नागोया। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ने कुश्ती के मैट पर ऐसी वापसी की, जिसने लगभग हाथ से निकल चुके स्वर्ण पदक को भारत की झोली में डाल दिया। पुरुषों की फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम स्पर्धा के फाइनल में सुजीत ने ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुदिएव को बेहद रोमांचक मुकाबले में 10-9 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
एक समय मुकाबले में सुजीत 2-9 से पीछे चल रहे थे। सात अंकों का बड़ा अंतर और तेजी से खत्म होता समय देखकर मुकाबला कुदिएव के पक्ष में जाता दिखाई दे रहा था, लेकिन भारतीय पहलवान ने हार नहीं मानी। आखिरी हिस्से में उन्होंने एक के बाद एक सफल दांव लगाते हुए स्कोर पलटा और 10-9 से जीत दर्ज कर दी।
शुरुआत में पूरी तरह हावी रहे कुदिएव
फाइनल की शुरुआत भारतीय पहलवान के लिए मुश्किल रही। कुदिएव ने शुरुआती मिनटों में आक्रामक कुश्ती करते हुए तेजी से अंक जुटाए। उन्होंने सुजीत को मैट से बाहर धकेलने और टेकडाउन के जरिए बढ़त बनाई।
सुजीत ने जवाब देने की कोशिश की, लेकिन पहले पीरियड में ताजिक पहलवान का दबदबा बना रहा। कुदिएव लगातार हमले करते हुए अपनी बढ़त मजबूत करते गए और मुकाबले के एक चरण में स्कोर 9-2 तक पहुंच गया।
फिर शुरू हुई सुजीत की अविश्वसनीय वापसी
दूसरे पीरियड में सुजीत का अंदाज पूरी तरह बदल गया। उन्होंने पहले अंतर कम करते हुए स्कोर 4-9 किया और फिर एक और टेकडाउन से इसे 6-9 तक पहुंचा दिया।
अब मुकाबले का दबाव कुदिएव पर दिखाई देने लगा था। सुजीत ने हमला जारी रखा और एक और सफल दांव के साथ स्कोर 8-9 कर दिया। जिस मुकाबले में कुछ समय पहले तक सात अंकों का अंतर था, वहां अब भारतीय पहलवान केवल एक अंक पीछे था।
कुदिएव ने बनाई शुरुआती बढ़त — 4-0
सुजीत ने खोला खाता — 2 अंक
कुदिएव ने बढ़त पहुंचाई — 9-2
सुजीत की वापसी — 4-9
फिर स्कोर हुआ — 6-9
मुकाबला पहुंचा — 8-9
अंतिम पलटवार — 10-9, सुजीत बने चैंपियन
आखिरी पलों में लगाया गोल्ड दिलाने वाला दांव
मुकाबले के अंतिम क्षणों में सुजीत को जीत के लिए एक और सफल दांव की जरूरत थी। भारतीय पहलवान ने इसी दबाव में कुदिएव को टेकडाउन करते हुए दो अंक हासिल किए और पहली बार मुकाबले में निर्णायक बढ़त बना ली। स्कोर 10-9 होते ही गोल्ड भारत की ओर आ गया।
निर्णायक टेकडाउन के समय को लेकर अलग-अलग मैच रिपोर्टों में अंतर सामने आया है। कुछ रिपोर्टों में इसे आखिरी 11 सेकंड में बताया गया है, जबकि एक अन्य विस्तृत मैच रिपोर्ट में करीब 50 सेकंड शेष रहने का उल्लेख है। हालांकि अंतिम परिणाम को लेकर कोई संशय नहीं है—सुजीत ने मुकाबला 10-9 से जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
सेमीफाइनल में ओलंपिक चैंपियन को हराकर किया था बड़ा उलटफेर
फाइनल से पहले भी सुजीत ने भारतीय कुश्ती के लिए यादगार प्रदर्शन किया था। सेमीफाइनल में उनका सामना मेजबान जापान के मौजूदा ओलंपिक चैंपियन कोटारो कियोका से हुआ।
पहले पीरियड के बाद सुजीत 0-2 से पीछे थे। दूसरे पीरियड में भारतीय पहलवान ने तीन अंक हासिल किए, जबकि जापानी पहलवान ने एक और अंक जोड़ा। मुकाबला समाप्त होने पर स्कोर 3-3 था।
स्कोर बराबर रहने के बावजूद बड़ा स्कोरिंग मूव लगाने के आधार पर सुजीत को क्राइटेरिया पर विजेता घोषित किया गया और उन्होंने गोल्ड मेडल मुकाबले में जगह बना ली।
