अलविदा 'चांदनी', श्रीदेवी के अंतिम दर्शन के लिए उमड़े फैंस, सितारों का भी जमावड़ा - sach ki dunia

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Wednesday, February 28, 2018

अलविदा 'चांदनी', श्रीदेवी के अंतिम दर्शन के लिए उमड़े फैंस, सितारों का भी जमावड़ा

बॉलीवुड अदाकारा श्रीदेवी का पार्थिव शरीर मंगलवार देर रात मुंबई पहुंचा. बुधवार दोपहर करीब 3.30 बजे विले पार्ले के पवन हंस श्मशान गृह में अंतिम संस्कार किया जाएगा. मंगलवार देर रात से ही पार्थिव शरीर को श्रीदेवी के लोखंडवाला स्थि‍त घर ग्रीन एकर्स में रखा गया है. आज सुबह श्रीदेवी के पार्थ‍िव शरीर को सेलिब्रेशन क्लब ले जाया जाएगा. यहां सुबह 9.30 से 12.30 बजे तक लोग अंतिम दर्शन कर सकेंगे. ये क्लब उनके घर के पास स्थ‍ित है.
08.09 AM: सेलिब्रेशन क्लब के पास पुलिस की तैनाती, सुबह 9.30 बजे से यहां पर पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन किए जा सकेंगे.
बीते शनिवार को दुबई में मौत के बाद उनके पार्थिव शरीर का भारत में इंतजार किया जा रहा था. आखिरकार लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मंगलवार को श्रीदेवी का पार्थिव शरीर परिवार को सौंपा गया. जिसके बाद चार्टर्ड प्लेन से शव मुंबई लाया गया.

पार्थिव शरीर के घर पहुंचते ही देर रात बॉलीवुड सितारों के आने का भी सिलसिला शुरू हो गया. इस दौरान सलमान खान, राजकुमार संतोषी, सतीश कौशिक, पूनम ढिल्लों और राजपाल यादव समेत कई स्टार्स श्रीदेवी का अंतिम दर्शन करने उनके घर पहुंचे. अर्जुन कपूर देर रात श्रीदेवी के घर से निकले.
जिस चार्टर्ड प्लेन से श्रीदेवी का पार्थिव शरीर दुबई से मुंबई लाया गया, उसमें श्रीदेवी के पति बोनी कपूर, संजय कपूर और अर्जुन कपूर समेत 11 लोग मौजूद थे.
इस बाबत परिवार की ओर से एक कार्ड जारी किया गया है जिसमें इस पूरे कार्यक्रम की जानकारी दी गई है. कार्ड के सबसे ऊपर 'पद्मश्री श्रीदेवी कपूर' लिखा गया है. इसके बाद श्रद्धांजलि सभा और अंतिम दर्शन का जिक्र करते हुए कार्यक्रम का ब्यौरा दिया गया है.
दिव्यांग का प्रेम

श्रीदेवी के शव का इंतजार उनके परिवार समेत पूरा देश कर रहा था. लेकिन एक शख्स ऐसा भी है, जिन्हें बेसब्री से अपनी मददगार श्रीदेवी का इंतजार था. यूपी के रहने वाले जतिन वाल्मीकि नाम के शख्स की आंखों की रोशनी तो नहीं है, लेकिन वो श्रीदेवी के इंतजार में दो दिन से उनके घर के बाहर मौजूद है.
उन्होंने बताया, 'श्रीदेवी जी ने मेरे भाई के ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन में मदद की थी. उस समय उन्होंने 1 लाख की मदद की और अस्पताल से 1 लाख माफ कराए. उनकी वजह से मेरा भाई आज जिंदा है. मैं कुछ नहीं कर सकता उनके लिए, लेकिन मैं कम से कम उनकी अंतिम यात्रा में तो शामिल हो ही सकता हूं.'

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