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मैहर में इलाज के नाम पर गत्ते का सहारा! फ्रैक्चर पैर पर प्लास्टर की जगह कार्डबोर्ड बांधकर मरीज को सतना रेफर किया

मध्य प्रदेश के मैहर जिले के अमरपाटन सिविल अस्पताल में सड़क दुर्घटना में घायल एक व्यक्ति के उपचार को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि पैर में फ्रैक्चर होने के बावजूद अस्पताल में प्लास्टर या मानक मेडिकल स्प्लिंट के बजाय साधारण गत्ता लगाकर पट्टी बांधी गई और घायल को सतना जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। घायल की पहचान 54 वर्षीय पुष्पराज सिंह के रूप में हुई है। मामला सामने आने के बाद अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और प्राथमिक उपचार की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

मैहर में इलाज के नाम पर गत्ते का सहारा! फ्रैक्चर पैर पर प्लास्टर की जगह कार्डबोर्ड बांधकर मरीज को सतना रेफर किया

मैहर/अमरपाटन। मध्य प्रदेश के मैहर जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। अमरपाटन सिविल अस्पताल में सड़क दुर्घटना के बाद उपचार के लिए लाए गए एक घायल व्यक्ति के फ्रैक्चर पैर पर कथित तौर पर प्लास्टर या मानक मेडिकल स्प्लिंट की जगह साधारण गत्ते का सहारा देकर पट्टी बांध दी गई। इसके बाद मरीज को आगे के उपचार के लिए सतना जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। घायल के पैर में गत्ता बंधा होने की तस्वीरें सामने आने के बाद अस्पताल में उपलब्ध आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं और उपचार की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

फ्रैक्चर पैर पर गत्ता बांधकर किया रेफर

घायल पुष्पराज सिंह के पैर को स्थिर रखने के लिए अस्पताल में गत्ते का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है। सवाल यह है कि अस्पताल में फ्रैक्चर के प्राथमिक उपचार के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध थे या नहीं और मरीज को दिया गया उपचार निर्धारित चिकित्सा मानकों के अनुरूप था या नहीं।

नादन टोला ब्रिज पर अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर

जानकारी के अनुसार अमरपाटन थाना क्षेत्र के ग्राम नादन टोला निवासी 54 वर्षीय पुष्पराज सिंह बुधवार देर रात मोटरसाइकिल से स्थानीय बाजार की ओर जा रहे थे। इसी दौरान नेशनल हाईवे-30 पर नादन टोला ब्रिज के पास पीछे से आए एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।

टक्कर लगते ही पुष्पराज सिंह सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में उनके एक पैर में फ्रैक्चर होने की जानकारी सामने आई है। दुर्घटना के बाद वाहन चालक मौके से निकल गया।

डायल 112 की मदद से अस्पताल पहुंचा घायल

दुर्घटना के बाद मौके पर मौजूद राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर डायल 112 की टीम घटनास्थल पर पहुंची और घायल को उपचार के लिए सिविल अस्पताल अमरपाटन पहुंचाया गया। यहां इमरजेंसी वार्ड में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सतना जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

क्या अस्पताल में नहीं था जरूरी मेडिकल स्प्लिंट?

मामले में सबसे बड़ा सवाल फ्रैक्चर वाले पैर को स्थिर करने के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री को लेकर है। आरोप है कि अस्पताल के कर्मचारियों ने कार्डबोर्ड का टुकड़ा लगाकर पैर पर पट्टी बांध दी। हालांकि यह स्पष्ट होना बाकी है कि ऐसा संसाधनों की कमी के कारण किया गया या तत्काल अस्थायी स्थिरीकरण की चिकित्सा आवश्यकता के तहत।

प्राथमिक उपचार की गुणवत्ता पर उठे सवाल

हड्डी टूटने की स्थिति में घायल अंग को अनावश्यक हिलने से रोकना प्राथमिक उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसके लिए उपयुक्त स्प्लिंट का इस्तेमाल किया जाता है। आपातकालीन परिस्थितियों में उपलब्ध कठोर सामग्री से अस्थायी स्प्लिंट भी बनाया जा सकता है, लेकिन उसे सही तरीके से लगाना और घायल की रक्त आपूर्ति तथा संवेदना की जांच करना आवश्यक है।

ऐसे में केवल गत्ते का इस्तेमाल होना अपने आप में चिकित्सकीय लापरवाही का प्रमाण नहीं माना जा सकता। हालांकि सरकारी अस्पताल में मानक उपकरणों की उपलब्धता, उपचार की प्रक्रिया और रेफरल के कारणों की जांच आवश्यक है।

सतना जिला अस्पताल भेजे जाने पर भी सवाल

प्राथमिक उपचार के बाद पुष्पराज सिंह को सतना जिला अस्पताल रेफर किया गया। गंभीर फ्रैक्चर के मामलों में विशेषज्ञ उपचार के लिए बड़े अस्पताल भेजना सामान्य चिकित्सा प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। लेकिन इस मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि अमरपाटन अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ, एक्स-रे और आवश्यक आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध थीं या नहीं।

स्वास्थ्य विभाग के सामने तीन अहम सवाल

पहला: सिविल अस्पताल में फ्रैक्चर के प्राथमिक उपचार के लिए मानक स्प्लिंट और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध थे या नहीं?
दूसरा: गत्ते से पैर को स्थिर करने का निर्णय किस चिकित्सकीय आधार पर लिया गया?
तीसरा: घायल को सतना रेफर करने की वास्तविक वजह क्या थी और क्या रेफरल के दौरान पर्याप्त सावधानियां बरती गईं?

जांच से ही स्पष्ट होगी उपचार की वास्तविक स्थिति

इस घटना ने ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता का मुद्दा फिर सामने ला दिया है। मरीज को दिया गया उपचार चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप था या उसमें कोई कमी रही, इसका निष्कर्ष उपचार संबंधी दस्तावेजों, संबंधित चिकित्सकों के स्पष्टीकरण और विभागीय जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

सवाल गत्ते का नहीं, इलाज की गुणवत्ता का है

अमरपाटन का मामला सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में संसाधनों, प्रशिक्षण और आपातकालीन उपचार की गुणवत्ता की समीक्षा की जरूरत को सामने लाता है। स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष और मरीज के उपचार संबंधी दस्तावेज स्पष्ट करेंगे कि इस मामले में निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।

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लेखक

Arti Lodhi

Editor In Chief

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