हेल्थ डेस्क। डायबिटीज का खतरा बढ़ाने वाले कारणों में मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ती उम्र, पारिवारिक इतिहास और प्रीडायबिटीज जैसे कारकों के बारे में आमतौर पर चर्चा होती है। लेकिन वैज्ञानिक लंबे समय से यह भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या किसी व्यक्ति का A, B, AB या O ब्लड ग्रुप भी टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम से जुड़ा हो सकता है।
अब तक की रिसर्च में इसका जवाब पूरी तरह सीधा नहीं है। कुछ बड़े अध्ययनों में B ब्लड ग्रुप वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज के अधिक मामले या अधिक odds पाए गए हैं, लेकिन विशेषज्ञ ब्लड ग्रुप को अकेले डायबिटीज का स्थापित या निर्णायक रिस्क फैक्टर मानने की सलाह नहीं देते।
26 अध्ययनों की मेटा-एनालिसिस में क्या मिला?
2022 में प्रकाशित एक systematic review और meta-analysis में 26 अध्ययनों को शामिल किया गया था। इनमें टाइप-2 डायबिटीज वाले 6,870 लोगों और करीब 11,879 नियंत्रण प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
इस विश्लेषण में अन्य ABO ब्लड ग्रुप की तुलना में B ब्लड ग्रुप के लिए odds ratio 1.30 पाया गया। वहीं O ब्लड ग्रुप के लिए odds ratio 0.92 था। A और AB ब्लड ग्रुप के साथ कोई सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण association नहीं मिला। Rh पॉजिटिव या नेगेटिव होने का भी महत्वपूर्ण संबंध नहीं पाया गया।
| ब्लड ग्रुप | रिसर्च का संकेत |
|---|---|
| A | 2022 meta-analysis में महत्वपूर्ण association नहीं |
| B | अन्य समूहों की तुलना में अधिक odds का association |
| AB | महत्वपूर्ण association नहीं |
| O | अपेक्षाकृत कम odds से association |
2024 की बड़ी समीक्षा में भी B ग्रुप का कनेक्शन
2024 में प्रकाशित एक व्यापक umbrella review में ABO और Rh ब्लड ग्रुप से जुड़े स्वास्थ्य परिणामों पर पहले प्रकाशित systematic reviews और meta-analyses का मूल्यांकन किया गया। इसमें 51 systematic reviews और 270 associations की जांच की गई।
इस समीक्षा में सबसे मजबूत प्रमाण B ब्लड ग्रुप और टाइप-2 डायबिटीज के संबंध के लिए मिला। B बनाम non-B ब्लड ग्रुप के लिए summary odds ratio लगभग 1.28 पाया गया।
Odds ratio 1.28 को यह समझना गलत होगा कि B ब्लड ग्रुप वाले हर व्यक्ति में डायबिटीज का खतरा सीधे 28 प्रतिशत बढ़ जाता है। यह अध्ययन में समूहों के बीच पाए गए सांख्यिकीय association को दर्शाता है। इससे कारण और परिणाम का संबंध अपने आप साबित नहीं होता।
पुरानी स्टडी में A, B और AB को लेकर भी मिले थे संकेत
2015 में Diabetologia में प्रकाशित फ्रांस की बड़ी E3N cohort study ने भी ABO ब्लड ग्रुप और टाइप-2 डायबिटीज के बीच संबंध का अध्ययन किया था। इसमें 80 हजार से अधिक महिलाओं के डेटा का विश्लेषण किया गया।
O ब्लड ग्रुप की महिलाओं की तुलना में A ग्रुप में करीब 10%, B में करीब 21% और AB में करीब 17% अधिक जोखिम का अनुमान रिपोर्ट किया गया था। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अध्ययन महिलाओं के एक विशेष फ्रांसीसी cohort पर आधारित था, इसलिए इन प्रतिशतों को भारत की पूरी आबादी या हर पुरुष-महिला पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
क्या Rh पॉजिटिव या नेगेटिव होने से फर्क पड़ता है?
ब्लड ग्रुप A, B, AB और O के साथ व्यक्ति का ब्लड ग्रुप पॉजिटिव या नेगेटिव भी होता है। इसे Rh factor कहा जाता है। लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर RhD antigen मौजूद होने पर ब्लड ग्रुप पॉजिटिव और इसके नहीं होने पर नेगेटिव कहा जाता है।
2022 की meta-analysis में Rh factor और टाइप-2 डायबिटीज के बीच कोई महत्वपूर्ण association नहीं मिला। इसलिए केवल B+ या B- जैसे वर्गीकरण के आधार पर किसी व्यक्ति के डायबिटीज जोखिम का अनुमान लगाना उचित नहीं है।
ब्लड ग्रुप से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं ये रिस्क फैक्टर
अमेरिका के National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases यानी NIDDK के अनुसार टाइप-2 डायबिटीज के स्थापित प्रमुख रिस्क फैक्टर में अधिक वजन या मोटापा, बढ़ती उम्र, परिवार में डायबिटीज का इतिहास, शारीरिक निष्क्रियता, प्रीडायबिटीज और गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज का इतिहास शामिल हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि NIDDK की प्रमुख clinical risk-factor सूची में ABO ब्लड ग्रुप को स्थापित डायबिटीज रिस्क फैक्टर के रूप में शामिल नहीं किया गया है। इसलिए सिर्फ ब्लड ग्रुप देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति को डायबिटीज होगी या नहीं।
भारत में 8.98 करोड़ वयस्क डायबिटीज के साथ
International Diabetes Federation की Diabetes Atlas 11th Edition के मुताबिक वर्ष 2024 में भारत में 20 से 79 वर्ष की आयु के करीब 89.8 मिलियन यानी लगभग 8.98 करोड़ वयस्क डायबिटीज के साथ रह रहे थे। संख्या के लिहाज से भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरे स्थान पर था।
इतनी बड़ी आबादी को देखते हुए डायबिटीज की रोकथाम में ब्लड ग्रुप जैसे संभावित biomarkers पर शोध महत्वपूर्ण है, लेकिन रोजमर्रा के स्तर पर वजन नियंत्रित रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और जरूरत के अनुसार ब्लड शुगर की जांच ज्यादा व्यावहारिक और स्थापित उपाय हैं।
नहीं। कुछ अध्ययनों में B ब्लड ग्रुप और टाइप-2 डायबिटीज के बीच association मिला है, लेकिन ब्लड ग्रुप अकेले यह तय नहीं करता कि किसी व्यक्ति को डायबिटीज होगी। परिवार में डायबिटीज, मोटापा, कम शारीरिक गतिविधि, उम्र, प्रीडायबिटीज और अन्य metabolic factors वास्तविक जोखिम के आकलन में अधिक महत्वपूर्ण हैं।
स्वास्थ्य संबंधी सूचना: यह जानकारी जागरूकता के उद्देश्य से है। केवल अपने ब्लड ग्रुप के आधार पर डायबिटीज का जोखिम तय न करें। यदि परिवार में डायबिटीज है, वजन अधिक है, प्रीडायबिटीज है या अन्य जोखिम मौजूद हैं तो डॉक्टर की सलाह से ब्लड ग्लूकोज/HbA1c जांच कराएं।



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