नई दिल्ली। सुबह नींद खुलने के बाद बिस्तर से उठते ही कमर सीधी करने में परेशानी होना, झुकते समय खिंचाव महसूस होना या कुछ देर तक चलने-फिरने में अकड़न रहना ऐसी समस्याएं हैं, जिनका सामना बड़ी संख्या में लोग करते हैं। अक्सर लोग इसे थकान या गलत तरीके से सोने का परिणाम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यदि कमर की अकड़न बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो इसके कारणों को समझना जरूरी है।
स्वास्थ्य संबंधी सामान्य जानकारी के अनुसार कमर में अकड़न के पीछे मांसपेशियों में तनाव, लंबे समय तक निष्क्रिय रहना, गलत पोस्चर और रीढ़ से संबंधित कुछ समस्याएं हो सकती हैं। हर व्यक्ति में इसका कारण अलग हो सकता है।
रातभर एक ही स्थिति में रहने, मांसपेशियों में खिंचाव या दिनभर पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं करने के कारण सुबह कमर में जकड़न महसूस हो सकती है। हालांकि लगातार बनी रहने वाली अकड़न के पीछे अन्य चिकित्सकीय कारण भी हो सकते हैं।
लंबे समय तक कुर्सी पर बैठना बन सकता है परेशानी की वजह
आजकल कार्यालयों में कंप्यूटर के सामने लगातार कई घंटे बैठकर काम करना आम बात हो गई है। इसी तरह घर में लंबे समय तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना या बिना उठे एक ही स्थिति में बैठे रहना भी कमर की परेशानी बढ़ा सकता है।
लंबे समय तक एक स्थिति में रहने से कमर और कूल्हों के आसपास की मांसपेशियों में जकड़न महसूस हो सकती है। ऐसे में अचानक उठने या झुकने पर खिंचाव और दर्द होने की संभावना रहती है।
गलत पोस्चर से बढ़ सकता है कमर पर दबाव
कुर्सी पर आगे की ओर झुककर बैठना, पीठ को पर्याप्त सहारा नहीं देना या मोबाइल देखने के लिए लगातार गर्दन और शरीर को झुकाए रखना मांसपेशियों पर अतिरिक्त तनाव डाल सकता है।
इसी तरह अचानक भारी सामान उठाना, शरीर को मोड़कर वजन उठाना या जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत करना भी मांसपेशियों में खिंचाव का कारण बन सकता है।
यदि सोते समय कमर को आरामदायक सहारा नहीं मिलता या शरीर लंबे समय तक असुविधाजनक स्थिति में रहता है, तो सुबह उठने पर अकड़न महसूस हो सकती है। ऐसी स्थिति में सोने की मुद्रा और बिस्तर की आरामदायकता पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।
शारीरिक गतिविधियों की कमी से घट सकता है लचीलापन
नियमित रूप से चलना-फिरना और व्यायाम करना शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद करता है। इसके विपरीत दिनभर बैठे रहने और पर्याप्त गतिविधि नहीं करने से मांसपेशियों की ताकत तथा लचीलापन प्रभावित हो सकता है।
विशेष रूप से कमर, पेट और कूल्हों की मांसपेशियों का मजबूत होना शरीर को बेहतर सहारा देने में मदद करता है। इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार नियमित टहलना और हल्की कसरत करना उपयोगी माना जाता है।
कमर अकड़ने पर राहत पाने के आसान उपाय
हल्की गर्म सिकाई: मांसपेशियों में जकड़न होने पर हल्की गर्माहट से कुछ राहत मिल सकती है। सिकाई करते समय त्वचा को अत्यधिक गर्मी से बचाना चाहिए।
हल्का चलना-फिरना: लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने के बजाय अपनी सहनशक्ति के अनुसार सामान्य गतिविधियां बनाए रखना कई मामलों में बेहतर होता है।
सावधानी से स्ट्रेचिंग: हल्के खिंचाव वाले व्यायाम मदद कर सकते हैं, लेकिन दर्द बढ़ने पर उन्हें तुरंत रोक देना चाहिए।
बैठने की स्थिति सुधारें: काम करते समय कमर को सहारा दें और बीच-बीच में उठकर कुछ कदम चलें।
1. लंबे समय तक लगातार एक ही स्थिति में न बैठें।
2. काम के बीच नियमित अंतराल पर उठकर चलें।
3. बैठते समय पीठ को आरामदायक सहारा दें।
4. अपनी क्षमता के अनुसार नियमित टहलें और व्यायाम करें।
5. भारी सामान उठाते समय सावधानी बरतें।
6. ऐसी गतिविधियों से बचें जिनसे दर्द बढ़ता हो।
हर बार कमर की अकड़न सामान्य नहीं, इन संकेतों को पहचानें
कभी-कभार होने वाली हल्की अकड़न सामान्य मांसपेशीय तनाव से संबंधित हो सकती है। लेकिन यदि कमर का दर्द बहुत तेज है, बार-बार लौट रहा है, कई सप्ताह तक बना हुआ है या रोजमर्रा के काम प्रभावित कर रहा है, तो चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
यदि कमर दर्द के साथ पैरों में बढ़ती कमजोरी, सुन्नपन, पेशाब या मल पर नियंत्रण में नई परेशानी अथवा जांघों के बीच के हिस्से में संवेदना कम होने जैसे लक्षण हों, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। बुखार, गंभीर चोट या अन्य चिंताजनक लक्षणों के साथ दर्द होने पर भी जल्द चिकित्सकीय मूल्यांकन कराना चाहिए।
समय रहते कारण पहचानना जरूरी
कमर की अकड़न का कारण केवल गलत पोस्चर या थकान ही नहीं होता। कुछ मामलों में रीढ़, नसों या सूजन संबंधी समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं। यदि सुबह की अकड़न लंबे समय तक रहती है, गतिविधि करने से स्पष्ट रूप से कम होती है या बार-बार लौटती है, तो चिकित्सक को इसकी जानकारी देना चाहिए।
सही कारण जानने के बाद ही उपयुक्त उपचार, फिजियोथेरेपी या अन्य जांच की आवश्यकता तय की जा सकती है।
सुबह कमर में जकड़न महसूस होने के पीछे लंबे समय तक बैठना, मांसपेशियों में तनाव, सोने की स्थिति और गतिविधियों की कमी जैसे कारण हो सकते हैं। नियमित हल्की गतिविधि और सही पोस्चर से राहत मिल सकती है, लेकिन लगातार दर्द या चेतावनी वाले लक्षण होने पर डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।



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