आयुष मंत्रालय की सलाह: उम्र, बीमारी और शारीरिक क्षमता के अनुसार करें योग, जानिए किन परिस्थितियों में जरूरी है सावधानी
सच की दुनिया, नई दिल्ली। योग भारतीय जीवनशैली और स्वास्थ्य परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नियमित योगाभ्यास से शरीर में लचीलापन, संतुलन और मानसिक शांति बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, योग का वास्तविक लाभ तभी मिलता है, जब इसका अभ्यास सही तरीके और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार किया जाए।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सामान्य योग प्रोटोकॉल में अभ्यास शुरू करने से पहले स्वास्थ्य, उम्र, शारीरिक स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हर व्यक्ति के लिए सभी योगासन और प्राणायाम उपयुक्त नहीं होते। उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, जोड़ों की समस्या या अन्य गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों में कुछ अभ्यासों को बदलने या उनसे बचने की आवश्यकता हो सकती है।
योग करते समय गलत मुद्रा, शरीर पर अत्यधिक दबाव या जबरन सांस रोकने जैसी गलतियां परेशानी बढ़ा सकती हैं। इसलिए सुरक्षित अभ्यास के नियम समझना जरूरी है।
स्वास्थ्य: मौजूदा बीमारियों की जानकारी दें।
उम्र: अपनी क्षमता के अनुसार आसन चुनें।
भोजन: खाली या हल्के पेट अभ्यास करें।
प्रशिक्षक: शुरुआत में योग्य शिक्षक की मदद लें।
प्राणायाम: जबरन तेज सांस या सांस रोकने से बचें।
गर्भावस्था: चिकित्सकीय सलाह से उपयुक्त अभ्यास चुनें।
दर्द होने पर: अभ्यास तुरंत रोक दें।
हर व्यक्ति के लिए एक जैसा योगाभ्यास क्यों नहीं है सही?
योग का अभ्यास व्यक्ति की शारीरिक संरचना, उम्र, स्वास्थ्य और क्षमता के अनुसार होना चाहिए। किसी स्वस्थ युवा व्यक्ति के लिए आसान दिखाई देने वाला आसन बुजुर्ग या किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के लिए कठिन हो सकता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग करने से पहले शरीर की सीमाओं और मौजूदा स्वास्थ्य समस्याओं का ध्यान रखना जरूरी है।
यदि किसी व्यक्ति को हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, रीढ़ की समस्या, जोड़ों में दर्द या संतुलन संबंधी परेशानी है, तो उसे प्रशिक्षक और जरूरत पड़ने पर चिकित्सक की सलाह से अभ्यास करना चाहिए।
योग में शरीर को जबरन मोड़ना या दर्द सहकर किसी मुद्रा में बने रहना उचित नहीं है।
हाई ब्लड प्रेशर में भस्त्रिका और तेज प्राणायाम से सावधान
भस्त्रिका प्राणायाम में सामान्य श्वास की तुलना में तेज और सक्रिय तरीके से सांस लेने तथा छोड़ने का अभ्यास किया जाता है।
अनियंत्रित उच्च रक्तचाप, कुछ हृदय संबंधी समस्याओं और अन्य चिकित्सकीय स्थितियों में तेज या बलपूर्वक सांस लेने वाले अभ्यास जोखिम पैदा कर सकते हैं।
ऐसी स्थितियों में चक्कर, असुविधा या रक्तचाप में अस्थायी बदलाव हो सकते हैं। इसलिए हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों को बिना विशेषज्ञ की सलाह के तेज प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
सभी प्राणायाम समान नहीं होते। धीरे और सहज तरीके से किए जाने वाले कुछ श्वास अभ्यास उपयुक्त हो सकते हैं, लेकिन उनका चुनाव भी व्यक्तिगत स्वास्थ्य के अनुसार होना चाहिए।
अनियंत्रित ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी बीमारी होने पर भस्त्रिका जैसे बलपूर्वक श्वास अभ्यास, लंबे समय तक सांस रोकने और अत्यधिक कठिन आसनों से पहले चिकित्सक तथा प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह लें।
बुजुर्गों को कठिन आसनों में क्यों रखनी चाहिए सावधानी?
बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों की शक्ति, जोड़ों का लचीलापन और शरीर का संतुलन बदल सकता है। ऐसे में बहुत अधिक आगे या पीछे झुकने वाले आसनों को सावधानी से करना चाहिए।
पादहस्तासन में आगे की ओर झुकना पड़ता है, जबकि चक्रासन में शरीर को काफी पीछे मोड़ा जाता है। कम लचीलापन, पीठ की बीमारी या संतुलन संबंधी परेशानी वाले लोगों के लिए ये अभ्यास कठिन हो सकते हैं।
बुजुर्गों को अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार सरल आसन चुनने चाहिए। जरूरत पड़ने पर कुर्सी या अन्य स्थिर सहारे की मदद ली जा सकती है।
अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लिमेंटरी एंड इंटीग्रेटिव हेल्थ के अनुसार भी अधिक उम्र के लोगों को योग के दौरान चोट से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
योग खाली पेट करें या भोजन के बाद?
