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आखिर क्या है मोदी को लेकर केजरीवाल के बदलने की वजह, 23 मई 2019 के बाद इतने क्यों बदल गए अरविंद

अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने आज एक रिपोर्ट प्रकाशित की है कि अरविंद केजरीवाल अब चुनावी रैलियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम नहीं लेते हैं. आज की प्रेस रिव्यू की लीड में यही रिपोर्ट पढ़िए.

आठ जनवरी को पाँच राज्यों में विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद से अरविंद केजरीवाल ने अलग-अलग राज्यों में कुल 38 भाषण दिए, लेकिन 'मोदी' शब्द का इस्तेमाल नहीं किया. केवल दो प्रेस कॉन्फ़्रेंस में उन्होंने 'मोदी' शब्द का इस्तेमाल किया है.

यहाँ तक कि इन प्रेस कॉन्फ़्रेंसों में अरविंद केजरीवाल ने एक बार रिपोर्टर के 'छोटा मोदी' सवाल पर जवाब दिया था न कि मोदी पर. दूसरी बार केजरीवाल ने अतीत की टिप्पणी को लेकर मोदी का ज़िक्र किया था न कि मोदी पर हमले के लिए.

यही अरविंद केजरीवाल पहले मोदी को 'बेशर्म तानाशाह', 'कायर', 'मनोरोगी' और 'दिल्ली के लिए ख़तरनाक' बताते थे. अरविंद केजरीवाल मोदी का नाम लेते हुए निशाना साधने का शायद ही कोई मौक़ा छोड़ते थे.

अरविंद केजरीवाल ने मोदी का नाम लेना केवल हाल के चुनावी अभियानों में नहीं छोड़ा है बल्कि पिछले 32 महीनों में

उन्होंने ने मुश्किल से मोदी का नाम लिया है. यहाँ तक कि बीजेपी के ख़िलाफ़ हमला बोलने और केंद्र सरकार के फ़ैसलों की आलोचना में भी केजरीवाल मोदी का नाम नहीं लेते हैं.

मिसाल के तौर पर आम आदमी पार्टी प्रमुख ने 2020 और 21 में तीन विवादित कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ जंतर मंतर, दिल्ली विधानसभा के अलावा सिंघु बॉर्डर पर भाषण दिए, लेकिन मोदी या प्रधानमंत्री शब्द का इस्तेमाल नहीं किया. अरविंद केजरीवाल की पार्टी कृषि क़ानूनों का संसद से सड़क तक विरोध कर रही थी.

मार्च 2021 में केंद्र सरकार ने दिल्ली में उपराज्यपाल को और अधिकार देने के लिए एक बिल पेश किया था. इसके ख़िलाफ़ आम आदमी पार्टी ने 17 मार्च को महज़ एक विरोध-प्रदर्शन का आयोजन किया. इस विरोध-प्रदर्शन में भी अरविंद केजरीवाल ने मोदी या प्रधानमंत्री शब्द का इस्तेमाल नहीं किया.

पिछले साल यानी 2021 में 18 अप्रैल से 26 अप्रैल तक दिल्ली जब कोविड की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से जूझ रही थी तब भी आप सुप्रीमो ने मोदी या प्रधानमंत्री शब्द के इस्तेमाल से परहेज़ किया. दिल्ली सरकार ने पर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं करने के लिए केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया. द हिन्दू ने पाया कि 2020, 2021 और 2022 में आप सुप्रीमो ने कुल 45 भाषण दिए थे.

केजरीवाल इसी पैटर्न को अपनी ट्वीट में भी अपना रहे हैं. 2022 में उन्होंने केंद्र या बीजेपी की आलोचना में किए गए किसी ट्वीट में मोदी शब्द का उल्लेख नहीं किया. 2021 में अरविंद केजरीवाल ने अपने ट्वीट में एक बार मोदी शब्द लिखा, जब उन्होंने प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई दी. अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी को बधाई देते हुए लिखा था, ''आदरणीय प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई. आपकी लंबी और सेहतमंद उम्र के लिए प्रार्थना करता हूँ.''

