दही हांडी: उच्च न्यायालय उम्र और अधिकतम ऊंचाई के खिलाफ याचिका पर करे सुनवायी

नयी दिल्लीः जन्माष्टमी का पर्व आने से पहले ही उच्चतम न्यायालय ने प्रसिद्ध ‘दही हांडी’ महोत्सव के आयोजन में नाबालिगों की भागीदारी प्रतिबंधित करने और मानव पिरामिड की अधिकतम ऊंचाई निर्धारित करने संबंधी महाराष्ट्र सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका आज बंबई उच्च न्यायालय के पास वापस भेज दी।
न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आर भानुमित की पीठ ने यह मामला उच्च न्यायालय के पास वापस भेजते हुये कहा कि राज्य सरकार, कई गैर सरकारी संगठनों और लोगों द्वारा व्यक्तिगत रूप से पेश सामग्री के मद्देनजर इस पर नये सिरे से विचार किया जाये।
पीठ ने कहा कि बंबई उच्च न्यायालय इस मामले की सात अगस्त को सुनवाई करेगा। राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि उसने सुरक्षा के अनेक उपाय किये है और इसलिए उम्र की सीमा में ढील दी जानी चाहिए।
जन्माष्टमी के अवसर पर दही हांडी का आयोजन होता है। इस साल जन्माष्टमी के अवसर 14 अगस्त को पूरे महाराष्ट्र और आसपास के इलाकों में इसका आयोजन होगा।
शीर्ष अदालत ने 17 अगस्त, 2016 को इसके आयोजन पर लगायी गयी उच्च न्यायालय की शर्तो में ढील देने से इंकार कर दिया था। उच्च न्यायालय ने दही हांडी महोत्सव में 18 साल से कम आयु के लोगों के शामिल होने पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही मानव पिरामिड की ऊंचाई 20 फुट तक सीमित कर दी थी।
इसके कुछ दिन बाद ही मुंबई स्थित एक संगठन ने इस आदेश में सुधार का अनुरोध करते हुये कहा था कि मानव पिरामिड की ऊंचाई सीमित करने से इस महोत्सव का ‘रोमांच’ खत्म हो जायेगा जो एक लोकप्रिय और प्रतिस्पर्धात्मक खेल बन चुका है। याचिका में कहा गया था कि गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में सबसे ऊंचे मानव पिरामिड के रूप में 43.79 फुट की ऊंचाई दर्ज है और इसलिए इसे सीमित करना ‘अनुचित’ होगा।
न्यायालय ने अपने आदेश में सुधार से इंकार करते हुये कहा था कि इस तक के आयोजन में कई बार प्रतिभागियों को विशेषकर रीढ की हड्डी में गंभीर चोटें लग जाती है।

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