जबलपुर: जनता दल (यू ) के प्रदेश अध्यक्ष जबलपुर नगर निगम के पुर्व महापौर निगम अध्यक्ष सूरज जायसवाल ने कहा है की कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में इस बात घोषणा की थी कि राजीव गाँधी के वचनों को साकार करने के लिए उनकी मनसा के अनुरूप स्थानीय निकाय और पंचायती राज व्यवस्था में मजबूती लाने के साथ ही सर्व अधिकार संपन्न बनाया जायेगा इसी बात को साकार करते हुए तत्कालीन सरकार के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने स्थानीय निकाय और पंचायती राज को मजबूती प्रदान की जिसके चलते नगर पालिका, नगर निगम और नगर पंचायत व्यवस्था ने सीधे जनता के द्वारा अध्यक्ष और महापौर का निर्वाचन तय किया था.
उन्होंने कहा की "मेरे उपमहापौर के कार्यकाल में हम लोगो के द्वारा एक लंबे प्रयास के बाद और स्थानीय निकाय में होने वाली अनेको परेशानियों के समाधान हेतु 1997 में स्थानीय निकाय के बिल में अनेक संसोधन किये गये थे जिसके तहत महापौर का प्रत्यक्ष निर्वाचन और महापौर की शक्तियां निरंकुश न हो जाये इसलिए निगम सदन में अध्यक्ष प्रणाली लागू की गयी थी. जिससे सकारात्मक लोकतान्त्रिक व्यवस्था स्थानीय निकायों में संचालित हुई और महापौर एवं नगर पालिका अध्यक्ष को आमजन के प्रतिनिधि होने के कारण विकास कार्य करने का मौका मिला था."
वर्तमान कांग्रेस सरकार ने सीधी प्रणाली से महापौर और अध्यक्ष का चुनाव न कराते हुए पुरानी व्यवस्था को लागू करने का जो निर्णय लिया है वह तभी सफल और सार्थक होगा जब नगर पालिका, नगर निगम और नगर पंचायत में दलबदल विधेयक का पूरी कड़ाई के साथ पालन हो.
सूरज जायसवाल ने स्थानीय राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा को पत्र लिखकर राज्य सभा सांसद द्वारा ट्विटर पर जबलपुर नगर निगम को विभाजित कर नए दो अन्य नगर निगम बनाने के पोस्ट का विरोध करते हुए नगर निगम विभाजन से शहर विकास में होने वाले दूरगामी दुष्परिणामो से अवगत कराया और साथ ही राज्य सभा सांसद से अपेक्षा की है की जबलपुर नगर निगम की सीमा विस्तार कर आसपास के क्षेत्रो को भी नगर सीमा में जोड़ते हुए जबलपुर नगर निगम को महा नगर निगम और A1 ग्रेड शहर बनाने के प्रयासों में सहभागी होंगे.