बड़ी खबर: आपदाकाल में हठ धर्मिता....दोनों तरफ....प्रदेशभर के जूनियर डॉक्टरों ने दिया सामूहिक इस्तीफा....



हाईकोर्ट की फटकार के बाद यह कदम उठाया जूनियर डॉक्टरों ने लगातार मध्य प्रदेश सरकार से मांग कर रहे थे मध्य प्रदेश सरकार की हठधर्मिता के कारण हुआ यह फैसला मध्य प्रदेश के नेताओं ने जनता की एक ना सोची. 

बुधवार को चिकित्सा शिक्षा विभाग मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और भारत सरकार से सभी स्थितियों पर बात करेगा और इन छात्रों के दाखिले निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू करेगा.

सरकार का कहना है कि एक माह पहले दाखिला लेने वाले हड़ताल कर रहे हैं. इसीलिए एमसीआई और भारत सरकार से बात करके इनके दाखिले निरस्त करके दोबारा काउंसलिंग कराई जाएगी, ताकि नए लोग आ सकें. जरूरत पड़ी तो चिकित्सा शिक्षा विभाग सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा.

तब तक राज्य सरकार ने सात नए मेडिकल कॉलेज में पदस्थ किए गए 250 सहायक प्रोफेसरों को आपात सेवाओं में लगा दिया है, ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं पर असर नहीं पड़े. हड़ताली डॉक्टरों से कहा गया है कि वे बिना शर्त हड़ताल खत्म करें.

वहीं, हड़ताल से मरीजों के इलाज के लिए भारी मुसीबत खड़ी हो गई है. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में हड़ताल की वजह से इनसे संबद्ध अस्पतालों में भर्ती 220 मरीजों के ऑपरेशन टाल दिए गए हैं.

भोपाल में 55, इंदौर में 40, ग्वालियर में 60, जबलपुर में 50 और रीवा में 50 ऑपरेशन टाले गए हैं.

इसके अलावा अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या 60 प्रतिशत तक घट गई है.

अपडेट जारी रहेगी 

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