सरकार तो नीतीश ने बना ली लेकिन 19 अगस्त को JDU को टूटने से बचा पाएंगे ? - sach ki dunia

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Wednesday, August 2, 2017

सरकार तो नीतीश ने बना ली लेकिन 19 अगस्त को JDU को टूटने से बचा पाएंगे ?

पटना. नीतीश कुमार ने भले ही महागठबंधन सरकार के मुखिया के तौर पर इस्तीफा देने के बाद बीजेपी का हाथ पकड़कर बिहार में एनडीए की नई सरकार बना ली हो लेकिन अब संकट उनके घर में है. 19 अगस्त को पटना में जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी है जिस दिन ये साफ होगा कि पार्टी टूटेगी या बचेगी.
 
जेडीयू के टूटने का खतरा इसलिए पैदा हो गया है क्योंकि पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष शरद यादव ने आरजेडी और कांग्रेस का साथ छोड़कर बीजेपी के साथ जाने के नीतीश सरकार के फैसले को बिहार के 11 करोड़ वोटरों से किए गए कमिटमेंट का टूटना बताया है. 
 
शरद यादव की नाराजगी की खबर के बाद अब ताजा घटनाक्रम ये है कि पार्टी के कम से कम 12 प्रदेश अध्यक्षों ने नीतीश कुमार को पत्र लिखकर बीजेपी के साथ जाने पर एतराज जताया है और उनके कामकाज के तौर-तरीके पर सवाल उठाया है.
प्रदेश अध्यक्षों ने नीतीश को लिखे पत्र में बीजेपी के साथ जाने और उसमें दिखाई गई हड़बड़ी पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब बीजेपी से संबंध तोड़ना था तो पार्टी का सम्मेलन बुलाकर इस पर चर्चा की गई थी जहां तत्कालीन अध्यक्ष शरद यादव और नीतीश को फैसला लेने के लिए अधिकृत कर दिया गया था.
 
प्रदेश अध्यक्षों ने कहा है कि इस बार ना तो कोई मीटिंग हुई और ना पार्टी फोरम पर इसको लेकर कोई चर्चा हुई. पार्टी के नेताओं को भी सब कुछ टीवी और मीडिया के माध्यम से पता चला कि पार्टी के अध्यक्ष ने महाठबंधन तोड़कर एनडीए में जाने का फैसला कर लिया है.
शरद यादव अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं लेकिन इशारों में या थोड़ा-बहुत जो बोल रहे हैं उससे साफ है कि वो नीतीश कुमार के वापस एनडीए में जाने से नाखुश हैं. शरद यादव 5 अगस्त से बिहार दौरे पर जा रहे हैं जहां वो कार्यकर्ताओं का मन टटोलेंगे. 
 
नीतीश के फैसले पर पार्टी की बैठक बुलाने की मांग को लेकर नीतीश और शरद को लिखे प्रदेश अध्यक्षों के पत्र में लगभग एक जैसी बात है जिससे ये पैटर्न समझ में आ रहा है कि पार्टी की प्रदेश यूनिटें नीतीश के खिलाफ खड़ी हो रही हैं. कुछ प्रदेश अध्यक्षों ने तो ये भी लिखा है कि उनकी चिट्ठी का जवाब मीडिया के माध्यम से नहीं, पत्र के जरिए दी जाए.
इस बीच शरद यादव ने 17 अगस्त को दिल्ली में ‘साझी विरासत’ नाम से एक सम्मेलन बुलाया है जिसमें कांग्रेस, आरजेडी, सीपीएम, एसपी, बीएसपी समेत छोटे-बड़े बीजेपी विरोधी दलों के कई नेताओं के शामिल होने के आसार हैं. इसके ठीक दो दिन बाद पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय 19 अगस्त को पटना में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुला रखी है.
 
अब जब नीतीश के फैसले पर जेडीयू के संस्थापक अध्यक्ष शरद यादव खुलकर नाराजगी जता चुके हैं और 12 प्रदेश अध्यक्ष पत्र लिखकर सवाल उठा चुके हैं तो तय है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में दोनों पक्ष जोरदार तरीके से टकराएंगे. इस तकरार का नतीजा पार्टी की टूट के रूप में सामने आएगा या नीतीश नाराज लोगों को मना लेंगे, ये समय बताएगा.

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