कोरोना वायरस corona virus के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन दवा बनाने में जुटे हुए हैं. लेकिन अभी तक कोई भी ऐसी दवा तैयार नहीं हुई है जो इसके इलाज में कारगार साबित हो. वैज्ञानिकों को इसके इलाज के लिए 100 साल पीछे जाने पर मजबूर होना पड़ रहा है. जिससे कोरोना से लड़ाई में बीसीजी का टीका एक उम्मीद की किरण बनकर दिखा है जिसका सबसे पहले इस्तेमाल वर्ष 1921 में आधिकारिक रूप से किया गया था.
बीसीजी वैक्टीरिया से होने वाले रोग टीवी का इलाज करता है और कुछ वैज्ञानित टाइपो-1 डाइबेटिक बीमारी में इसके प्रभाव को लेकर भी शोध कर रहे हैं. हालांकि टीबी और कोविड-19 दो अलग अलग तरह की बीमारी है. टीबी बैक्टीरिया से जुड़ी बीमारी है तो कोविड -19 एक वायरस से.
वैज्ञानिकों का कहना है कि बीसीजी इंसान में इम्युनिटी लेवल बढ़ा सकता है जिसकी जरूरत कभी टीबी मरीजों में नहीं पड़ी है. कहा जाता है कि अगर मरीज का इम्युन सिस्टम मजबूत हो तो वो कोरोना उसके शरीर से खत्म हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक जिन देशों में ये लोगों पर टीका लगाया गया है वहां कोरोना के कारण मृत्युदर बाकी देशों के मुकाबले 6 गुना कम है. इस सूची में भारत भी शामिल है, जहां आज भी बड़े बड़े पैमाने पर नवजातों को बीसीजी का टीका लगाया जाता है.
