हाईवे पर अतिक्रमण: कार्रवाई न होने पर सरकार की सफाई

 


नई रणनीति से होगा अवैध कब्जों पर नियंत्रण

राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण और अनधिकृत कब्जों को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अब एक नई योजना पेश की है। इसके तहत निरीक्षण, रिपोर्टिंग और तत्काल कार्रवाई की प्रक्रिया को और सख्त बनाया गया है।


तीन वर्षों में नहीं हुआ एक भी केस दर्ज
पिछले तीन वर्षों में हाईवे पर अतिक्रमण को लेकर न कोई कानूनी कार्रवाई हुई और न ही जुर्माने के तौर पर सरकार एक रुपया भी वसूल पाई। संसद में पेश किए गए आंकड़ों से यह खुलासा हुआ। यह भी बताया गया कि राजमार्गों के किनारे बढ़ते रिबन डेवलपमेंट, अवैध पार्किंग और कब्जों की समस्या गंभीर हो चुकी है।

अब मंत्रालय ने राज्यों के मुख्य सचिवों और लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रमुख इंजीनियरों के साथ साझा किए गए दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया है कि "राष्ट्रीय राजमार्गों को अनधिकृत कब्जों से मुक्त रखना अनिवार्य है।"


अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में बदलाव

नई योजना के अनुसार:

  1. निरीक्षण में पारदर्शिता:

    • हर निरीक्षण में कब्जे की प्रकृति और उसकी गंभीरता की रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी।
    • मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय हर महीने निरीक्षण करेंगे, जबकि हाईवे प्रशासन दो महीने में रिपोर्ट देगा।
  2. प्रारंभिक रिपोर्टिंग:

    • राजमार्गों पर तैनात एजेंसियां और ठेकेदार परियोजना क्षेत्र पर सतत निगरानी रखेंगे।
    • जैसे ही किसी अतिक्रमण की शुरुआत होगी, उसे तुरंत रिपोर्ट किया जाएगा।
  3. कार्रवाई और वसूली:

    • अवैध कब्जेदारों को नोटिस जारी करने, क्षतिपूर्ति के बिल और वसूली प्रमाणपत्र का एक तय प्रारूप लागू किया गया है।
    • अतिक्रमण हटाने में होने वाले खर्च की भरपाई कब्जेदार से की जाएगी।

हाईवे प्रशासन को मिले विशेष अधिकार

कंट्रोल ऑफ नेशनल हाइवेज (लैंड एंड ट्रैफिक) अधिनियम, 2002 के तहत एनएचएआई के परियोजना निदेशकों और राज्यों में PWD के प्रमुखों को हाईवे प्रशासन के विशेष अधिकार दिए गए हैं। इन्हीं अधिकारों का इस्तेमाल कर अतिक्रमण हटाने और जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।


सरकार की चुनौती और उपाय

मंत्रालय ने स्वीकार किया कि हाईवे पर अतिक्रमण के मामलों में तेजी आई है। लेकिन इसके लिए नई प्रक्रिया लागू करने से उम्मीद जताई जा रही है कि:

  • निरीक्षण और कार्रवाई में तेजी आएगी।
  • राजमार्गों पर अतिक्रमण की समस्या पर रोक लगेगी।
  • ठेकेदार और एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

विशेषज्ञों का मत:
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है, तो राजमार्गों को सुरक्षित और अनधिकृत कब्जों से मुक्त रखना संभव हो सकता है। हालांकि, इसके लिए सरकार और स्थानीय एजेंसियों को सख्ती और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित करनी होगी।


निष्कर्ष:
हाईवे पर बढ़ते अतिक्रमण के खिलाफ सरकार का यह कदम सही दिशा में एक प्रयास है। अब देखना होगा कि यह नई योजना कितनी प्रभावी साबित होती है।

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