मापदंडों पर जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा 6 महिला जजों की बर्खास्तगी में अपनाए गए मापदंडों की कड़ी आलोचना की।
महिलाओं के खिलाफ भेदभाव पर सवाल
कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को शारीरिक और मानसिक चुनौतियों के कारण धीमी गति से काम करने वाला कहकर उनके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं।
भोपाल: मध्य प्रदेश में 6 महिला सिविल जजों की बर्खास्तगी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए हाई कोर्ट द्वारा अपनाए गए मापदंडों को पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण बताया। मामले की सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना और एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने की।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पुरुष न्यायाधीश मासिक धर्म की चुनौतियों को समझ पाते, तो यह मामला अलग होता। कोर्ट ने कहा, "अगर महिलाएं किसी कारणवश धीमी गति से काम कर रही हैं, तो उन्हें घर भेज देना समाधान नहीं है।"
क्या है मामला?
23 मई 2023 को मध्य प्रदेश के विधि और विधायी कार्य विभाग ने हाई कोर्ट की सिफारिश पर 6 महिला जजों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश दिया। यह निर्णय हाई कोर्ट की प्रशासनिक समिति और पूर्ण न्यायालय की बैठकों के आधार पर लिया गया, जहां बर्खास्त जजों के प्रदर्शन को परिवीक्षा अवधि के दौरान असंतोषजनक पाया गया।
आदेश का गजट नोटिफिकेशन 9 जून 2023 को जारी किया गया था। बर्खास्त जजों में से दो को अभी बहाल किया जाना बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मध्य प्रदेश के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि जजों की खराब केस निपटान दर के कारण यह कार्रवाई की गई। इस पर कोर्ट ने कहा, "पुरुष और महिला न्यायाधीशों के लिए समान मापदंड क्यों नहीं हैं?"
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, "काश उन्हें मासिक धर्म होता, तभी वे इस स्थिति को समझ पाते।"
क्या है आगे की राह?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 12 दिसंबर तय की है। शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से इस मामले पर पुनर्विचार करने और बर्खास्त जजों के अभ्यावेदन पर विचार करने को कहा है।
किन जजों की सेवा समाप्त की गई?
बर्खास्त महिला जजों में शामिल हैं:
- सरिता चौधरी (उमरिया)
- रचना अतुलकर जोशी (रीवा)
- प्रिया शर्मा (इंदौर)
- सोनाक्षी जोशी (मुरैना)
- अदिति कुमार शर्मा (टीकमगढ़)
- ज्योति बरखेड़े (टिमरनी)
इस मामले में वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और आर. बसंत ने बर्खास्त जजों की ओर से पैरवी की, जबकि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का प्रतिनिधित्व वकील अर्जुन गर्ग ने किया।
यह मामला महिला न्यायाधीशों के अधिकारों और न्यायपालिका में लैंगिक समानता को लेकर एक अहम बहस को जन्म दे रहा है।
