जेठी हॉस्पिटल की बड़ी लापरवाही: नवजात बच्ची की जगह दूसरे परिवार को सौंप दिया लड़का
सीसीटीवी फुटेज से खुला राज, दूसरे अस्पताल में मिली नवजात बच्ची
जबलपुर: अधारताल क्षेत्र स्थित जेठी हॉस्पिटल में अस्पताल प्रबंधन की एक बेहद गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां डिस्चार्ज के समय एक नवजात बच्ची को उसके असली माता-पिता की जगह किसी दूसरे परिवार को सौंप दिया गया। घटना के सामने आने के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा मच गया और परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए।
क्या है पूरा मामला?
अधारताल निवासी शकीर सिद्दीकी की पत्नी ने 21 मई 2026 को एक बच्ची को जन्म दिया था। बच्ची की तबीयत गंभीर होने के कारण उसे इलाज के लिए जेठी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। शनिवार को जब परिवार बच्ची को डिस्चार्ज कराने अस्पताल पहुंचा, तो अस्पताल प्रबंधन ने इलाज का पूरा भुगतान लेने के बाद उन्हें उनकी बच्ची की जगह एक नवजात लड़का सौंप दिया।
परिजनों को जब संदेह हुआ तो उन्होंने अस्पताल कर्मचारियों से सवाल किए। विरोध बढ़ने पर अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और मामला हंगामे तक पहुंच गया।
📹 सीसीटीवी फुटेज से खुला पूरा मामला
परिजनों के बढ़ते दबाव के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की। फुटेज में एक महिला नवजात बच्ची को लेकर अस्पताल से बाहर जाती दिखाई दी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन और पीड़ित परिवार ने बच्ची की तलाश शुरू की।
काफी खोजबीन के बाद नवजात बच्ची जेके हॉस्पिटल में सुरक्षित मिली, जहां उसे गलती से किसी दूसरे परिवार को सौंप दिया गया था।
बच्ची के सुरक्षित मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली, लेकिन अस्पताल की इस लापरवाही को लेकर उनका आक्रोश लगातार बना हुआ है।
⚠ सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरी घटना ने निजी अस्पतालों में नवजात शिशुओं की सुरक्षा व्यवस्था और पहचान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमानुसार बिना डिस्चार्ज दस्तावेज और पुख्ता पहचान सत्यापन के किसी भी नवजात को किसी अन्य व्यक्ति को नहीं सौंपा जा सकता।
इसके बावजूद इतनी बड़ी अदला-बदली हो जाना अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही मानी जा रही है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की, तो अस्पताल प्रबंधन मामले को दबाने और टालने की कोशिश करता रहा। प्रबंधन का कहना था कि बच्ची मिल गई है, इसलिए अब कोई समस्या नहीं है।
“अगर बच्ची समय पर नहीं मिलती तो क्या होता? यह केवल गलती नहीं, बल्कि अस्पताल की बेहद खतरनाक लापरवाही है।”
स्वास्थ्य विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित परिवार ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
