आलेख: अब तो हर 'मच्छर' को प्यार से 'पालना पोसना' होगा

खबरदार जो किसी ने एक भी 'मच्छर' की जान लेने की कोशिश की, अब न घर में 'मच्छरदानी' लगाना है न शरीर में 'ओडोमॉस' थोपना है न 'नीम का धुंआ' करना है और न ही 'मच्छरमार अगरबत्ती' जलाना है न नगर निगम से नालियों में दवाई के छिड़काव की गुहार लगाना है और न ही 'आल आउट' और 'गुड नाइट' जैसी चीजों का सहारा लेना है, अब तो हर मच्छर को प्यार से पकड़ कर उसे 'पालना पोसना' होगा अगर हमें बीमारियों से बचना है तोl क्योकि अमेरिका की मशहूर पत्रिका लांसेट में जेसिका और उनके सहयोगी का एक शोध छपा है इसमें 'मच्‍छर के थूक' से बनी वैक्‍सीन के पहले क्लिनिकल ट्रायल के परिणाम के बारे में बताया गया है। इस ट्रायल में पता चलता है कि मच्‍छर के 'थूक और लार' से बनी वैक्‍सीन 'एनोफिलिस' सुरक्षित है इससे एंटीबॉडी बनता है और कोशिकाओं का रेस्‍पांस बढ़ता है। अमेरिका के संक्रामक रोग संस्‍थान में काम करने वाली शोधकर्ता जेसिका का मानना है कि मच्‍छरों के 'लार' में पाए जाने वाले प्रोटीन से एक वैश्विक वैक्‍सीन का निर्माण किया जा सकता है।अगर यह वैक्‍सीन बनाने में सफलता मिल जाती है तो इंसान के शरीर में प्रवेश करने वाले सभी रोगाणुओं से होने वाली बीमारियों से रक्षा हो सकेगी। इसमें डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, जीका, यलो फीवर, मायरो आदि अन्‍य बीमारियों से इंसान का बचाव हो जाएगा। ' यह वैक्‍सीन 'पवित्र प्‍याले' की तरह से होगी जिससे कई बीमारियों से बचाव होगा। अब आप ही बताओ कि हम सब लोग बरसों से मच्छर मार मार कर न जाने कितने 'टन' उनकी लार बरबाद कर चुके हैं यदि उन तमाम मच्छरों को न मारा होता तो उनकी लार और थूक से दसियों बीमारियों से संसार को मुक्ति मिल जातीl वैसे भी लार का अपना महत्त्व है कई जगह बताया गया है कि सुबह उठकर मुंह नहीं धोना चाहिए और जो कुछ भी पीना है पी लेना चाहिए, रात भर की 'लार' बहुत काम की होती है इसलिए अंग्रेज लोग ' बेड टी' पीते थे, पर हमारे यंहा उलटा ही पाठ पढ़ाया जाता है कि सुबह उठते ही सबसे पहले दातून करो जीभी करो और उसके बाद कुछ खाओ पीयोl हां तो बात चल रही थी मच्छरों की लार की, अगर ये बात सही है तो हमने अपना बहुत बड़ा नुक्सान कर लिया है करोड़ों मच्छरों को मार कर, आज वे तमाम मच्छर जिन्दा होते, जवान होते तो उनकी लार भी ज्यादा से ज्यादा मिल पाती पर हम लोगों की तो मच्छरों से पैदायशी दुश्मनी है जंहा देखा चट से मार दिया वो कितना उपयोगी है ये आज समझ में आ रहा हैl सोचो एक तरफ सरकार इंसान के थूकने पर जुरमाना वसूल कर रही है और वंही दूसरी तरफ वैज्ञानिक मच्छरों की लार को इकठ्ठा करने के उपाय सोच रहे हैl सरकार को सबसे पहले तो मलेरिया विभाग का नाम बदल कर नाम 'मच्छर लालन पालन' विभाग कर देना चाहिए जंहा मच्छरों को पाला जा सके उन्हें 'पौष्टिक खून' पीने का मौका मिले और वे जल्द से जल्द जवान होकर ज्यादा से ज्यादा थूक और लार निकाल सकेंl क्या दिन आ गए इंसान के जिस मच्छर से सारी दुनिया ' हलाकान' थी और उसको नष्ट करने तरह तरह के जतन किये जा रहे थे वो कीट कितना लाभदायी और उपयोगी है ये आज समझ में आया सारे संसार को अब 'घुटने टेक' उन तमाम मच्छरों से माफी मांगनी चाहिए जिन्हे इंसान ने असमय ही काल के गाल में भेज दिया आज से मच्छरदानी जला दो, ओडोमॉस फेंक दो, आल आउट और गुडनाइट की खरीदी बंद कर दो, और जंहा भी मच्छर दिखी उसे प्यार से अपने पास बैठाओ उसका हाल चाल पूछो और फिर दस बीस बूँद खून चूस लेने दो क्योकि मच्छर रहेंगे तो ही हम भी जिन्दा रहेंगे
चैतन्य भट्ट
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