बरगी डैम क्रूज़ हादसा: 13 मौतों से पहले ही दी गई थी चेतावनी, फिर भी चलता रहा खटारा जहाज

खटारा क्रूज़ बना 13 जिंदगियों का कातिल!

हादसे से 2 महीने पहले दी गई थी चेतावनी, फिर भी चलता रहा मौत का जहाज| जबलपुर



कभी-कभी हादसे अचानक नहीं होते… उन्हें पैदा किया जाता है। धीरे-धीरे… लापरवाही से… चेतावनियों को फाइलों में दबाकर… और जिम्मेदारों की खामोशी से।

मध्य प्रदेश के जबलपुर के बरगी डैम में हुआ दर्दनाक क्रूज़ हादसा अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं रह गया है। यह सिस्टम की उस संवेदनहीनता की कहानी बन चुका है, जिसमें मौत पहले से दस्तक दे रही थी… लेकिन सुनने वाला कोई नहीं था।

पत्र जिसने खोल दी सिस्टम की पोल

अब एक ऐसा पत्र सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक ढांचे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बरगी रिसोर्ट के वॉटर स्पोर्ट्स विंग के मैनेजर ने मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक को करीब दो महीने पहले लिखित चेतावनी दी थी।

पत्र में साफ लिखा गया था कि क्रूज़ के इंजन पुराने हो चुके हैं। वे बार-बार खराब हो रहे हैं। तेज हवाओं और ऊंची लहरों में क्रूज़ बीच पानी में बंद पड़ जाता है।

इतना ही नहीं, हैदराबाद की बोट बिल्डर कंपनी ने भी कह दिया था कि इंजन के पार्ट्स अब बाजार में उपलब्ध नहीं हैं और इंजन बदलना जरूरी है।

14 जनवरी को ही मिल गया था खतरे का संकेत

पत्र के मुताबिक 14 जनवरी 2025 को राउंड के दौरान क्रूज़ के दोनों इंजन सीज़ हो गए थे। तेज हवाओं के बीच क्रूज़ पानी के बीचोंबीच बंद पड़ गया।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि स्पीड बोट की मदद से उसे बाहर निकालना पड़ा। दूसरे इंजन में भी लगातार तकनीकी खराबियां आ रही थीं। उसकी सेल्फ की गरारी तक चढ़ जाती थी।

मैनेजर ने साफ लिखा था कि बार-बार सेवाएं बंद होने से पर्यटक नाराज हो रहे हैं और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

करीब 20 साल पुराना था क्रूज़

यह क्रूज़ साल 2006 में बरगी डैम में संचालन के लिए लाया गया था। करीब 20 साल पुराने इस जहाज को लगातार तकनीकी खराबियों के बावजूद चलाया जाता रहा।

और फिर… 30 अप्रैल को वही हुआ जिसका डर पहले ही जताया जा चुका था। दर्दनाक हादसे में 13 पर्यटकों की मौत हो गई।

सबसे बड़ा सवाल…

अगर अधिकारियों को पहले ही बता दिया गया था कि क्रूज़ खतरनाक हालत में है… अगर विशेषज्ञ इंजन बदलने की सलाह दे चुके थे… अगर बीच पानी में इंजन बंद पड़ने की घटनाएं पहले हो चुकी थीं…

तो फिर आखिर किसके आदेश पर मौत का यह सफर जारी रखा गया?

क्या 13 लोगों की मौत सिर्फ एक हादसा है… या फिर यह प्रशासनिक लापरवाही से हुई हत्या?


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