अरविंद केजरीवाल ने 17 सितंबर को पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई देने के लिए आख़िरी बार अपने ट्वीट में मोदी शब्द का उल्लेख किया था. सबसे दिलचस्प यह है कि 23 मई, 2019 को आम चुनाव के नतीजों की घोषणा हुई और बीजेपी को ज़बर्दस्त जीत मिली तब से अरविंद केजरीवाल ने मोदी शब्द का इस्तेमाल लगभग छोड़ दिया है.

पुराने केजरीवाल
पुराने केजरीवाल चुनावी अभियानों में मोदी को जमकर निशाने पर लेते थे. मिसाल के तौर पर 2019 में केजरीवाल ने अपने ट्वीट में मोदी का नाम 27 बार लिखा. लेकिन इनमें से 26 बार 23 मई के पहले यानी 2019 के आम चुनाव के नतीजे आने के पहले. उसके बाद एक बार 23 मई को बीजेपी को जीत की बधाई देने के लिए अरविंद केजरीवाल ने अपने ट्वीट में मोदी का नाम लिखा.

23 मई के बाद अरविंद केजरीवाल ने अपने ट्वीट्स में मोदी का नाम लिखना बंद कर दिया. 2020 में अरविंद ने एक बार मोदी शब्द का इस्तेमाल किया. 2021 में केजरीवाल ने मोदी का एक बार भी नाम नहीं लिया और 2022 में भी इसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं.

इसी तरह आम आदमी पार्टी प्रमुख ने हिन्दी में किए गए ट्वीट्स में 2019 में 53 बार मोदी के नाम लिए, लेकिन ये सारे ट्वीट्स 23 मई, 2019 के पहले के थे. 2020 में एक बार और 2021 में एक बार भी केजरीवाल ने मोदी का नाम लिखते हुए कोई ट्वीट नहीं किया. 2022 में अरविंद केजरीवाल ने एक बार नाम लिया, लेकिन तब वह हमला पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर कर रहे थे न कि मोदी पर.

आख़िर अरविंद केजरीवाल ने यह रणनीति क्यों अपनाई? राजनीतिक विश्लेषक नीरजा चौधरी कहती हैं, ''मुझे लगता है कि केजरीवाल का यह क़दम सूझ-बूझ भरा है. हालाँकि कई लोग मुझसे सहमत नहीं होंगे. अरविंद को लगा कि मोदी पर हमला फ़ायरबैक कर सकता है और मोदी लोगों के बीच अब भी लोकप्रिय हैं. लोग बीजेपी से नाख़ुश हो सकते हैं, लेकिन वे सोचते हैं कि मोदी अच्छा कर रहे हैं.''

नीरजा कहती हैं कि अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में सरकार चलाना है और बिना केंद्र के सहयोग के मुश्किल है. ऐसे में वह सीधे भिड़ना नहीं चाहते हैं. दिल्ली में सरकार और प्रशासन में राज्य सरकार से ज़्यादा केंद्र की भूमिका है. दिल्ली पुलिस के अलावा ब्यूरोक्रैट्स के ट्रांसफ़र और पोस्टिंग का ज़िम्मा भी केंद्र के पास ही है.

अरविंद केजरीवाल कैसे हमला कर रहे हैं?
विधानसभा के लिए जारी चुनावी कैंपेन में अरविंद केजरीवाल का भाषण बहुत सतर्कता भरा है. अरविंद केजरीवाल काफ़ी लोकप्रिय वादे कर रहे हैं और नए राज्य का सपना दिखा रहे हैं. अरविंद का ज़्यादातर हमला कांग्रेस, बीजेपी और बादल परिवार पर है.

वह व्यक्तिगत हमले ना के बराबर कर रहे हैं. पंजाब में व्यक्तिगत हमला मुख्यमंत्री चन्नी तक सीमित है. चन्नी पर केजरीवाल भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं. दो या तीन बार केजरीवाल ने सुखबीर सिंह बादल पर और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत पर हमला बोला है, लेकिन उनके भाषण में व्यक्तिगत हमले बिल्कुल कम रहते हैं. केजरीवाल ने अब मोदी सरकार के बदले केंद्र सरकार कहना शुरू कर दिया है.

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