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ठंड में बीमार होने से बचाएंगे ये 5 आयुर्वेदिक टिप्स



सर्दी के मौसम में बुखार, सर्दी और खांसी सबसे आम बात होती है। जी हाँ, हालाँकि आज के समय में मामूली खांसी या जुकाम को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता है। इसी के चलते जरूरी है कि हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करें, ताकि यह हमारे शरीर को तकलीफदेह संक्रमणों से बचा सके। आपको बता दें कि आयुर्वेद की मदद से आप इस मौसम में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकते हैं। अब हम आपको 5 तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं।


हर्बल चाय या काढ़े- रोजाना हर्बल चाय या काढ़े का सेवन करना चाहिए। जी हाँ और आप इसमें तुलसी, काली मिर्च, दालचीनी, सोंठ, लौंग आदि डाल सकते हैं। वहीं स्वाद के लिए आप इसमें नींबू का रस या गुड़ भी मिला सकते हैं।

हल्दी वाला दूध- हर दिन एक गिलास हल्दी वाला दूध पीने से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी। जी हाँ और इसके लिए आपको एक कप दूध में आधा चम्मच हल्दी डालकर उबालना है। हल्दी के एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर में सूजन को रोकते हैं। इसी के साथ ही इसमें पाया जाने वाला करक्यूमिन ब्रेन सेल्स के विकास में मदद करता है।




नाक में तेल- नाक में तेल डालने की एक सरल और प्राचीन प्रथा है, इसको नहाने से एक घंटा पहले खाली पेट करना चाहिए। इसके लिए सीधे लेट जाएं और घी, तिल या नारियल के तेल की 4 से 5 बूंद नाक में डालें।

च्यवनप्राश- यह आंवला और 30 विभिन्न जड़ी बूटियों का मिश्रण है। सर्दी के मौसम में इसे दिन में दो बार जरूर खाना चाहिए। जी दरअसल च्यवनप्राश संक्रमण से बचाता है।

तेल- यह खाने के तेल को मुंह में घुमाकर थूकने की आयुर्वेदिक प्रथा है। जी हाँ और आप इसमें तिल या नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक चम्मच तेल को मुंह में 2 से 3 मिनट तक घुमाकर थूक दें। इसके बाद गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें। आयुर्वेद के अनुसार तेल निकालने की मदद से ओरल और नेजल इम्युनिटी को बढ़ाया जा सकता है। इससे दांतों में कैविटी नहीं बनती और मुंह से दुर्गंध नहीं आती।

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