क्या आप जानते हैं गणेश जी ने की थी रावण के भाई विभीषण से लड़ाई

गणेश चतुर्थी का पर्व हर साल मनाया जाता है और यह पर्व 10 दिनों तक मनाया जाता है. इस पर्व में बप्पा का पूजन होता है. ऐसे में इस साल भी गणेश चतुर्थी का पर्व 22 अगस्त से शुरू हो चुका है. अब आज हम आपको बताने जा रहे हैं आखिर क्यों हुआ था विभीषण और गणेश जी का युद्ध...?
कथा - जिस समय भगवान राम ने रावण का वध किया था उस समय भगवान् राम अपने भक्त विभीषण को भेंट में कुछ देना चाहते है. उस दौरान उन्होंने अपने विष्णु रूप की एक मूर्ति उनको दे दी. कहा जाता है उस समय उन्होंने उनसे कहा तुम जहाँ इस मूर्ति को रख दोगे यह वहीं पर स्थापित हो जाएगी. उस समय विभीषण ने कहा ठीक है भगवान मैं इसे लंका में ही जाकर रखूंगा. कहा जाता है उसके बाद विभीषण उसे लंका लेकर चल दिया लेकिन देवता ऐसा नही चाहते है कि विभीषण इस मूर्ति को अपने साथ लंका ले जाए क्योंकि वह एक राक्षस प्रजाति से था. इस दौरान सभी देवता मदद के लिए गणेश जी के पास चले गए. वहीं जब गणेश जी को पता चला तो उन्होंने सबकी बात सुनी.
उसके बाद उन्होंने एक बच्चे का छोटा सा रूप रखा. वहीं जब विभीषण उस मूर्ति को लेकर जा रहे थे तब रास्ते में एक नदी पड़ी और वो उसमे नहाना चाहता थे लेकिन वह मूर्ति हाथ में होने के कारण ऐसा नहीं कर सकते थे. उस दौरान वहां भगवान् गणेश एक बालक के रूप में आ गए. उन्हें देख विभीषण ने उसके मूर्ति उनको दे दी और कहा इसे नीचे मत रखना. वहीं जैसे ही विभीषण नहाने गए गणेश जी ने मूर्ति को नीचे रख दिया और वहां से भाग गए. जब विभीषण लौटे तो वह जमकर क्रोधित हुए और बालक को ढूंढने लगे. उस समय गणेश जी एक पर्वत (तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में त्रिचि नाम के स्थान पर रॉक फोर्ट पहाड़ी) पर जाकर छुप गए और विभीषण के काफी तलाश करने के बाद वह उन्हें मिले. उस समय विभीषण ने क्रोध में आकर गणेश जी का सर धड़ से अलग कर दिया. उसके बाद गणेश जी अपने वास्तविक रूप में आ गए तो विभीषण ने उनसे क्षमा मांगी. तब से तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में त्रिचि नाम के स्थान पर रॉक फोर्ट पहाड़ी पर भगवान गणेश का प्रसिद्ध मंदिर बना है.

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