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देश में 40 करोड़ 35 लाख जनधन खाते, साबित हुई गेम चेंजर योजना : मोदी


नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को योजना के छह वर्ष पूरा होने पर कहा कि छह साल पहले आज के दिन प्रधानमंत्री जनधन योजना का श्रीगणेश, जिन लोगों के बैंक में खाते नहीं हैं उन्हें यह सुविधा मुहैया कराने के लक्ष्य से किया गया था। सरकार की यह पहल कई गरीबी उन्मूलन की सेवाओं की नींव जमाने में ‘गेम चेंजर’ साबित हुई और करोड़ों लोग इससे लाभान्वित हुए।‘बदलाव लाने वाली’ पहल‘जन धन’ योजना की छठी वर्षगांठ के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि यह पहल ‘बदलाव लाने वाली’ रही है और यह गरीबी उन्मूलन के लिए उठाए गए कदमों की नींव साबित हुई है। भारतीय जनता पार्टी के 2014 में सत्ता में आने के बाद यह सरकार की पहली बड़ी योजना थी जिसके तहत करोड़ों लोगों के खासकर गरीबों के बैंक खाते खोले गए। प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘आज के दिन, छह साल पहले, प्रधानमंत्री जनधन योजना बिना खाते वालों को बैंकों से जोड़ने के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ शुरू की गई थी। यह पहल महत्त्वपूर्ण बदलाव लाने वाली रही, गरीबी उन्मूलन की कई पहलों की नींव साबित हुई और इसने करोड़ों लोगों को लाभ पहुंचाया।’ उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री जनधन योजना का शुक्रिया जिसकी वजह से कई परिवारों का भविष्य सुरक्षित हुआ। लाभार्थियों में से अधिकतर ग्रामीण इलाकों से हैं और महिलाएं हैं। मैं उन सभी की प्रशंसा करता हूं जिन्होंने प्रधानमंत्री जनधन योजना को सफल बनाने के लिए अथक मेहनत की।’देश में 40 करोड़ 35 लाख बैंक खातेमोदी द्वारा साझा किए गए ग्राफिक्स में दिखा कि अब तक 40 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गएं हैं जिनमें से 63 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी ग्रामीण इलाकों से हैं। इनमें से करीब 55 प्रतिशत महिलाएं हैं। सराकर ने कहा था कि योजना की वजह से वह कल्याणकारी योजनाओं के लाभ को सीधे जरूरतमंदों को भेजने में सक्षम हुई है।इस वर्ष इतने खुले खातेमोदी ने ग्राफिक्स के जरिये योजना के आंकड़े जारी किए। इनके अनुसार योजना के पहले वर्ष में 17.90 करोड़ खाते खोले गए और दूसरे साल आंकड़ा बढ़कर 25.10 करोड़ पर पहुंच गया। तीसरे वर्ष में तीस करोड़ को पारकर 30.09 और चौथे साल 32.54 करोड़ खाते योजना के तहत खुल चुके थे। पांचवे साल संख्या 36.79 और छह वर्ष पूरा होने पर 40 करोड़ को लांघकर 40.35 करोड़ हो गई। योजना के तहत कुल खुले खातों में 63.6 प्रतिशत ग्रामीण और 36.4 शहरी क्षेत्रों में खुले। कुल खातों में से 55.2 प्रतिशत देश की आधी आबादी अर्थात महिलाओं के खोले गए जबकि 44.2 प्रतिशत अन्य के थे।

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