विश्व आयोडीन अल्पता दिवस पर जागरूकता संदेश, जानिए आयोडीन की कमी के खतरे और नमक की सही मात्रा
नई दिल्ली। हमारे रोजमर्रा के खाने में नमक की अहम भूमिका होती है। दाल, सब्जी या सलाद, नमक के बिना भोजन का स्वाद अधूरा लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नमक का सही चुनाव आपकी सेहत पर भी असर डाल सकता है?
आयोडीनयुक्त नमक शरीर को एक जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है। यह थायरॉइड ग्रंथि के सामान्य कामकाज, शरीर के मेटाबॉलिज्म और बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
हर साल 21 अक्टूबर को विश्व आयोडीन अल्पता दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर लोगों को आयोडीन की आवश्यकता और इसकी कमी से होने वाली समस्याओं के प्रति जागरूक किया जाता है।
थायरॉइड: हार्मोन बनाने में सहायता
मेटाबॉलिज्म: शरीर की ऊर्जा संबंधी प्रक्रियाओं में भूमिका
बच्चों का विकास: मस्तिष्क और शारीरिक विकास के लिए आवश्यक
गर्भावस्था: गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास में महत्वपूर्ण
थायरॉइड ग्रंथि के लिए क्यों जरूरी है आयोडीन?
आयोडीन शरीर के लिए एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है। थायरॉइड ग्रंथि इसी की सहायता से महत्वपूर्ण हार्मोन तैयार करती है।
ये हार्मोन शरीर की मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया, ऊर्जा के उपयोग, वृद्धि और कई शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं।
यदि भोजन में लंबे समय तक पर्याप्त आयोडीन न मिले, तो थायरॉइड हार्मोन का निर्माण प्रभावित हो सकता है। इससे थायरॉइड संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
बच्चों के मस्तिष्क और शारीरिक विकास में अहम भूमिका
आयोडीन बच्चों के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के सामान्य विकास के लिए आवश्यक है। जीवन के शुरुआती वर्षों में इसकी पर्याप्त मात्रा विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है।
आयोडीन की गंभीर कमी बच्चों के मानसिक विकास, सीखने-समझने की क्षमता और शारीरिक वृद्धि को प्रभावित कर सकती है।
इसीलिए संतुलित आहार और पर्याप्त आयोडीन की उपलब्धता को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
गर्भावस्था में आयोडीन की जरूरत क्यों बढ़ जाती है?
गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में आयोडीन की आवश्यकता बढ़ जाती है। इस अवधि में गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र का विकास हो रहा होता है।
आयोडीन की गंभीर कमी शिशु के सामान्य विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसी कारण गर्भवती महिलाओं के पोषण में आयोडीन की पर्याप्त उपलब्धता आवश्यक है।
गर्भावस्था में अतिरिक्त आयोडीन सप्लीमेंट की आवश्यकता हो तो उसका निर्णय चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।
गर्भावस्था में केवल ज्यादा नमक खाना आयोडीन की जरूरत पूरी करने का सही तरीका नहीं है। संतुलित भोजन, आयोडीनयुक्त नमक का सीमित उपयोग और चिकित्सकीय सलाह महत्वपूर्ण हैं।
शरीर में आयोडीन की कमी से कौन-सी समस्याएं हो सकती हैं?
लंबे समय तक शरीर को पर्याप्त आयोडीन नहीं मिलने पर कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इसकी कमी से थायरॉइड ग्रंथि का आकार बढ़ सकता है। इस स्थिति को घेंघा रोग (Goitre) कहा जाता है।
आयोडीन की कमी कुछ व्यक्तियों में थायरॉइड हार्मोन की कमी का कारण भी बन सकती है। बच्चों और गर्भस्थ शिशुओं में गंभीर कमी के परिणाम अधिक चिंताजनक हो सकते हैं।
- थायरॉइड ग्रंथि का बढ़ना यानी घेंघा।
- थायरॉइड हार्मोन के निर्माण में कमी।
- बच्चों के मस्तिष्क विकास पर प्रभाव।
- गंभीर कमी में शारीरिक विकास प्रभावित होना।
- गर्भावस्था में शिशु के विकास पर प्रतिकूल असर।
आयोडीन की कमी से कैसे करें बचाव?
आयोडीन की कमी से बचाव का एक सरल और प्रभावी तरीका भोजन में पर्याप्त आयोडीनयुक्त नमक का उपयोग करना है।
नमक खरीदते समय पैकेट पर आयोडीनयुक्त होने की जानकारी देखनी चाहिए। नमक को नमी और गर्मी से बचाकर बंद डिब्बे में रखना बेहतर है।
हालांकि, आयोडीनयुक्त नमक के उपयोग का मतलब अधिक मात्रा में नमक खाना नहीं है। आयोडीन और सोडियम दोनों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
रोजाना कितना नमक खाना चाहिए?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वयस्कों के लिए पूरे दिन में कुल नमक का सेवन 5 ग्राम से कम होना चाहिए। यह लगभग एक छोटे चम्मच से कम के बराबर है।
इस सीमा में घर के खाने के साथ नमकीन, पैकेटबंद खाद्य पदार्थों और अन्य स्रोतों से मिलने वाला नमक भी शामिल है।
अधिक नमक खाने से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।
आयोडीन के अन्य प्राकृतिक स्रोत कौन-से हैं?
आयोडीनयुक्त नमक के अतिरिक्त कुछ खाद्य पदार्थ भी शरीर को आयोडीन प्रदान करते हैं। इनमें दूध, दही, अंडे, मछली और अन्य समुद्री खाद्य पदार्थ शामिल हैं।
कुछ पौधों से प्राप्त खाद्य पदार्थों में भी आयोडीन हो सकता है, लेकिन उनकी आयोडीन मात्रा मिट्टी और उत्पादन की परिस्थितियों के अनुसार बदलती है। इसलिए सभी दालों, सब्जियों या बीजों को आयोडीन का भरोसेमंद स्रोत नहीं माना जा सकता।
आयोडीन शरीर के सामान्य विकास और थायरॉइड ग्रंथि के स्वस्थ कामकाज के लिए बेहद जरूरी है। इसकी कमी से बचाव के लिए भोजन में आयोडीनयुक्त नमक का सही मात्रा में उपयोग करना चाहिए। साथ ही ज्यादा नमक खाने से बचना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित आहार और सही पोषण का चुनाव जरूरी है।



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