भोपाल। मध्यप्रदेश में अगले नगरीय निकाय चुनाव से पहले चुनावी मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों के लिए नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। महापौर से लेकर अध्यक्ष और पार्षद तक की जमानत राशि बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही नामांकन प्रक्रिया, चुनावी खर्च के हिसाब और अलग बैंक खाते से जुड़े प्रावधानों को भी स्पष्ट किया गया है।
नगर निगम महापौर पद के उम्मीदवार को अब ₹32,000 की जमानत राशि जमा करनी होगी। पिछली व्यवस्था में यह राशि ₹20,000 थी।
किस पद के लिए कितनी होगी जमानत राशि?
| पद | नई जमानत राशि |
|---|---|
| नगर निगम महापौर | ₹32,000 |
| नगरपालिका परिषद अध्यक्ष | ₹24,000 |
| नगर परिषद अध्यक्ष | ₹16,000 |
| नगर निगम पार्षद | ₹8,000 |
| नगरपालिका परिषद पार्षद | ₹4,800 |
| नगर परिषद पार्षद | ₹1,600 |
महिला और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को आधी राशि
महिला उम्मीदवारों के साथ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को निर्धारित जमानत राशि की आधी रकम जमा करनी होगी। यानी इन वर्गों के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी के मुकाबले जमानत राशि में 50 प्रतिशत की राहत मिलेगी।
2022 के मुकाबले कितनी बढ़ी जमानत?
पिछले नगरीय निकाय चुनाव में महापौर पद के लिए जमानत राशि ₹20 हजार, नगरपालिका अध्यक्ष के लिए ₹15 हजार, नगर परिषद अध्यक्ष के लिए ₹10 हजार, नगर निगम पार्षद के लिए ₹5 हजार, नगरपालिका पार्षद के लिए ₹3 हजार और नगर परिषद पार्षद के लिए ₹1 हजार थी।
₹20,000 से बढ़कर ₹32,000
नामांकन के लिए कम से कम सात दिन का समय
संशोधित व्यवस्था के तहत नामांकन दाखिल करने की अवधि सात दिन से कम नहीं होगी। निर्वाचन संबंधी सूचना प्रकाशित होने के सातवें दिन को नामांकन की अंतिम तारीख माना जाएगा। यदि सातवां दिन सार्वजनिक अवकाश पड़ता है तो उसके अगले कार्यदिवस तक नामांकन दाखिल किया जा सकेगा।
चुनावी खर्च के लिए अलग बैंक खाता जरूरी
महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष, नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षद पद के उम्मीदवारों को अपने चुनावी आय-व्यय का हिसाब रखने के लिए अलग और स्वतंत्र बैंक खाता रखना होगा। नामांकन-पत्र जमा करते समय इस खाते की जानकारी संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर को देनी होगी।
चुनाव प्रचार से जुड़ी प्राप्तियां और खर्च इसी खाते के माध्यम से दर्ज किए जाएंगे। उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करने की तारीख से लेकर मतगणना तक किए गए चुनावी खर्च का रिकॉर्ड रखना होगा।
निर्धारित समय और प्रक्रिया के अनुसार निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत नहीं करने पर राज्य निर्वाचन आयोग संबंधित उम्मीदवार के खिलाफ नियमों के तहत निरर्हता की कार्रवाई कर सकता है।
चुनाव प्रचार पर कितना खर्च कर सकेंगे उम्मीदवार?
निर्वाचन व्यय की अधिकतम सीमा निकाय और उसकी जनसंख्या के आधार पर अलग-अलग है। महापौर पद के लिए 10 लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगम में अधिकतम ₹35 लाख और 10 लाख से कम आबादी वाले नगर निगम में ₹15 लाख तक चुनावी खर्च की सीमा है।
नगर निगम पार्षद पद के लिए यह सीमा क्रमशः ₹8.75 लाख और ₹3.75 लाख है। नगरपालिका परिषद के पार्षद उम्मीदवार के लिए जनसंख्या के अनुसार अधिकतम खर्च सीमा ₹2.50 लाख, ₹1.50 लाख और ₹1 लाख है, जबकि नगर परिषद पार्षद उम्मीदवार के लिए यह सीमा ₹75 हजार है।
नगरपालिका और नगर परिषद अध्यक्ष की खर्च सीमा अलग
नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए एक लाख से अधिक आबादी वाले क्षेत्र में अधिकतम ₹10 लाख, 50 हजार से एक लाख तक की आबादी में ₹6 लाख और 50 हजार से कम आबादी में ₹4 लाख की चुनावी खर्च सीमा रही है। नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए अधिकतम खर्च सीमा ₹3 लाख निर्धारित है।
महापौर और अध्यक्ष को वापस बुलाने की प्रक्रिया भी नियमों में
संशोधित प्रावधानों में महापौर और अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने की प्रक्रिया से जुड़े नियमों को भी शामिल किया गया है। इसके लिए संबंधित नगरपालिका और नगर निगम कानूनों तथा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
इसी तरह मृत्यु, त्यागपत्र, निर्वाचन निरस्त होने या अन्य कारण से महापौर, अध्यक्ष अथवा पार्षद का पद रिक्त होने पर इसकी सूचना निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला निर्वाचन अधिकारी को देनी होगी।
महापौर जमानत — ₹32,000
नगरपालिका अध्यक्ष — ₹24,000
नगर परिषद अध्यक्ष — ₹16,000
नगर निगम पार्षद — ₹8,000
नगरपालिका पार्षद — ₹4,800
नगर परिषद पार्षद — ₹1,600



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