कोरोना से जंग में भारत को वर्ल्ड बैंक के बाद मिला ADB का साथ, 2.2 अरब डॉलर की मदद का किया वादा

तकरीबन हर देश में महामारी के तौर पर दस्तक दे चुके कोरोना वायरस की वजह से दुनिया अपने इतिहास की सबसे बड़ी मंदी की तरफ बढ़ती नजर आ रही है। विश्व की आधी आबादी घरों में बंद है और अधिकांश बड़ी आर्थिक शक्तियों में औद्योगिक गतिविधियां एक के बाद एक लगभग ठप होती जा रही हैं। आज देश ऐसे हालात का सामना कर रहा है, जिसे पहले कभी नहीं देखा गया था। सरकार ने 14 अप्रैल तक लॉकडाउन घोषित किया है और कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसे बढ़ाए जाने की पूरी संभावना है।
संकट की इस घड़ी में विश्व बैंक के बाद एडीबी ने भी भारत को आर्थिक सहायता देने का भरोसा दिया है। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के अध्यक्ष मासत्सुगु असकावा ने कोरोना वायरस महामारी से लड़ने में भारत की मदद के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को 2.2 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 16,500 करोड़ रुपये) की मदद का भरोसा दिया। असकावा ने महामारी की रोकथाम के लिए भारत सरकार के उपायों की सराहना की। इन उपायों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकालीन कार्यक्रम, उद्योगजगत को कर और अन्य राहत तथा 26 मार्च को घोषित 1.7 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक राहत पैकेज शामिल है।
बता दें कि इससे पहले विश्व बैंक ने भारत को एक अरब डॉलर यानी करीब 7,500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद देने का एलान किया था। इसके अलावा आइएमएफ समेत कुछ दूसरी वित्तीय एजेंसियों से 600 करोड़ डॉलर यानी करीब 45,000 करोड़ रुपये की और मदद लेने पर भारत विचार कर रहा था। भारत इस समूची राशि का इस्तेमाल कोविड-19 महामारी से लड़ने में ही किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली बड़ी रकम का इस्तेमाल भारत अगले दो महीनों के भीतर कोरोना वायरस की टेस्टिंग सुविधा पर खर्च करना चाहता है। विदेशों से टेस्टिंग किट मंगवाने के साथ ही भारत को वेंटिलेटर्स आयात करने में बड़ी राशि खर्च करनी होगी।
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