हालांकि पहली तिमाही से तुलनात्मक तौर पर देश की अर्थव्यवस्था बेहतर हालात में है। बावजूद निगेटिव ग्रोथ किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए सही नहीं मानी जा सकती है। हमने लगातार दो तिमाही में जीडीपी का नकारात्मक ग्रोथ देखा, जिससे जितनी जल्दी हो सके निपटने की जरूरत है। ताजा आंकड़े के हिसाब से सरकार ने आर्थिक मंदी को स्वीकार किया है।
जीडीपी के नकारात्मक ग्रोथ पर सरकारी जवाब
देश के मुख्य वित्तीय सलाहकार ने निगेटिव जीडीपी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था पहले से बेहतर हुई है। उन्होंने माना कि आपदा के चलते देश को नुकसान उठाना पड़ा है, जिससे हम धीरे धीरे उबर पा रहे हैं। रिजर्व बैंक का अनुमान था कि दूसरी तिमाही में जीडीपी में 8.6 फीसदी की गिरावट हो सकती है। वहीं केयर रेटिंग्स ने भी 9.9 फीसदी की गिरावट का अंदाजा लगाया था। इस लिहाज से भी आंकड़े कुछ संतोषजनक कहे जा सकते हैं। उम्मीद की जा रही है कि तीसरी और चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था में मामूली सुधार हो सकता है।
क्या भारत में आ गई आर्थिक मंदी?
तकनीकी तौर पर कहें तो भारत इस वक्त आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक अगर किसी देश की जीडीपी लगातार दो तिमाही निगेटिव में रहती है यानी ग्रोथ की बजाय उसमें गिरावट आती है तो इसे मंदी की स्थिति मानी जाती है। भारत में वित्त वर्ष की लगातार दो तिमाही में जीडीपी नकारात्मक है, लिहाजा हम कह सकते हैं कि देश इस वक्त मंदी के हालात से गुजर रहा है।
