नई दिल्ली.सात साल बाद केंद्र जम्मू-कश्मीर में सभी पक्षों से बातचीत शुरू करने जा रहा है। केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को इसका एलान किया। उन्होंने कहा- "मोदी सरकार कश्मीर में बातचीत के जरिए समस्या का हल ढूंढेगी। सरकार ने पूर्व IB डायरेक्टर दिनेश्वर शर्मा को रिप्रेजेंटेटिव बनाया है।" इससे पहले 2010 में यूपीए ने तीन वार्ताकार को अप्वाइंट किया था। बता दें कि 15 अगस्त को नरेंद्र मोदी ने लाल किले से दी स्पीच में इसका संकेत दिया था। उन्होंने कहा था- "कश्मीर समस्या का समाधान न गाली से और न गोली से होगा। कश्मीर समस्या का समाधान लोगों को गले लगाकर होगा।"
कश्मीर में क्या बातचीत का यह सबसे बेहतर माहौल है?
- घाटी में: ये सबसे बेहतर माहौल माना जा रहा है क्योंकि इस साल सिक्युरिटी फोर्सेस ने बड़े पैमाने पर घाटी से आतंकियों का सफाया किया है। अक्टूबर तक 150 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया गया।
- बॉर्डर पर: आर्मी बॉर्डर से घुसपैठ की कोशिश करने वाले आतंकियों का सफाया कर रही है। राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा था कि भारतीय सैनिक भारत-पाक बॉर्डर पर हर दिन करीब 5-6 आतंकियों को मार रहे हैं।
- अलगाववादियों पर शिंकजा:NIA ने पाक से पैसा लेने के आरोपों पर सात अलगाववादी नेताओं पर कार्रवाई की है। NIA की कार्रवाई के बाद घाटी में पथराव की घटनाओं में कमी आई है।
- सियासी कोशिशें: बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर में पहली बार पीडीपी को सपोर्ट कर सरकार बनाई थी। मोदी और राजनाथ कई बार कश्मीर का दौरा कर चुके हैं। खासकर 2016 में आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में हिंसा भड़कने के बाद से राजनाथ ने कम से कम पांच बार कश्मीर का दौरा किया। उनका पिछला दौरा सितंबर में हुआ था। राजनाथ ने कई मौकों पर कहा कि मोदी सरकार कश्मीर मसले का स्थायी समाधान ढूंढ रही है।
बड़ा सवाल: क्या अलगाववादियों से भी बात करेगी सरकार?
- इस सवाल पर राजनाथ ने कहा- इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व डायरेक्टर दिनेश्वर शर्मा को यह पूरी आजादी होगी। वे जिनसे बात करना चाहें, कर सकते हैं। उन पर कोई प्रतिबंध नहीं है। यह नहीं कहा जा सकता कि उन्हें कब तक रिपोर्ट देनी होगी। बातचीत में समय लग सकता है।
- बता दें कि इससे पहले मोदी सरकार ने अलगाववादियों से बातचीत में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। 2014 और 2015 में तो पाकिस्तान से बातचीत सिर्फ इसी वजह से रद्द कर दी गई थी क्योंकि पाक हुर्रियत नेताओं से मिलने पर अड़ा हुआ था।
क्या एनडीए सरकार की तरफ से पहले कभी ऐसी कोशिश हुई थी?
- अगर मोदी सरकार की तरफ से अप्वाइंट रिप्रेजेंटेटिव अलगाववादियों से बात करते हैं तो 2004 के बाद ऐसा पहली बार होगा। इससे पहले जनवरी 2004 में लालकृष्ण आडवाणी ने दिल्ली में अलगाववादियों से बातचीत की थी। तब आडवाणी एनडीए सरकार में डिप्टी पीएम थे।
NDA हो या UPA, केंद्र सरकार की तरफ से कितने साल बाद ऐसी पहल हुई है?
- सात साल पहले भी ऐसी कोशिश हुई थी। 2010 में घाटी में हिंसा भड़की थी। इसके बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यूपीए-2 सरकार ने जर्नलिस्ट दिलीप पड़गांवकर, पूर्व इन्फॉर्मेशन कमिश्नर एमएम अंसारी और एकेडेमिशियन राधा कुमार को कश्मीर के लिए वार्ताकार बनाया।
- तीनों ने 22 जिलों में 600 डेलिगेशंस से मुलाकात की। तीन बार में राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस की। 2011 में इस कमेटी ने यूपीए-2 सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
- रिपोर्ट में इस कमेटी ने कहा कि कश्मीर में आर्मी की विजिबिलिटी कम होनी चाहिए। ह्यूमन राइट्स वाॅयलेशंस के मुद्दे पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर्स एक्ट का रिव्यू करना चाहिए और डिस्टर्ब एरियाज एक्ट को हटा देना चाहिए।
क्या हर कोशिश का नतीजा निकला?
- 2010 से पहले कश्मीर में 2004 और 2007 में भी डायलॉग प्रोसेस हुई। हर बार ये दावे किए गए कि आतंकियों की कमर टूट चुकी है और बातचीत का यह सही माहौल है। लेकिन कुछ महीनों या एक साल बाद घाटी में फिर आतंकवाद बढ़ गया।
कौन हैं दिनेश्वर शर्मा?
- शर्मा 1978 बैच के आईपीएस हैं। वे इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) चीफ रह चुके हैं। फिलहाल, मणिपुर में अलगाववादी गुटों से बातचीत कर रहे हैं। इस बातचीत का एक दौर कल यानी मंगलवार को भी होना है।
उमर अबदुल्ला ने क्या कहा
- केंद्र की पहल पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अबदुल्ला ने कहा- यह उन लोगों की हार है जो ताकत या फोर्स के दम पर कश्मीर मुद्दे को हल करना चाहते हैं। वो भी अब मानने लगे हैं कि ये मुद्दा सियासी है। टेरर फंडिंग केस की एनआईए जांच पर भी उमर ने सवाल उठाए। उमर ने राजनाथ के कश्मीर में बातचीत के लिए रिप्रेजेंटेटिव अप्वाइंट करने के बाद कुछ ट्वीट किए।
- उमर ने सवाल उठाया कि जो मुद्दे उठाए जाएंगे, वो सही हैं। इसका फैसला कौन करेगा? उमर ने टेरर फंडिंग केस की जांच से मिले नतीजों की भी जानकारी मांगी है।
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