सोहागपुर। फोरसिथ लॉज के स्टाफ से मृत चीतल की सूचना मिलने के बाद वन विभाग में हलचल मच गई। शुरुआत में चीतल का तेंदुए द्वारा शिकार किए जाने की आशंका जताई गई थी। सूचना मिलते ही वन अमला मौके पर पहुंचा और डॉग स्क्वाड की मदद से घटनास्थल तथा आसपास के इलाके में सघन सर्चिंग की।
वन विभाग को मिली शुरुआती सूचना में तेंदुए द्वारा चीतल का शिकार किए जाने की आशंका जताई गई थी। वन परिक्षेत्र अधिकारी विलास डोंगरे ने घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी, जिसके बाद तत्काल जांच और सर्चिंग के निर्देश दिए गए।
डॉग स्क्वाड लेकर जंगल में उतरा वन अमला
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर वन अमले ने डॉग स्क्वाड की सहायता से घटनास्थल और आसपास के क्षेत्र की बारीकी से तलाशी ली। वन विभाग के अनुसार सर्चिंग के दौरान ऐसी कोई संदिग्ध गतिविधि सामने नहीं आई, जिससे प्रारंभिक आशंका की तत्काल पुष्टि हो सके।
अंधेरा हो जाने के कारण 6 अक्टूबर को मृत चीतल का पोस्टमॉर्टम नहीं कराया जा सका। इसके बाद शव को शासकीय वाहन से सुरक्षित स्थान पर ले जाकर वन कर्मचारियों की निगरानी में रखा गया।
7 अक्टूबर को शासकीय पशु चिकित्सक डॉ. संजीव मालवीय ने चीतल का पोस्टमॉर्टम किया। परीक्षण में प्रथमदृष्टया चीतल की मौत का कारण आवारा कुत्तों द्वारा घायल किया जाना पाया गया।
सभी अंग मिले सुरक्षित
पोस्टमॉर्टम के दौरान चीतल के सभी अंग सुरक्षित पाए गए। इससे वन्यजीव के अंगों को निकालने जैसी किसी गतिविधि का प्रारंभिक संकेत नहीं मिला। हालांकि वन विभाग ने विस्तृत जांच के लिए आवश्यक नमूने संकलित कर प्रयोगशाला परीक्षण के लिए सुरक्षित किए हैं।
नियमानुसार किया गया अंतिम संस्कार
पोस्टमॉर्टम और आवश्यक सैंपल लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वन विभाग ने नियमानुसार मृत चीतल का दाह संस्कार कराया। विभाग अब प्रयोगशाला जांच के परिणाम और अन्य तथ्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई करेगा।
प्रारंभिक सूचना में तेंदुए के हमले की आशंका थी, लेकिन पोस्टमॉर्टम में प्रथमदृष्टया आवारा कुत्तों द्वारा घायल किए जाने की बात सामने आई है। वन विभाग द्वारा लिए गए सैंपल की जांच के बाद मृत्यु के कारण को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।



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