आयुष मंत्रालय के सामान्य योग प्रोटोकॉल में खाली या हल्के पेट योगाभ्यास करने की सलाह दी गई है।
विशेष रूप से कठिन आसन और पेट पर दबाव डालने वाले अभ्यास भारी भोजन के तुरंत बाद करने से असुविधा हो सकती है।
सामान्य तौर पर मुख्य भोजन के लगभग तीन से चार घंटे बाद अभ्यास करना सुविधाजनक हो सकता है। हल्के नाश्ते और हल्के योगाभ्यास के लिए अंतर अलग हो सकता है।
यह कोई कठोर नियम नहीं है कि हर व्यक्ति को सभी प्रकार के योग के लिए बिल्कुल समान समय का अंतर रखना होगा।
सुबह योग करना सुविधाजनक माना जाता है, लेकिन नियमितता और सुरक्षित अभ्यास अधिक महत्वपूर्ण हैं। दिन के दूसरे समय भी उपयुक्त परिस्थितियों में योग किया जा सकता है।
शांत, साफ और हवादार स्थान चुनें। आरामदायक कपड़े पहनें, फिसलन रहित योग मैट का उपयोग करें और शरीर को अत्यधिक थकान की स्थिति में कठिन अभ्यास के लिए मजबूर न करें।
गर्भावस्था और मासिक धर्म के दौरान क्या करें?
गर्भावस्था के दौरान योग पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है। सही मार्गदर्शन और आवश्यक सावधानियों के साथ गर्भावस्था के अनुकूल योगाभ्यास कई महिलाओं के लिए उपयोगी हो सकता है।
हालांकि, गर्भवती महिलाओं को कठिन मरोड़ वाले आसनों, पेट पर अधिक दबाव डालने वाले अभ्यासों, अत्यधिक गर्म वातावरण में योग और लंबे समय तक पीठ के बल लेटने वाली कुछ मुद्राओं से बचने या उन्हें संशोधित करने की आवश्यकता हो सकती है।
मासिक धर्म के दौरान भी सभी महिलाओं के लिए योग बंद करना अनिवार्य नहीं है। दर्द, थकान, अत्यधिक रक्तस्राव और व्यक्तिगत सुविधा को ध्यान में रखकर हल्के अभ्यास किए जा सकते हैं।
दोनों स्थितियों में आवश्यकतानुसार स्त्री रोग विशेषज्ञ और प्रशिक्षित योग शिक्षक से सलाह लेना बेहतर है।
हर्निया, कमर दर्द और जोड़ों की समस्या में हर आसन सुरक्षित नहीं
हर्निया, रीढ़ की बीमारी, घुटनों की समस्या या हाल में हुई सर्जरी के बाद कुछ योगासन असुविधा या चोट का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
विशेष रूप से ऐसे आसन जिनमें पेट, गर्दन, पीठ या जोड़ों पर अधिक दबाव पड़ता है, उन्हें बिना व्यक्तिगत मूल्यांकन के नहीं करना चाहिए।
किसी बीमारी के कारण सभी पीछे झुकने वाले या आगे झुकने वाले आसन हमेशा के लिए निषिद्ध हों, यह जरूरी नहीं है। निर्णय बीमारी की स्थिति, आसन की प्रकृति और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार होना चाहिए।
शुरुआत में सरल अभ्यास चुनना और कठिनाई धीरे-धीरे बढ़ाना अधिक सुरक्षित तरीका है।
योग करते समय इन गलतियों से बचें
बिना वार्मअप कठिन आसन: शरीर को तैयार किए बिना अचानक जटिल मुद्रा में जाने से खिंचाव हो सकता है।
दूसरों की नकल: किसी दूसरे व्यक्ति की लचीलापन क्षमता देखकर अपने शरीर पर दबाव न डालें।
सांस रोकना: बिना प्रशिक्षक के लंबे समय तक सांस रोकने वाले अभ्यास न करें।
दर्द में अभ्यास: तेज दर्द, चक्कर, सांस लेने में परेशानी या अस्वस्थता होने पर अभ्यास रोक दें।
बीमारी छिपाना: योग शिक्षक को अपनी स्वास्थ्य समस्याओं और चोट के बारे में बताएं।
अत्यधिक अभ्यास: कम समय में कठिन आसन सीखने या लंबे समय तक मुद्रा बनाए रखने की जल्दबाजी न करें।
सही मार्गदर्शन से योग को बनाएं सुरक्षित दिनचर्या
योग का उद्देश्य केवल कठिन आसन करना नहीं, बल्कि शरीर और मन में संतुलन विकसित करना भी है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग का अभ्यास आरामदायक मानसिक और शारीरिक स्थिति में किया जाना चाहिए। गंभीर बीमारी, अत्यधिक थकान या शारीरिक तकलीफ होने पर अभ्यास को टालना या बदलना बेहतर हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती लोगों को योग्य प्रशिक्षक से बुनियादी आसन सीखने चाहिए। योग को किसी बीमारी की निर्धारित दवाओं या चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
योग स्वस्थ जीवनशैली का उपयोगी हिस्सा हो सकता है, लेकिन हर आसन हर व्यक्ति के लिए सही नहीं है। उम्र, बीमारी, शारीरिक क्षमता और चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार अभ्यास चुनना जरूरी है।
खासतौर पर उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, गर्भावस्था, रीढ़ की समस्या और बढ़ती उम्र में विशेषज्ञ की सलाह तथा सही मार्गदर्शन सुरक्षित योगाभ्यास की महत्वपूर्ण शर्तें हैं।



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