राज्यसभा में गूंजा दिल्ली विश्वविद्यालय की कट ऑफ लिस्ट का मुद्दा

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए ‘कट ऑफ लिस्ट’ 99 प्रतिशत और 98 प्रतिशत तक रहने पर चिंता व्यक्त की है।
भारतीय जनता पार्टी के आरके सिन्हा द्वारा गुरूवार को राज्यसभा में शून्यकाल में यह मुद्दा उठाये जाने पर नायडू ने कहा कि यह हकीकत है और यह विश्वविद्यालय के उच्च स्तर को बताता है लेकिन यह एक समस्या भी है।
समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने जब इस बारे में कुछ कहना चाहा तो नायडू ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी लेकिन कहा कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं इसलिए यादव उनसे मिलकर इस बारे में विचार विमर्श कर सकते हैं।
इससे पहले सिन्हा ने कहा कि विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए इस बार कट ऑफ लिस्ट 99 और 98 प्रतिशत तक गयी है और इससे लगभग 99 प्रतिशत छात्रों और उनके अभिभावकों को निराशा हाथ लगी है।
उन्होंने कहा कि पहले देश में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, कोलकाता विश्वविद्यालय और इलाहाबाद विश्वविद्यालय तथा अन्य विश्वविद्यालयों का अच्छा नाम था लेकिन अब हर कोई दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश लेना चाहता है और उसमें सीट इतनी है नहीं। सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में सांध्य कॉलेज शुरू किये जाने चाहिए जिससे सीटों की संख्या बढेगी और शिक्षकों को नौकरी मिलेगी।
सिन्हा ने कहा कि सांध्य कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को पार्ट टाइम काम करने का मौका भी मिलेगा और इससे गरीब छात्रों को विशेष फायदा होगा। साथ ही उनहोंने देश के अन्य विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता बढ़ाये जाने की भी मांग की।

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