सुजीत ने एक ही दिन में पहले जापान के ओलंपिक चैंपियन कोटारो कियोका को सेमीफाइनल में हराया और फिर फाइनल में 2-9 से पिछड़ने के बावजूद कुदिएव को 10-9 से मात देकर स्वर्ण पदक जीत लिया।
पहले मुकाबले में अफगान पहलवान को 13-3 से हराया
सुजीत के लिए एशियन गेम्स का सफर भी आसान शुरुआत वाला नहीं था। अपने शुरुआती मुकाबले में उनका सामना अफगानिस्तान के सैयद उमर जजई से हुआ। अफगान पहलवान ने शुरुआत में ही अंक हासिल कर सुजीत को 3-0 से पीछे कर दिया था।
इसके बाद सुजीत ने तेजी से मुकाबला पलटा। पुश-आउट और शोल्डर थ्रो के जरिए उन्होंने पहले बढ़त हासिल की और फिर लगातार अंक जुटाते हुए मुकाबला 13-3 से तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर अपने नाम कर लिया।
क्वार्टर फाइनल में ईरानी पहलवान को एक भी अंक नहीं दिया
क्वार्टर फाइनल में सुजीत का मुकाबला ईरान के अब्बास इब्राहिमजादेहसवादकुही से हुआ। यहां भारतीय पहलवान ने शुरू से ही नियंत्रण बनाए रखा और अपने प्रतिद्वंद्वी को अंक बनाने का मौका नहीं दिया।
सुजीत ने पहले पीरियड में मजबूत बढ़त हासिल करने के बाद दूसरे पीरियड में एक और टेकडाउन के साथ स्कोर 10-0 कर दिया। तकनीकी श्रेष्ठता से मिली इस जीत ने उन्हें सेमीफाइनल में पहुंचाया, जहां ओलंपिक चैंपियन कियोका उनका इंतजार कर रहे थे।
इसी साल कुदिएव को पहले भी हरा चुके थे सुजीत
फाइनल के दोनों पहलवान एक-दूसरे के लिए नए नहीं थे। सुजीत और कुदिएव का सामना इसी साल एशियन चैंपियनशिप में भी हुआ था, जहां भारतीय पहलवान ने कुदिएव को 7-2 से हराया था।
एशियन गेम्स के फाइनल में हालांकि कुदिएव ने मुकाबले के अधिकांश हिस्से में बढ़त बनाए रखी, लेकिन अंतिम चरण में सुजीत की आक्रामक कुश्ती ने परिणाम पूरी तरह बदल दिया।
65 KG में भारत की स्वर्णिम परंपरा को आगे बढ़ाया
पुरुषों का 65 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग भारतीय कुश्ती के लिए पहले भी यादगार रहा है। योगेश्वर दत्त ने 2014 एशियन गेम्स में इस वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था, जबकि बजरंग पूनिया ने 2018 में गोल्ड मेडल हासिल किया था।
2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में भारतीय कुश्ती को कोई स्वर्ण पदक नहीं मिला था। अब सुजीत कलकल ने 2026 में 65 किग्रा वर्ग का खिताब जीतकर भारत के लिए कुश्ती में फिर स्वर्णिम सफलता दर्ज की है।
शुरुआती मुकाबला — सैयद उमर जजई को 13-3 से हराया
क्वार्टर फाइनल — अब्बास इब्राहिमजादेहसवादकुही को 10-0 से हराया
सेमीफाइनल — ओलंपिक चैंपियन कोटारो कियोका को 3-3 के बाद क्राइटेरिया पर हराया
फाइनल — अब्दुलमजीद कुदिएव को 10-9 से हराया
उपलब्धि — एशियन गेम्स 2026 पुरुष फ्रीस्टाइल 65 KG गोल्ड मेडल
23 साल के सुजीत के करियर की बड़ी उपलब्धि
हरियाणा के सुजीत कलकल मौजूदा दौर में भारत के प्रमुख फ्रीस्टाइल पहलवानों में शामिल हैं। वह अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियन रह चुके हैं और 2026 में एशियन चैंपियनशिप का खिताब भी जीत चुके हैं।
अब एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में जुड़ गया है। खास बात यह रही कि गोल्ड तक पहुंचने के रास्ते में उन्होंने पहले मेजबान देश के ओलंपिक चैंपियन को हराया और फिर फाइनल में सात अंकों की कमी से वापसी करते हुए एशियाई खेलों का खिताब अपने नाम किया।



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