भोपाल। मध्य प्रदेश में अक्टूबर की शुरुआत के साथ सरकारी राशन वितरण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर मध्य प्रदेश राशन विक्रेता संघ ने आंदोलन तेज कर दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि 30 सितंबर तक मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो 1 अक्टूबर से प्रदेश की करीब 28 हजार उचित मूल्य दुकानें बंद रखी जाएंगी।
विक्रेताओं की प्रमुख मांगों में खाद्यान्न वितरण का कमीशन बढ़ाना, न्यूनतम मासिक आय तय करना, परिवहन और तौल में होने वाले नुकसान की भरपाई तथा कमीशन का समय पर भुगतान शामिल है। आंदोलन के चलते सरकारी राशन पर निर्भर हितग्राहियों की नजर अब सरकार और विक्रेता संघ के बीच होने वाली बातचीत पर है।
संघ की चेतावनी के मुताबिक 30 सितंबर तक मांगों पर फैसला नहीं हुआ तो प्रदेश की करीब 28 हजार राशन दुकानों को 1 अक्टूबर से आंदोलन के तहत बंद रखा जाएगा।
प्रदेशभर में प्रदर्शन, सरकार तक पहुंचाईं मांगें
राशन विक्रेताओं ने अलग-अलग जिला मुख्यालयों पर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन और प्रदर्शन का रास्ता अपनाया है। संघ का कहना है कि उचित मूल्य दुकानों के संचालन में होने वाले खर्च और मौजूदा आमदनी के बीच बड़ा अंतर है, जिससे खासकर कम वितरण वाली दुकानों के विक्रेताओं को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विक्रेताओं की मांग है कि सरकार उनकी आर्थिक और संचालन संबंधी समस्याओं पर समयबद्ध फैसला करे, ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली का काम प्रभावित न हो।
₹200 प्रति क्विंटल कमीशन की मांग
संघ की प्रमुख मांग खाद्यान्न वितरण पर मिलने वाले कमीशन को बढ़ाकर कम से कम ₹200 प्रति क्विंटल करने की है। विक्रेताओं का कहना है कि महंगाई और दुकान संचालन के बढ़ते खर्च को देखते हुए मौजूदा आर्थिक व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।
इसके साथ ही विक्रेताओं ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की उचित मूल्य दुकानों के लिए ₹40 हजार प्रतिमाह न्यूनतम आय अथवा आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग रखी है।
1. खाद्यान्न वितरण का कमीशन ₹200 प्रति क्विंटल किया जाए।
2. विक्रेताओं की न्यूनतम मासिक आय ₹40 हजार सुनिश्चित की जाए।
3. तौल और परिवहन में होने वाले नुकसान पर प्रति क्विंटल एक किलो की छूट मिले।
4. हर महीने की 5 तारीख तक कमीशन का भुगतान किया जाए।
5. समितियों के स्तर पर विक्रेताओं का लंबित भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए।
तौल और परिवहन में नुकसान का मुद्दा भी उठाया
विक्रेताओं का कहना है कि खाद्यान्न के परिवहन, भंडारण और तौल के दौरान मात्रा में अंतर आने की समस्या रहती है। संघ ने इस नुकसान को ध्यान में रखते हुए प्रति क्विंटल एक किलोग्राम की छूट देने की मांग की है।
इसके अलावा हर महीने मिलने वाले कमीशन को अगले महीने की 5 तारीख तक अनिवार्य रूप से जारी करने की मांग भी रखी गई है। संघ का तर्क है कि भुगतान में देरी होने से दुकानदारों के नियमित खर्च प्रभावित होते हैं।
हाल ही में 18 महीने के बकाया मानदेय के लिए जारी हुआ था बजट
राशन विक्रेताओं के भुगतान का मुद्दा पहले से चर्चा में रहा है। सितंबर में ही प्रदेश सरकार ने उचित मूल्य दुकान विक्रेताओं के 18 महीने के अतिरिक्त मानदेय के भुगतान के लिए 33 जिलों को बजट जारी किया था। इसके बावजूद विक्रेता संघ अब कमीशन, नियमित भुगतान और आय से जुड़े व्यापक मुद्दों पर समाधान की मांग कर रहा है।
30 सितंबर तक का अल्टीमेटम
संघ ने मांगों पर निर्णय के लिए सरकार को 30 सितंबर तक का समय दिया है। उपलब्ध आंदोलन कार्यक्रम के अनुसार समाधान नहीं होने पर 1 से 7 अक्टूबर तक प्रदेश की करीब 28 हजार उचित मूल्य दुकानें बंद रखने की चेतावनी दी गई है।
अगर यह आंदोलन तय कार्यक्रम के अनुसार शुरू होता है तो कई इलाकों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन वितरण प्रभावित हो सकता है। हालांकि वास्तविक स्थिति सरकार और विक्रेता संगठनों के बीच अगले दो दिनों में होने वाले घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
संगठन: मध्य प्रदेश राशन विक्रेता संघ
दुकानें: करीब 28 हजार
सरकार को समय: 30 सितंबर तक
प्रस्तावित बंद: 1 से 7 अक्टूबर 2026
प्रमुख मांग: ₹200 प्रति क्विंटल कमीशन
मासिक आय की मांग: ₹40 हजार
राशन कार्डधारकों के लिए क्या मायने?
आंदोलन शुरू होने की स्थिति में संबंधित दुकानों पर खाद्यान्न वितरण प्रभावित हो सकता है। फिलहाल 28 सितंबर की स्थिति में हड़ताल शुरू नहीं हुई है और सरकार के पास मांगों पर निर्णय के लिए 30 सितंबर तक का समय है। इसलिए हितग्राहियों को स्थानीय खाद्य विभाग और अपनी उचित मूल्य दुकान से मिलने वाली आधिकारिक सूचना पर नजर रखनी चाहिए।
महत्वपूर्ण: फिलहाल उपलब्ध ताजा जानकारी में 1 से 7 अक्टूबर तक दुकानें बंद रखने की चेतावनी सामने आई है। आगे सरकार और संघ के बीच सहमति बनने पर आंदोलन टल भी सकता है या कार्यक्रम में बदलाव हो सकता है।



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