सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर में 4जी इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने से इनकार कर दिया। शीर्ष न्यायालय ने इस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा और जनता की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
अदातल ने केंद्र सरकार से कहा कि वह लागू प्रतिबंधों की निरंतरता से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए गृह सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित करे।
न्यायमूर्ति एन.वी.रमना, न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में प्रतिबंधों को जारी रखने की जरूरत पर तत्काल निर्णय लेने और मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर के सचिवों की एक विशेष समिति का गठन करना उचित रहेगा, जिसमें गृह मंत्रालय के सचिव, संचार विभाग के सचिव और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर के मुख्य सचिव शामिल हों।
शीर्ष अदालत ने कहा कि विशेष समिति को निर्देश दिया जाता है कि वह 4 जी इंटरनेट सेवाओं की बहाली पर याचिकाकर्ताओं द्वारा बताई गई बातों और हाई स्पीड इंटरनेट का विरोध करने वाले केंद्र सरकार की जानकारियों की जांच करे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "उक्त समिति को चाहिए कि वह याचिकाकर्ताओं द्वारा सुझाए गए विकल्पों की उपयुक्तता की भी जांच करे।"
याचिका में कहा गया है कि आवश्यक स्थानों पर प्रतिबंधों को सीमित किया जाए और परीक्षण के आधार पर कुछ भौगोलिक क्षेत्रों में तेज इंटरनेट (3 जी या 4 जी) की अनुमति प्रदान की जाए।
पीठ ने कहा कि आवश्यकता से अधिक प्रतिबंध लागू नहीं होने चाहिए।
न्यायमूर्ति एन.वी.रमना, न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में प्रतिबंधों को जारी रखने की जरूरत पर तत्काल निर्णय लेने और मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर के सचिवों की एक विशेष समिति का गठन करना उचित रहेगा, जिसमें गृह मंत्रालय के सचिव, संचार विभाग के सचिव और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर के मुख्य सचिव शामिल हों।
शीर्ष अदालत ने कहा कि विशेष समिति को निर्देश दिया जाता है कि वह 4 जी इंटरनेट सेवाओं की बहाली पर याचिकाकर्ताओं द्वारा बताई गई बातों और हाई स्पीड इंटरनेट का विरोध करने वाले केंद्र सरकार की जानकारियों की जांच करे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "उक्त समिति को चाहिए कि वह याचिकाकर्ताओं द्वारा सुझाए गए विकल्पों की उपयुक्तता की भी जांच करे।"
याचिका में कहा गया है कि आवश्यक स्थानों पर प्रतिबंधों को सीमित किया जाए और परीक्षण के आधार पर कुछ भौगोलिक क्षेत्रों में तेज इंटरनेट (3 जी या 4 जी) की अनुमति प्रदान की जाए।
पीठ ने कहा कि आवश्यकता से अधिक प्रतिबंध लागू नहीं होने चाहिए।
