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PM Modi Health Message: ‘आरोग्य ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का मूल’, पीएम मोदी ने चरक संहिता का संस्कृत सुभाषित किया साझा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए अच्छे स्वास्थ्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—जीवन के चार पुरुषार्थों की प्राप्ति का प्रमुख आधार बताया। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट ने भी इस पोस्ट और उसके अर्थ की पुष्टि की है।

PM Modi Health Message: ‘आरोग्य ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का मूल’, पीएम मोदी ने चरक संहिता का संस्कृत सुभाषित किया साझा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अच्छे स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करते हुए संस्कृत का एक प्रेरक सुभाषित साझा किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए इस संदेश में आरोग्य यानी उत्तम स्वास्थ्य को मानव जीवन के चार पुरुषार्थ—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—की प्राप्ति का प्रमुख आधार बताया गया है।

॥ संस्कृत सुभाषित ॥

सुखोपविष्टास्ते तत्र पुण्यां चक्रुः कथामिमाम्।
धर्मार्थकाममोक्षाणामारोग्यं मूलमुत्तमम्।।

इस सुभाषित का भाव है कि शांत भाव से बैठे महान ऋषियों ने इस पवित्र विषय पर विचार किया और कहा कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए आरोग्य यानी अच्छा स्वास्थ्य प्रमुख आधार है।

चरक संहिता में मिलता है यह प्रसिद्ध श्लोक

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह श्लोक आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथ चरक संहिता के सूत्रस्थान, प्रथम अध्याय के 15वें श्लोक में मिलता है। इस प्रसंग में ऋषियों की सभा और मानव जीवन में स्वास्थ्य के महत्व का उल्लेख किया गया है।

🌿 संदेश क्या है?
मनुष्य के जीवन में अनेक लक्ष्य हो सकते हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए शरीर और मन का स्वस्थ रहना महत्वपूर्ण है। इसी विचार को प्राचीन आयुर्वेदिक परंपरा में आरोग्य को जीवन के पुरुषार्थों का आधार बताकर व्यक्त किया गया है।

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—क्या हैं चार पुरुषार्थ?

भारतीय दार्शनिक परंपरा में मानव जीवन के उद्देश्यों को समझाने के लिए चार पुरुषार्थों की अवधारणा मिलती है। इनमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष शामिल हैं।

🙏 धर्म — कर्तव्य, आचरण और नैतिक जीवन से जुड़ी अवधारणा

💰 अर्थ — जीवन-यापन और आर्थिक साधनों से संबंधित

🌸 काम — इच्छाओं, आनंद और सांसारिक जीवन से संबंधित

🕉️ मोक्ष — आध्यात्मिक मुक्ति का लक्ष्य

इन सबके मूल में क्यों रखा गया आरोग्य?

इस श्लोक का केंद्रीय विचार यही है कि जीवन के विभिन्न उद्देश्यों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए स्वास्थ्य का विशेष महत्व है। अस्वस्थता व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों, आजीविका, सामाजिक जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित कर सकती है।

इसी व्यापक दृष्टिकोण से चरक संहिता के इस प्रसंग में ‘आरोग्यं मूलमुत्तमम्’ यानी आरोग्य को श्रेष्ठ आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

💚 सबसे बड़ा संदेश—स्वास्थ्य को दें प्राथमिकता

स्वस्थ शरीर और मन व्यक्ति को अपने दैनिक कर्तव्यों, कामकाज, परिवार और व्यक्तिगत लक्ष्यों की दिशा में बेहतर तरीके से आगे बढ़ने में मदद करते हैं। इसलिए स्वास्थ्य की देखभाल को जीवन की बुनियादी प्राथमिकताओं में शामिल करना महत्वपूर्ण है।

प्राचीन संदेश, आज भी प्रासंगिक

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किया गया यह सुभाषित प्राचीन भारतीय आयुर्वेदिक साहित्य में स्वास्थ्य को दिए गए महत्व की याद दिलाता है। आज की व्यस्त जीवनशैली में भी पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर उचित चिकित्सकीय सलाह स्वास्थ्य की देखभाल के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

प्रधानमंत्री के साझा किए गए संदेश का मूल भाव भी यही है कि जीवन के बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ने के लिए अच्छा स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण आधार है।

“आरोग्यं मूलमुत्तमम्”
अच्छा स्वास्थ्य जीवन के चार पुरुषार्थों की प्राप्ति का प्रमुख आधार
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लेखक

Arti Lodhi

Editor In Chief

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