समरसा पैरामेडिकल कालेज नैनपुर की मनमानी, सूचना के अधिकार का उड़ा रहा मजाक


रेवांचल टाईम्स - मंडला, जिले के विकास खण्ड नैनपुर में संचालित समरसा पैरामेडिकल कालेज में खुल के मनमानी की जा रही है और अगर कोई व्यक्ति या स्थानीय जन चल रहे कार्य और शिक्षा से सबन्धित जानकारी चाहते है तो आनाकानी की जाती है फिर उन्हें प्रलोभन दिया जाता है, और जब आवेदक नही मानता है तो सूचना अधिकार का आवेदन नियमों की बात करते हुए प्रबंधन कर रहा आवेदन वापस शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से चल रहा खेल 


वही पूरे मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग में भारी गोलमाल का विषय बना हुआ है। और उन सारे गोलमाल में शिक्षा विभाग के अधिकारी जो लौटा लेकर आए थे। मगर जब जाने की बात होती है तो वह जाना नहीं चाहते है और फिर आते तो अटैची लेकर और जाते है ट्रक भर भर कर आज हर अधिकारी कर्मचारियों के पास करोड़ो की बेनामी संपति अर्जित कर रखी हैं। मगर प्रशासन ऐसे अधिकारियों पर कार्यवाही करने के बजाय केवल कागज़ों की खाना पूर्ति कर मामले को दबाने में लगा हुआ है। और उन अधिकारियों के संरक्षण में फर्जी कालेज का संचालन किया जा रहा है। और कालेजों से करोड़ों की कमाई की जा रही है। वही कागजों संचालित कालेज छात्र छात्राओं का जीवन अंधकार होने की कगार पर है। वही अनेको बार शिक्षा के नाम पर अनेकों घोटाले भी सामने आए है पर कुछ दिनों तक चर्चा में रही और फिर ठंडे बस्ते में डाल दिये गए, वही दूसरी तरफ निजी कालेज छात्र छात्राओं से मोटी फीस लेकर लुभाने वादे करते है। और बाद में पता चलता है कि हाथ की लाई शून्य, और शिक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। और कालेज शासन से लाखों रूपये सुविधा के नाम पर ले रहा है। जो छात्र जीवन में आगे बढ़ते की सोचकर अच्छी शिक्षा का लाभ लेना चाहता है। मगर उन छात्रों को पता ही नहीं कि जिस संस्था में उन्होंने प्रवेश लिया है वह जमी में है या फिर सिर्फ कागजों ही चल रही है। ना ही आधिकारिक तौर पर शिक्षा विभाग में वह पंजीकृत भी नहीं है। जब विकासखंड शिक्षा अधिकारी  नैनपुर को शिकायत हुई तो शिक्षा विभाग के अधिकारी कार्यवाही करने से कतरा रहे हैं। या फिर कार्यवाही न करने के चलते अपने निजी स्वार्थ सिद्ध पूरा कर लिया गया हैं ये विषय भी जनचर्चा का विषय बना हुआ है, वही कालेज प्रबधन का कहना है। की समरसा कालेज सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे में नहीं है। जोकि विचारणीय है। जबकि शासन का आदेश है जो भी निजी सरकारी या अर्धशासकीय हो जिन्हें शासन से अनुदान प्राप्त होता है वह सूचना अधिकार के दायरे में आते है पर भ्रष्टाचार और भ्रस्टो ने नियम कानून दिया दिखा रहे है, और जिम्मेदार केवल कागजो का पेट भर कर और अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर पलड़ा झाड़ लेते है, और पिसते तो भोलेभाले छात्र छात्राये खेर देखना बाकी है। की शिक्षा विभाग के अधिकारी और खण्ड शिक्षा अधिकारी नैनपुर कार्यवाही कब कर पाते है। या फिर उन्हें संरक्षण देकर उनके हौसले बढाईगे।


सूचना के अधिकार अधिनियम में समरसा पैरामेडिकल कालेज की मनमानी 

वही नाम ना छपने की शर्त में बताया की कालेज प्रबंधन जमकर में पढ़ाई के नाम पर मनमानी की जा रही है। शासन के नियमों निर्देशो का पालन नहीं होता है। कालेज प्रबंधन के द्वारा सूचना के अधिकार के अधिनियम 2005 का खुला मजाक उड़ा रहे है। जिसमे उनका पूरा सहयोग शिक्षा विभाग नैनपुर के अधिकारियो के द्वारा कड़ते हुए उन्हें खुला संरक्षण पैरामेडिकल कालेज मिलने के कारण कोई भी जांच नही होती है। और प्रबंधन कार्यवाही करने की बात कहता है। जिसके कारण कोई भी आगे नही आ रहा है। देखने वाली बात यह होगी की मामला सामने आने के बाद कालेज और कॉलेज प्रबंधन पर क्या कार्यवाही होगी या फिर एक बार मामले को दबा दिया जाएगा और उन्हें छात्र छात्राओं के जीवन से खिलवाड़ करने के लिए संरक्षण दिया जाएगा और फिर छात्र छात्रा अपने अधिकार पाने के लिए जिला प्रशासन के आगे आकर खड़े होंगे जब जाकर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार जागेंगे। यह देखना बाकी हैं।

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