जबलपुर: पिछली दीपावली की तरह इस बार भी कलेक्टर कार्यालय के मार्गदर्शन कक्ष में रंग-बिरंगे दीयों का स्टॉल सज गया है । किसी ब्राण्डेड कंपनी के प्रोडक्ट को मात देते ये दीपक उन बच्चों ने बनाये हैं जो मानसिक रूप से दिव्यांग हैं, लेकिन प्रतिभा और हुनर में किसी से कम नहीं हैं।
सामाजिक न्याय विभाग द्वारा संचालित गढ़ा स्थित मानसिक रूप से अविकसित बाल गृह के बच्चों द्वारा बनाये गये ये दीये बिक्री के लिए भी उपलब्ध हैं । इनकी कीमत 25 से 65 रूपये तक रखी गई है । कांच के इन दीयों में जेल का उपयोग किया गया है । ये इतने खूबसूरत बन पड़े हैं कि इन्हें देखकर ही लोग इनके प्रति आकर्षित हो जाते हैं । इसके साथ ही यहां मानसिक दिव्यांग बच्चों के बनाये गुलदस्ते भी बिक्री के लिए कलेक्ट्रेट के मार्गदर्शन कक्ष में रखे गये हैं ।
मानसिक दिव्यांग बच्चों द्वारा बनाये गये इन दीयों की बिक्री से मिली राशि को इन्हीं बच्चों को अन्य उपयोगी एवं कलात्मक सामग्रियाँ बनाने के प्रशिक्षण देने पर खर्च किया जाता है । बच्चों ने इसके पहले रक्षाबंधन पर राखियाँ बनाई थी जिन्हें आम नागरिकों के अवलोकनार्थ कलेक्टर कार्यालय के मार्गदर्शन कक्ष में रखा गया था । मानसिक रूप से अविकसित बाल गृह के बच्चों द्वारा पिछली दीपावली पर भी आकाशदीप और दीपक बनाये गये थे जिन्हें काफी पसंद किया गया था ।
सामाजिक न्याय विभाग द्वारा संचालित गढ़ा स्थित मानसिक रूप से अविकसित बाल गृह के बच्चों द्वारा बनाये गये ये दीये बिक्री के लिए भी उपलब्ध हैं । इनकी कीमत 25 से 65 रूपये तक रखी गई है । कांच के इन दीयों में जेल का उपयोग किया गया है । ये इतने खूबसूरत बन पड़े हैं कि इन्हें देखकर ही लोग इनके प्रति आकर्षित हो जाते हैं । इसके साथ ही यहां मानसिक दिव्यांग बच्चों के बनाये गुलदस्ते भी बिक्री के लिए कलेक्ट्रेट के मार्गदर्शन कक्ष में रखे गये हैं ।
मानसिक दिव्यांग बच्चों द्वारा बनाये गये इन दीयों की बिक्री से मिली राशि को इन्हीं बच्चों को अन्य उपयोगी एवं कलात्मक सामग्रियाँ बनाने के प्रशिक्षण देने पर खर्च किया जाता है । बच्चों ने इसके पहले रक्षाबंधन पर राखियाँ बनाई थी जिन्हें आम नागरिकों के अवलोकनार्थ कलेक्टर कार्यालय के मार्गदर्शन कक्ष में रखा गया था । मानसिक रूप से अविकसित बाल गृह के बच्चों द्वारा पिछली दीपावली पर भी आकाशदीप और दीपक बनाये गये थे जिन्हें काफी पसंद किया गया था ।