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किसान टिड्डियों के संभावित प्रकोप से सावधान और सतर्क रहें


कलेक्टर ने जिले के किसानों से की अपील


कलेक्टर भरत यादव ने राजस्व, कृषि, ग्रामीण विकास, पशु चिकित्सा सहित अन्य विभागों के मैदानी अमले को टिड्डी दल के आक्रमण होने की स्थिति में तत्काल सूचना देने और सतत् निगरानी के निर्देश दिए हैं। साथ ही कलेक्टर श्री यादव ने फसलों में टिड्डियों के प्रकोप के दौरान किसानों से बचाव, सावधानी और सतर्कता बरतने की अपील की है।
कृषि विज्ञान केन्द्र जबलपुर की प्रमुख एवं वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ रश्मि शुक्ला ने किसानों को फसलों में टिड्डी दलों के हमले के दौरान रोकथाम हेतु सामयिक सलाह दी है। डॉ श्रीमती शुक्ला ने बताया कि टिड्डी दल समूह में रात्रिकालीन समय शाम 7 बजे से रात्रि 9 बजे के बीच फसलों को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाता है। साथ ही जमीन में लगभग 500 से 1500 अंडे प्रति मादा कीट देकर सुबह उड़कर दूसरी तरफ चला जाता है। टिड्डी दल के समूह में लाखों की संख्या होती है। ये जहां भी पेड़-पौधे या अन्य वनस्पति दिखाई देती है, उसको खाकर आगे बढ़ जाते हैं। टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव हेतु किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि अपने स्तर पर अपने गांव में समूह बनाकर खेतों में रात्रि के समय निगरानी रखें। डॉ रश्मि ने किसानों से आग्रह किया है कि यदि टिड्डी दल का प्रकोप होता है तो तत्काल इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन, कृषि विज्ञान केन्द्र सहित किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग को देवें। ताकि समय रहते ऐहतियाती उपाय किए जा सकें।
यदि किसी गांव में टिड्डी दल का आक्रमण होता है तो सभी किसान एवं ग्रामीण भाई टोली बनाकर विभिन्न तरह के उपाय जैसे ढोल बजाकर, डीजे बजाकर, थाली, टीन के डिब्बे से शोर मचाकर, ट्रेक्टर का साइलेंसर निकालकर चलाएं तथा अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से तेज आवाज कर टिड्डी दल को खेतों से भगाया जा सकता है।
इसी प्रकार यदि शाम के समय टिड्डी दल का प्रकोप होता है तो टिड्डी की विश्राम अवस्था में सुबह 3 बजे से 5 बजे के बीच में तुरंत कीटनाशी दवाएं ट्रेक्टर चलित स्प्रेयर पम्प (पावर स्प्रेयर) से क्लोरपायरीफास 20 ईसी 200 मिली या लेम्डासाइलोइन 5 ईसी 400 मिली या डाईफ्लूबेंजुसन 25 डब्ल्यूटी 240 ग्राम प्रति हेक्टेयर 500 ली पानी में मिलाकर छिड़काव करें। रासायनिक कीटनाशी पावडर फेनबिलरेड 0.4 प्रतिशत 20 से 25 किलो या क्यूनालफास 5 प्रतिशत 25 किलो प्रति हेक्टेयर भुरकाव करें।
टिड्डी दल के आक्रमण हो जाने के बाद यदि कीटनाशी दवा उपलब्ध न हो सके तो इस स्थिति में ट्रेक्टर चलित पावर स्प्रेयर के द्वारा पानी की तेज बौछार चलाकर भी टिड्डी दल को भगाया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र जबलपुर के वैज्ञानिक डॉ डीके सिंह मोबाइल नंबर 6261546761 एवं डॉ एके सिंह के मोबाइल नंबर 9424638238 एवं विकासखण्ड स्तर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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