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प्रार्थना आत्मा की मांग है



विगत में आपको अपनी प्रार्थनाओं का उत्तर न मिलने से निराशा हुई होगी, परंतु विश्वास मत खोइए। प्रार्थनाएं सफल होती हैं या नहीं, यह जानने के लिए पहले आपके मन में प्रार्थना की शक्ति में विश्वास होना अत्यावश्यक है।

प्रार्थना आत्मा की मांग है। ईश्वर ने हमें भिखारी नहीं बनाया है। उन्होंने हमें अपने प्रतिबिंब के रूप में बनाया है । हिंदू शास्त्रों ने इसकी घोषणा की है। कोई भिखारी अगर किसी धनवान के द्वार पर जाकर भीख मांगता है, तो उसे केवल भीख ही मिलती है, परंतु उस घर के स्वामी का पुत्र अपने धनी पिता से जो भी मांगे, वह उसे पा सकता है, इसलिए हमें भिखारियों जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।

जब कृष्ण, बुद्ध, क्राइस्ट जैसे अवतारों ने यह कहा कि हम ईश्वर के प्रतिबिंब के रूप में बने हैं,तो वे झूठ नहीं बोल रहे थे। फिर भी हम देखते हैं कि कुछ लोगों के पास सब कुछ है, वे जन्म से ही धनी प्रतीत होते हैं, जबकि अन्य लोगों को केवल असफलताएं और समस्याएं ही मिलती हैं। तो उन लोगों में ईश्वर का प्रतिबिंब कहां है? ईश्वर की शक्ति हममें से प्रत्येक में है, प्रश्न यह है कि उसे कैसे विकसित किया जाए? मुझे ईश्वर के जो अनुभव मिले हैं, उनसे जो मैंने सीखा, उसका यदि आप पालन करेंगे तो आप जिस उत्तर की तलाश कर रहे हैं, वह आपको मिलेगा।

विगत काल में आपको अपनी प्रार्थनाओं का उत्तर न मिलने से निराशा हुई होगी, परंतु विश्वास मत खोइए। प्रार्थनाएं सफल होती हैं या नहीं यह जानने के लिए पहले आपके मन में प्रार्थना की शक्ति में विश्वास होना अत्यावश्यक है। आपकी प्रार्थनाएं इसलिए सफल नहीं हुई होंगी, क्योंकि आपने भिखारी का रवैया अपनाया। फिर आपको यह भी मालूम होना चाहिए कि आप अपने परमपिता से अधिकार के साथ क्या मांग सकते हैं।

आप अपने पूरे मन और शक्ति के साथ पृथ्वी का स्वामी बनने के लिए प्रार्थना करें, परंतु आपकी प्रार्थना स्वीकार नहीं होगी, क्योंकि भौतिक जीवन से संबंधित सभी प्रार्थनाएं सीमित हैं, उन्हें ऐसा होना ही पड़ेगा। मनमानी इच्छाओं की पूर्ति के लिए भगवान अपने नियमों को नहीं तोड़ेंगे, परंतु प्रार्थना करने का एक उचित ढंग है।

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