहली टीम में डीएसपी नीतू त्रिपाठी और निरीक्षक बृजमोहन सिंह नरवरिया सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं।

दूसरी टीम का नेतृत्व डीएसपी रेखा प्रजापति कर रही हैं। इस टीम में निरीक्षक शशि मस्कुले और जितेंद्र यादव शामिल बताए गए हैं।

तीसरी टीम में निरीक्षक रजनी तिवारी सहित अन्य पुलिसकर्मी कार्रवाई कर रहे हैं।

टीमें संपत्तियों, निवेश और वित्तीय अभिलेखों से संबंधित जानकारी की जांच में जुटी हैं।

संपत्तियों की खरीद और धन के स्रोतों की होगी जांच

लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में सामने आए आय-व्यय के अंतर के बाद अब विस्तृत वित्तीय परीक्षण महत्वपूर्ण होगा।

जांच में संपत्तियों की खरीद की तारीख, रजिस्ट्री में दर्ज कीमत, वास्तविक भुगतान, बैंकिंग लेन-देन, ऋण, निवेश और अन्य ज्ञात आय स्रोतों का मिलान किया जा सकता है।

परिजनों के नाम दर्ज संपत्तियों के संबंध में भी उनके स्वामित्व और वैध आय स्रोतों की अलग से जांच आवश्यक होगी।

फिलहाल मनीष कुमार जैन या उनके परिवार की ओर से मामले पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसी के साक्ष्यों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर निर्धारित होगा।

प्रारंभिक आंकड़ों के बाद अब विस्तृत जांच पर नजर

जबलपुर में वाणिज्यिक कर अधिकारी मनीष कुमार जैन के घर लोकायुक्त की कार्रवाई के दौरान आय-व्यय के बीच करोड़ों रुपये के अंतर की जानकारी सामने आई है।

जबलपुर, भोपाल और सागर में अधिकारी तथा उनके परिजनों के नाम दर्ज विभिन्न संपत्तियों के साथ वाहन और बीमा निवेश भी जांच के दायरे में हैं।

हालांकि, जांच में दर्ज संपत्ति और खर्च के आंकड़े अभी प्रारंभिक हैं। वैध आय, वित्तीय अभिलेखों और संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व की विस्तृत जांच के बाद ही आय से अधिक संपत्ति संबंधी आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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लेखक

Arti Lodhi

Editor In Chief

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