बरगी बांध में बचा केवल 5 मीटर पानी, नर्मदा के घाटों पर दिखने लगीं चट्टानें, बढ़ा जलसंकट का खतरा
जबलपुर: मानसून की दस्तक से पहले ही मध्य प्रदेश के प्रमुख जलस्रोतों में शामिल बरगी बांध का जलस्तर चिंताजनक रूप से घट गया है। स्थिति यह है कि बांध में अब केवल 5 मीटर पानी शेष बचा है। इसका सीधा असर नर्मदा नदी के जलप्रवाह, पर्यटन और पेयजल आपूर्ति पर दिखाई देने लगा है।
बरगी बांध में केवल 5 मीटर पानी शेष
नर्मदा नदी को मध्य प्रदेश की जीवनरेखा माना जाता है। इसी नदी से लाखों लोगों को पेयजल और सिंचाई का पानी मिलता है। नर्मदा पर बने बरगी बांध की अधिकतम जलभराव क्षमता समुद्र तल से 422.75 मीटर तक है, जबकि वर्तमान में जलस्तर घटकर 407.85 मीटर रह गया है।
बरगी बांध परियोजना के अधिकारी आर.आर. रोहित के अनुसार, बरसात के समय जहां बांध लगभग पूरा भर जाता है, वहीं अभी इसमें केवल लगभग 5 मीटर पानी ही बचा है।
पेयजल और जलापूर्ति पर मंडराया संकट
बरगी बांध से छोड़ा जाने वाला पानी बिजली उत्पादन संयंत्र के माध्यम से नर्मदा नदी में पहुंचता है। लेकिन दो इकाइयों में से एक मेंटेनेंस के लिए बंद है, जबकि दूसरी इकाई भी सीमित समय तक ही संचालित की जा रही है। परिणामस्वरूप नर्मदा में पानी का प्रवाह काफी कम हो गया है।
इसका असर जबलपुर नगर निगम, पश्चिम मध्य रेलवे और अन्य संस्थाओं की जलापूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। कई जलशोधन संयंत्र अब नदी के मुख्य प्रवाह से दूर होते जा रहे हैं।
ग्वारीघाट और भेड़ाघाट में बदले हालात
ग्वारीघाट क्षेत्र में नर्मदा का जलस्तर इतना घट गया है कि कई स्थानों पर लोग पैदल नदी पार करते दिखाई दे रहे हैं। घाटों पर सामान्यतः पानी में डूबी रहने वाली चट्टानें अब बाहर नजर आने लगी हैं।
स्थानीय निवासी रामानुज तिवारी का कहना है कि वर्षों बाद ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। इस बार ग्वारीघाट में पानी असामान्य रूप से कम हो गया है।
वहीं विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भेड़ाघाट में भी धुआंधार जलप्रपात की धार पतली पड़ गई है। कम पानी की वजह से झरने का आकर्षण घटा है और पर्यटकों की संख्या में भी कमी देखने को मिल रही है।
पर्यटन कारोबार पर असर
भेड़ाघाट में फोटोग्राफी का कार्य करने वाले मुन्ना लाल यादव का कहना है कि धुआंधार में पानी कम होने से पर्यटक कम पहुंच रहे हैं, जिससे स्थानीय कारोबार प्रभावित हो रहा है।
पर्यटक वीर सिंह राजपूत ने भी बताया कि इस बार भेड़ाघाट में उन्हें अपेक्षाकृत काफी कम पानी दिखाई दिया।
सोमवती अमावस्या पर भी दिखीं चट्टानें
सोमवती अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नर्मदा में अतिरिक्त पानी छोड़ा गया था। इसके बावजूद घाटों पर बड़ी संख्या में चट्टानें दिखाई देती रहीं। सामान्यतः ये चट्टानें पानी में डूबी रहती हैं।
अमावस्या और गर्मी के कारण नर्मदा के विभिन्न घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान किया।
कम बारिश हुई तो गहरा सकता है संकट
मौसम वैज्ञानिक पहले ही अल नीनो प्रभाव के चलते सामान्य से कम बारिश की आशंका जता चुके हैं। प्रदेश के कई बड़े बांध निचले जलस्तर पर पहुंच चुके हैं।
यदि इस वर्ष पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, तो आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई दोनों पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। नर्मदा नदी से जबलपुर, नरसिंहपुर सहित कई शहरों और गांवों को पानी मिलता है। भविष्य में कटनी और सतना तक भी इसी जल पर निर्भरता बढ़ने वाली है। ऐसे में बांध नहीं भरा तो जलसंकट की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
