मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के डीजीएम और ठेकेदार को लोकायुक्त ने रंगे हाथ पकड़ा, रिश्वतखोरी का मामला



जबलपुर: मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के डिप्टी जनरल मैनेजर (डीजीएम) हिमांशु अग्रवाल और प्राइवेट ठेकेदार हिमांशु यादव को लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने रिश्वत लेने के आरोप में रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी एक सोलर कंपनी के लाइसेंस रिन्यू करने के नाम पर ₹30,000 की रिश्वत की मांग करने के आरोप में की गई है।

घटना की शुरुआत एक शिकायत से हुई, जो विष्णु सिंह लोधी नामक व्यक्ति ने लोकायुक्त एसपी को दी थी। लोधी, जो कि रोशनी सोलर कंसलटेंसी नागपुर कंपनी में जबलपुर क्षेत्र में जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं, ने शिकायत में बताया था कि कंपनी का रजिस्ट्रेशन रिन्यू करने के लिए मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) के नोडल अधिकारी हिमांशु अग्रवाल ने ₹40,000 की रिश्वत की मांग की थी।

शिकायत के बाद, लोकायुक्त ने मामले की जांच शुरू की और इसकी सत्यता का पता लगाने के लिए मांग वार्ता रिकार्डिंग करवाई। वार्ता में स्पष्ट रूप से यह सामने आया कि हिमांशु अग्रवाल और उनके सह आरोपी हिमांशु यादव ने रिश्वत की डिमांड की थी। इसके बाद लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाया और 20 दिसंबर को शक्ति भवन रामपुर स्थित कार्यालय के पास जब दोनों आरोपियों को ₹30,000 रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।

गिरफ्तारी के बाद आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7, 12, 13(1)B, और 13(2) के तहत कानूनी कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में लोकायुक्त जबलपुर का दल और ट्रैप टीम के प्रमुख उप पुलिस अधीक्षक सुरेखा परमार, इंस्पेक्टर भूपेंद्र कुमार दिवान और इंस्पेक्टर कमल सिंह उईके शामिल थे।

इस घटना से एक बार फिर यह साबित हो गया है कि लोकायुक्त की टीम भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर रही है, और इससे अधिकारियों में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश जाएगा।

इस गिरफ्तारी के बाद, जनता में भी यह उम्मीद जताई जा रही है कि ऐसे मामलों में अधिक सख्ती से कार्रवाई की जाएगी, ताकि सरकारी कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे और रिश्वतखोरी जैसे कुप्रथाओं पर पूरी तरह से काबू पाया जा सके।


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