58 लाख खर्च... फिर भी एक भी क्लीनिक क्वालिटी टेस्ट में पास नहीं!
जबलपुर स्वास्थ्य विभाग में बड़ा खेल, NHM ने सीएमएचओ समेत 4 अधिकारियों को थमाया नोटिस
जबलपुर। मध्य प्रदेश का जबलपुर जिला स्वास्थ्य विभाग इन दिनों भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोपों के कारण सुर्खियों में है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संचालित संजीवनी क्लीनिकों के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन जमीन पर नतीजा शून्य निकला। अब इस पूरे मामले में राज्य स्तर से बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो चुकी है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा जारी पत्र क्रमांक एन.एच.एम./शहरी स्वास्थ्य/2026/ई-1241172/06/1023 के तहत जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी, सहायक शहरी कार्यक्रम प्रबंधक संदीप नामदेव, जिला क्वालिटी मॉनिटर शिखा गर्ग और जिला लेखा प्रबंधक रेखा साहू को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
58 क्लीनिकों के लिए आया था 58 लाख का बजट
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2025-26 में जबलपुर जिले की शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) के अनुरूप विकसित करने के लिए 58 संजीवनी क्लीनिकों हेतु 1 लाख रुपये प्रति संस्था के हिसाब से कुल 58 लाख रुपये आवंटित किए गए थे।
चौंकाने वाली बात यह है कि 56.98 लाख रुपये खर्च भी कर दिए गए, लेकिन एक भी शहरी स्वास्थ्य संस्था का NQAS प्रमाणीकरण नहीं कराया गया!
राज्य समीक्षा में खुली पोल
राज्य स्तर पर हुई समीक्षा में सामने आया कि करोड़ों की स्वास्थ्य योजनाओं का ढिंढोरा पीटने वाले अधिकारियों ने गुणवत्ता सुधार के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की। जिन क्लीनिकों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जाना था, वे आज भी प्रमाणीकरण से कोसों दूर हैं।
इस पूरे मामले को राज्य शासन ने गंभीर लापरवाही माना है। अपर मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने निर्देश दिए हैं कि 15 दिनों के भीतर प्रमाणीकरण प्रक्रिया की जानकारी प्रस्तुत की जाए, अन्यथा खर्च की गई राशि की वसूली की जाएगी।
अब एफआईआर और रिकवरी का खतरा
सूत्रों की मानें तो नोटिस में दी गई समय सीमा समाप्त होने के बाद भी संबंधित अधिकारी संतोषजनक जवाब पेश नहीं कर पाए हैं। ऐसे में अब विभागीय रिकवरी के साथ-साथ एफआईआर दर्ज होने की तलवार भी लटक रही है।
सवाल बड़ा है...
अगर 58 लाख खर्च होने के बाद भी एक भी क्लीनिक राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों तक नहीं पहुंच पाया,
तो आखिर पैसा गया कहां?
