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पश्चिम बंगाल पर आपदा का डबल अटैक, अम्फान के बाद राहत कैंपों में बढ़ा कोरोना का खतरा

नई दिल्ली:  पश्चिम बंगाल और ओडिशा में तबाही मचाने के बाद भले ही अम्फान तूफान थम गया हो, लेकिन अब एक दूसरे संकट ने पश्चिम बंगाल की चिंता बढ़ा दी है । चक्रवाती तूफान के खतरे को देखते हुए लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पुलिस और प्रशासन ने रखा था । ये सभी लोग अभी भी इन शेल्टर होम्स में डेरा डाले हुए हैं । लेकिन एक साथ लाखों लोगों को रखने से नये खतरे ने दस्तक दे दी है । 
आपको बतादें दरअसल अम्फान तूफान की आशंका के मद्देनजर जब लाखों लोगों को शेल्टर कैंप में रखा गया था, उस वक्त 160 किमी की रफ्तार से चक्रवाती तूफान की हवाएं चल रहीं थी । किसी को भी उस दौरान  कोरोना का ध्यान नहीं था । सभी लोग ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहे थे कि किसी तरह से तूफान शांत हो जाए। हर कोई केवल एक ही बात सोच रहा था कि किसी तरह से उनकी जान बच जाए ।
लेकिन अब जब तूफान थम चुका है, एक नई आपदा ने लोगों के होश उड़ा दिये हैं । कोरोना महामारी लोगों की जान पर आफत बन कर सामने आ पड़ी है । अभी तक यहां कोरोना के मामले कम ही थे । लेकिन अब कोरोना वायरस के मामले बढ़ने का खतरा पैदा हो चुका है । चक्रवाती तूफान में करीब 88 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 9 लोगों की कोरोना वायरस के चलते जान चली गयी। 
अब जिस तरह के हालात बन गये हैं, उसके बाद चक्रवात से मची तबाही और कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे ने यहां की सरकार के सामने बड़ी समस्या पैदा कर दी है । पश्चिम बंगाल सरकार के सामने इस वक्त कई चुनौतियां हैं, एक तरफ तबाही का सामना कर चुके लोगों को राहत पहुंचाना,वहीं  दूसरी तरफ यहां कोरोना के बढ़ते खतरे ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इतना ही नहीं सरकार के सामने एक और संकट है वो ये कि अन्य प्रदेशों से वापस लौट रहे प्रवासी मजदूरों को क्वारंटीन करना, क्यों कि इन लोगों से यहां महामारी फैलने का सबसे ज्यादा रिस्क है। 
आपको बतादें हाल ही में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया आपदा पीड़ित राज्य के लिये 1000 करोड़ की मदद की है । वही जल्द ही केंद्र की एक टीम पश्चिम बंगाल पहुंच कर सर्वे करेगी और हालात का जायजा लेगी । 
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