प्रेम-त्रिकोण में उलझे छात्र ने कांस्टेबल प्रेमिका के घर फांसी लगाकर दी जान



मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। बीएड के एक छात्र ने अपनी कांस्टेबल प्रेमिका के घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मामला प्रेम-त्रिकोण से जुड़ा बताया जा रहा है। मृतक द्वारा छोड़े गए पांच पन्नों के सुसाइड नोट में पूरी घटना का उल्लेख है, जिससे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

प्रेम कहानी का दर्दनाक अंत प्रदीप रावत (27), जो धार जिले के बांक टांडा गांव का निवासी था, इंदौर में जॉब के साथ बीएड की पढ़ाई कर रहा था। प्रदीप का अफेयर इंदौर ट्रैफिक पुलिस में पदस्थ महिला कांस्टेबल खुशबू (बदला हुआ नाम) से 2017 में शुरू हुआ था। सुसाइड नोट के अनुसार, दोनों के बीच रिश्ते की शुरुआत प्यार और विश्वास से हुई थी। लेकिन समय के साथ यह रिश्ता तनाव और धोखे में बदल गया।

सुसाइड नोट में लिखी कहानी प्रदीप ने सुसाइड नोट में लिखा, "मैं खुशबू से 2017 से प्यार करता हूं। उसने ही मुझसे बात करना शुरू किया था। मुझे पता चला कि वह पहले गांव के एक लड़के से बात करती थी। मैंने उसे कहा कि वह चाहे तो उससे बात कर सकती है या मुझसे। उसने लड़के से बात करना बंद कर दी। बाद में खुशबू ने जोबट के किसी अनजान लड़के से बात शुरू कर दी। यह जानकर मैंने उसे टोक दिया। इसके बाद भी हमारी बातचीत जारी रही, लेकिन रिश्ते में दरारें बढ़ती गईं।"

सुसाइड नोट में प्रदीप ने यह भी लिखा कि खुशबू के जीवन में किसी और व्यक्ति की एंट्री से वह टूट गया था। उसने अपनी भावनाओं और दर्द का खुलासा करते हुए कहा कि खुशबू के बदलते व्यवहार ने उसे अंदर से कमजोर कर दिया।

परिवार का दावा और पुलिस जांच मृतक के पिता, जो किसान हैं, ने बताया कि प्रदीप खुशबू से शादी करने की योजना बना रहा था। परिवार के अनुसार, खुशबू का व्यवहार हाल के दिनों में बदल गया था। जब प्रदीप ने खुशबू के घर जाकर बात करने की कोशिश की, तो हालात बिगड़ गए।

अन्नपूर्णा थाना प्रभारी ने बताया कि घटना स्थल से बरामद सुसाइड नोट को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है, जिसमें खुशबू और उसके कथित दूसरे अफेयर की भूमिका भी शामिल है।

समाज पर सवाल उठाती घटना इस घटना ने रिश्तों में विश्वास और भावनात्मक तनाव के बढ़ते मामलों की ओर ध्यान खींचा है। युवा पीढ़ी में मानसिक स्वास्थ्य और संवाद की कमी अक्सर इस तरह की घटनाओं को जन्म देती है। समाज में इन समस्याओं को गंभीरता से लेने और समय रहते समाधान ढूंढने की आवश्यकता है।

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