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ब्रह्म मुहूर्त में उठने से बदल सकती है दिनचर्या, जानिए सुबह जल्दी जागने को क्यों खास मानता है आयुर्वेद

आयुर्वेद में ब्रह्म मुहूर्त में जागने को स्वस्थ दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। आयुष मंत्रालय के अनुसार सूर्योदय से करीब दो घंटे पहले का शांत वातावरण योग, ध्यान और प्राणायाम के लिए अनुकूल हो सकता है। हालांकि जल्दी उठने के साथ पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है।

ब्रह्म मुहूर्त में उठने से बदल सकती है दिनचर्या, जानिए सुबह जल्दी जागने को क्यों खास मानता है आयुर्वेद

नई दिल्ली। देर रात तक मोबाइल, टीवी या दूसरे कामों में व्यस्त रहना और फिर सुबह देर से उठना आज की जीवनशैली का आम हिस्सा बनता जा रहा है। ऐसे में आयुर्वेद की सदियों पुरानी दिनचर्या एक बार फिर चर्चा में है। आयुर्वेद में कहा गया है— “ब्रह्ममुहूर्ते उत्तिष्ठेत्”, यानी ब्रह्म मुहूर्त में जागना।

 आखिर क्या है ब्रह्म मुहूर्त?

आयुष मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा जानकारी के मुताबिक, ब्रह्म मुहूर्त को आमतौर पर सूर्योदय से करीब दो घंटे पहले का समय माना जाता है। इस दौरान वातावरण शांत और अपेक्षाकृत ताजा रहता है।

रात की अच्छी और पर्याप्त नींद के बाद शरीर आराम कर चुका होता है और मन भी नए दिन की शुरुआत के लिए तैयार रहता है। सुबह का शांत वातावरण ध्यान, योग, प्राणायाम और आत्मचिंतन जैसी गतिविधियों के लिए अनुकूल माना जाता है।

 मन को शांत और एकाग्र रखने में मदद

आयुर्वेदिक दिनचर्या के अनुसार सुबह जल्दी जागने की नियमित आदत व्यक्ति को दिन की शुरुआत अधिक व्यवस्थित ढंग से करने का अवसर देती है। सुबह की भागदौड़ शुरू होने से पहले कुछ समय स्वयं के लिए निकालना मानसिक शांति और एकाग्रता के लिहाज से उपयोगी माना जाता है।

🌿 सुबह के समय क्या कर सकते हैं?

✓ हल्की सैर या व्यायाम

✓ योग और प्राणायाम

✓ ध्यान और आत्मचिंतन

✓ दिनभर के जरूरी कामों की योजना

✓ शांत वातावरण में कुछ समय स्वयं के लिए

 सुबह की ताजी हवा में टहलना भी अच्छा विकल्प

सुबह के शांत वातावरण में टहलना, हल्का व्यायाम करना, योग और प्राणायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। इससे शरीर सक्रिय महसूस कर सकता है और दिन की शुरुआत अधिक ऊर्जावान ढंग से करने में मदद मिल सकती है।

 सिर्फ जल्दी उठना पर्याप्त नहीं, पूरी नींद भी जरूरी

ब्रह्म मुहूर्त या सुबह जल्दी जागने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति अपनी नींद कम कर दे। रात में समय पर सोना और पर्याप्त नींद लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। नींद पूरी किए बिना रोज बहुत जल्दी उठने की कोशिश करने से थकान और दिन में सुस्ती महसूस हो सकती है।

 हर व्यक्ति के लिए एक जैसी दिनचर्या जरूरी नहीं

आयुर्वेद में व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और स्वास्थ्य को भी महत्व दिया जाता है। बीमारी, कमजोरी, लगातार नींद की समस्या या किसी अन्य स्वास्थ्य परेशानी से जूझ रहे लोगों को अपनी नींद और दिनचर्या में बड़ा बदलाव करने से पहले योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

 जल्दी उठना तभी फायदेमंद, जब नींद भी हो पूरी

सुबह जल्दी उठने की आदत को योग, प्राणायाम, व्यायाम और व्यवस्थित दिनचर्या के साथ जोड़ा जा सकता है। लेकिन स्वस्थ सुबह की शुरुआत के लिए रात की पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

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लेखक

Arti Lodhi

Editor In Chief

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