छत्तीसगढ़/जशपुर, रोहित तिर्की। ओडिशा की सीमा से उत्तर प्रदेश तक गांजा पहुंचाने के कथित नेटवर्क पर जशपुर पुलिस ने एक बार फिर बड़ी चोट की है। ऑपरेशन आघात के तहत लावाकेरा चेकिंग बैरियर पर रोके गए टाटा आईसर ट्रक की तलाशी में पुलिस ने 6 क्विंटल 32 किलो 380 ग्राम गांजा बरामद किया है।
तस्करी का तरीका भी ऐसा था कि सामान्य जांच में खेप पकड़ना आसान नहीं था। ट्रक में ऊपर की तरफ खाली बोतलों से भरी बोरियां रखी गई थीं और उनके नीचे टेप से लिपटे गांजे के पैकेट छिपाए गए थे। लेकिन पुलिस की जांच में परतें हटती गईं और आखिरकार बोरियों के नीचे छिपाई गई करोड़ों रुपये की खेप सामने आ गई।
लावाकेरा बैरियर पर रोका UP नंबर का ट्रक
पुलिस के मुताबिक 4 अक्टूबर को ओडिशा की तरफ से आने वाले संदिग्ध वाहनों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान UP-47-AT-9839 नंबर के टाटा आईसर ट्रक को संदेह के आधार पर लावाकेरा चेकिंग बैरियर पर रोका गया।
ट्रक की तलाशी शुरू हुई तो ऊपर खाली बोतलों से भरी बोरियां नजर आईं। जांच टीम ने इन बोरियों को हटाकर नीचे रखे सामान की जांच की तो वहां टेप से लिपटे बड़ी संख्या में पैकेट मिले।
पुलिस के अनुसार जांच करने पर इन पैकेटों में गांजा पाया गया। कुल 20 बोरियों में 597 पैकेट रखे हुए थे। वजन कराने पर बरामद गांजे की मात्रा 632.380 किलोग्राम निकली।
गांजा ₹3.16 करोड़ का, कुल जब्ती ₹3.41 करोड़
पुलिस ने बरामद गांजे की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ 16 लाख 19 हजार रुपये आंकी है। इसके अलावा तस्करी में इस्तेमाल टाटा आईसर ट्रक की कीमत करीब 25 लाख रुपये बताई गई है।
कार्रवाई में दो मोबाइल फोन और 3 हजार रुपये नकद भी जब्त किए गए। पुलिस के अनुसार गांजा, ट्रक, मोबाइल और नकदी को मिलाकर कुल जब्ती करीब 3 करोड़ 41 लाख 47 हजार रुपये की है।
गांजा — 632 किलो 380 ग्राम
पैकेट — 597
बोरियां — 20
गांजे की अनुमानित कीमत — ₹3,16,19,000
ट्रक — करीब ₹25 लाख
मोबाइल — 2
नकदी — ₹3,000
कुल जब्ती — करीब ₹3,41,47,000
बहराइच का आरोपी गिरफ्तार, ओडिशा से UP जा रही थी खेप
पुलिस ने ट्रक में सवार 42 वर्षीय विनोद कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के ग्राम बेरिया खलीलपुर, थाना देहात कोतवाली क्षेत्र का निवासी है।
प्रारंभिक पूछताछ के आधार पर पुलिस का कहना है कि गांजे की खेप ओडिशा से उत्तर प्रदेश ले जाई जा रही थी। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि इतनी बड़ी मात्रा में गांजा ओडिशा में कहां से लोड किया गया, इसके पीछे कौन लोग हैं और उत्तर प्रदेश में इसकी डिलीवरी किसे दी जानी थी।
NDPS Act के तहत मामला दर्ज
मामले में थाना तपकरा में अपराध क्रमांक 87/2026 दर्ज कर एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(B)(ii)(C) के तहत विवेचना शुरू की गई है।
पुलिस इस कार्रवाई को केवल ट्रक और गांजे की बरामदगी तक सीमित नहीं रख रही है। गांजे के स्रोत से लेकर उसे खरीदने, ट्रांसपोर्ट कराने और अंतिम रिसीवर तक पहुंचने वाले पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
2 अक्टूबर — 440 किलो 630 ग्राम गांजा बरामद
4 अक्टूबर — 632 किलो 380 ग्राम गांजा बरामद
दोनों कार्रवाइयों को मिलाकर महज दो दिनों में लावाकेरा बैरियर पर एक टन से ज्यादा गांजा पकड़ा गया।
दो दिन पहले मिर्च की बोरियों के नीचे मिला था 440 किलो गांजा
लावाकेरा चेकिंग बैरियर पर यह महज दो दिनों के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 2 अक्टूबर को एंटी नारकोटिक्स टीम और तपकरा पुलिस ने एक अन्य टाटा आईसर मिनी ट्रक की तलाशी ली थी।
उस कार्रवाई में तस्करों ने गांजे को मिर्च की बोरियों के नीचे छिपाया था। पुलिस ने तब 440 किलो 630 ग्राम गांजा बरामद किया था और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उस गांजे की अनुमानित कीमत करीब 2 करोड़ 20 लाख रुपये बताई गई थी।
यानी पहले मिर्च की बोरियां और अब खाली बोतलों से भरी बोरियां—दोनों मामलों में कथित तस्करों ने माल की आड़ में गांजा छिपाकर सीमा पार कराने का तरीका अपनाया, लेकिन लावाकेरा चेकिंग बैरियर पर दोनों खेप पकड़ ली गईं।
अब तस्करी की पूरी चेन तक पहुंचने की चुनौती
डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह के मुताबिक नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। पुलिस अब जब्त खेप के स्रोत, सप्लाई नेटवर्क और उत्तर प्रदेश में संभावित रिसीवर की जानकारी जुटा रही है।
लगातार दो बड़ी बरामदगियों ने यह भी साफ किया है कि ओडिशा सीमा से उत्तर भारत की ओर जाने वाले मार्ग पर बड़ी मात्रा में गांजे की तस्करी की कोशिश की जा रही है। ऐसे में पुलिस के सामने अब सबसे अहम चुनौती केवल खेप पकड़ना नहीं, बल्कि इसके पीछे सक्रिय कथित सप्लायर, ट्रांसपोर्टर और रिसीवर तक पहुंचकर पूरे नेटवर्क की कड़ी जोड़ना है।
पुलिस का कहना है कि अंतरराज्यीय सीमा पर संदिग्ध वाहनों की जांच लगातार जारी है। ताजा मामले में गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर तस्करी से जुड़े बाकी लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
लगातार दो दिनों में सामने आई इन बड़ी खेपों ने एक तरफ लावाकेरा बैरियर पर पुलिस की निगरानी का असर दिखाया है, तो दूसरी तरफ यह सवाल भी खड़ा किया है कि ओडिशा से उत्तर प्रदेश की ओर इतनी बड़ी मात्रा में गांजा भेजने वाले नेटवर्क की जड़ें आखिर कितनी गहरी हैं। इसका जवाब अब पुलिस की आगे की जांच से सामने आएगा।



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