वास्तुशिल्प का चमत्कार विजयदुर्ग

अछूते तटों और ऐतिहासिक किलों के कारण विजयदुर्ग पर्यटकों को बेहद पसंद आता है। समुद्र तटों के किनारे नारियल और आम के पेड़ एक हरे जंगल के रूप में स्थित हैं। गर्मी में आम के बाग रसदार अलफांसो आम की खुशबू से पूरे क्षेत्र को सुगंधित करते हैं। लाल लकड़ी और पत्तों वाली छतों के बने घर यहां की सुंदरता बढ़ाते हैं। व्यस्त सप्ताहांत के बाद तनावमुक्ति के लिए विजयदुर्ग एक आदर्श पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।
महाराष्ट्र का एक छोटा-सा शहर विजयदुर्ग, समुद्र तट पर स्थित है। यह मुम्बई से 475 कि.मी. की दूरी पर है और सिंधु दुर्ग जिले में स्थित है। अतीत में इसे घेरिया के नाम से जाना जाता था। एक तरफ अरब सागर और दूसरी तरफ सहयाद्रि पहाडिय़ों के बीच में बसा यह स्थान पर्यटन के लिए श्रेष्ठ है। मराठा शासन के दौरान विजयदुर्ग शहर और पूरे सिंधुदुर्ग जिले ने एक नौसेना बेस के रूप में सेवा की। आज भी यह एक चालू बंदरगाह है।
प्रमुख आर्कषण:
विजयदुर्ग किला- विजयदुर्ग उस किले के लिए प्रसिद्ध है, जिसे विक्टर फोर्ट के नाम से जाना जाता है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसे बनवाया था। तीन तरफ समुद्र से घिरा होने के कारण इसे घेरिया किला भी कहा जाता है। विदेशी दुश्मनों से अजेय यह किला मराठा और पेशवा शासन की ताकत था। किले की दीवारें तीन परतों की हैं और इसके आसपास कई टावर और इमारतें किले को अजेय बनाती हैं। यह 17 एकड़ के क्षेत्र में फैला है। कालांतर में अंग्रेजों ने इस पर कब्जा कर लिया था, जिन्होंने इस किले को फोर्ट अगस्टस या ओशियानिक किला नाम दिया था। वास्तुकला उत्साही इस सदियों पुरानी संरचना की ओर अभी भी आकृषित होते हैं और आगंतुक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यह एक वास्तुशिल्प प्रतिभा है। खरपेतन क्रीक का इस किले से जुड़ा होना व्यावहारिक रूप से आस-पास के क्षेत्र में बड़े जहाजों के प्रवेश को असंभव बना देता है। इस क्षेत्र को मराठा कबीले के युद्धपोतों के बंदरगाह के लिए इस्तेमाल किया गया था इसीलिए यह किला ‘ईस्टर्न जिब्राल्टर’ के नाम से भी जाना गया।
नौसेना गोदी: नौसेना गोदी एक जगह है, जहां मराठा युद्धपोतों की मुरम्मत का काम होता था, इसे वैगजोटन क्रीक के नाम से जाना जाता है। यह किले से डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित है। यह उन दो किलों में से एक है, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज ने भगवा ध्वज शुरू किया।
तोरण किला: तोरण किला दूसरी प्रसिद्ध जगह है। यहां विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियों वाले कई मंदिर हैं। यहां का प्राचीन रामेश्वर मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
क्या है खास?
यहां व्यंजनों की विविधता देखने को मिलती है। यहां के लोग स्नेही और मेहमाननवाज हैं। यहां की ‘मालवानी करी’ बेहद लजीज होती है। गर्मी के मौसम में विजयदुर्ग की यात्रा पर ताजा रसदार अलफांसो आम और कटहल खाना नहीं भूलना चाहिए। यहां काजू फैक्टरी की यात्रा करके काजू कैसे संषोधित होता है? यह देख सकते हैं।
कुछ अतिरिक्त तथ्य: विजयदुर्ग में अद्र्ध-उष्णकटिबंधीय जलवायु के कारण वर्ष भर मौसम मधुर रहता है। मानसून में प्रचुर वर्षा इस क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाती है।
कैसे पहुंचें?
सड़क मार्ग- महाराष्ट्र के किसी भी हिस्से से विजयदुर्ग आसानी से पहुंचा जा सकता है। विजयदुर्ग के लिए मुम्बई, राजापुर आदि प्रमुख शहरों से बसें उपलब्ध हैं।
रेल मार्ग: विजयदुर्ग के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन कुडाल और राजापुर हैं। यहां के लिए महाराष्ट्र के भीतर और बाहर के अधिकांश शहरों और कस्बों से नियमित ट्रेनें रोज चलती हैं।
वायु मार्ग: गोवा में पणजी हवाई अड्डा विजयदुर्ग के लिए निकटतम हवाई अड्डा है। यह मुख्य शहर से 180 किलोमीटर की दूरी पर है। ट्रेनों और बसों के जरिए भी वहां तक पहुंचा जा सकता है।

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